'1 घंटे में दे दूंगा इस्तीफा...' ममता बनर्जी के भतीजे ने किसे और क्यों दे डाला खुला चैलेंज?

Published : Jul 18, 2026, 11:04 PM IST
TMC Crisis

सार

Abhishek Banerjee Challenge: अभिषेक बनर्जी ने बागी सांसदों और विधायकों को खुली चुनौती देते हुए 1 घंटे में इस्तीफा देने की पेशकश की है। जानिए पूरा मामला…

TMC Crisis: पश्चिम बंगाल की सियासत में एक बार फिर बड़ा मोड़ आ गया है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) के राष्ट्रीय महासचिव और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी ने अपनी ही पार्टी के बागी सांसदों और विधायकों को ऐसी खुली चुनौती दी है, जिसने राजनीतिक गलियारों में हलचल बढ़ा दी है। उन्होंने साफ कहा कि अगर बागी नेता दोबारा ममता बनर्जी के नेतृत्व में पार्टी में लौट आते हैं, तो वह सिर्फ एक घंटे के भीतर अपना पद छोड़ देंगे। यह बयान ऐसे समय आया है, जब लोकसभा में टीएमसी के 20 बागी सांसदों के विलय को लेकर बड़ा फैसला आने की चर्चा तेज है।

अभिषेक बनर्जी को आखिर क्यों देनी पड़ी इस्तीफे की चुनौती?

अभिषेक बनर्जी ने शनिवार को कहा कि अगर पार्टी छोड़ने वाले नेताओं की नाराजगी सिर्फ उनसे है और यही वजह है कि उन्होंने बगावत की, तो उन्हें वापस ममता बनर्जी के पास लौट आना चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर वह ही सभी विवादों की वजह हैं, तो वह पद छोड़ने के लिए तैयार हैं। लेकिन पार्टी और ममता बनर्जी के नेतृत्व को कमजोर नहीं होना चाहिए। अभिषेक ने कहा, 'अगर मैं ही आप सबका इकलौता टारगेट हूं, तो आप सब वापस पार्टी में आ जाइए, मैं 1 घंटे के अंदर अपने पद से इस्तीफा दे दूंगा।' उनके इस बयान को टीएमसी के अंदर चल रही खींचतान के बीच बड़ा राजनीतिक संदेश माना जा रहा है।

20 बागी सांसदों पर टिकी सबकी नजर

पूरे मामले की सबसे अहम कड़ी टीएमसी के 20 बागी सांसद हैं। खबरों के मुताबिक, इन सांसदों ने पहले ही नेशनलिस्ट सिटिजंस पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) में विलय का ऐलान कर दिया है। अब सबकी नजर लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के फैसले पर है। अगर इस विलय को मंजूरी मिलती है, तो संसद का राजनीतिक समीकरण बदल सकता है।

शिवसेना (UBT) में भी टूट

सिर्फ टीएमसी ही नहीं, महाराष्ट्र की राजनीति में भी हलचल है। शिवसेना (उद्धव गुट) के छह सांसद एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल हो चुके हैं। इन दोनों मामलों पर लोकसभा स्पीकर का फैसला राष्ट्रीय राजनीति के लिए अहम माना जा रहा है।

NDA की ताकत बढ़ सकती है

अगर दोनों विलय को मंजूरी मिल जाती है, तो लोकसभा में एनडीए की ताकत और बढ़ जाएगी। मौजूदा समय में एनडीए के पास 292 सीटें हैं। संभावित विलय के बाद यह संख्या 318 तक पहुंच सकती है। इससे सरकार दो-तिहाई बहुमत के और करीब पहुंच जाएगी।

इससे NDA को क्या फायदा होगा?

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि अगर एनडीए की संख्या बढ़ती है, तो सरकार के लिए कई बड़े विधेयकों को आगे बढ़ाना आसान हो सकता है। इसी बीच संविधान संशोधन से जुड़े प्रस्ताव, लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाने और महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण लागू करने जैसे मुद्दों पर भी चर्चाएं तेज हो गई हैं। हालांकि, इन पर अंतिम फैसला संसद की प्रक्रिया के बाद ही होगा।

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