West Bengal Politics: TMC के 'दागी' नेता अब BJP के 'रत्न'? बंगाल में रातों-रात बदल रही है सियासत

Published : May 05, 2026, 04:53 PM IST
West Bengal Politics: TMC के 'दागी' नेता अब BJP के 'रत्न'? बंगाल में रातों-रात बदल रही है सियासत

सार

पश्चिम बंगाल में हार के बाद TMC कार्यकर्ता तेजी से पाला बदलकर BJP में जा रहे हैं। रातों-रात पार्टी दफ्तरों पर भगवा झंडे लग गए हैं। यह अवसरवादी दलबदल BJP की अपनी विचारधारा के लिए एक चुनौती प्रस्तुत करता है।

(Rajat Karmakar का लेख)

'डुगडुगडुगडुग देखो बाबू, खेल देखो रे।।।

बंदर नाचेगा, बंदरिया नाचेगी, आसमान से पैसा गिरेगा।।।'

पश्चिम बंगाल में आजकल कुछ ऐसा ही सियासी खेल चल रहा है। एक-दूसरे से होड़ मची है। कौन कितनी जल्दी भगवा रंग में रंगकर ये साबित कर दे कि 'गुरु, हम तो पक्के BJP वाले हैं!'

मैं टॉलीगंज का रहने वाला हूं। मेरे घर के पास ही तृणमूल कांग्रेस (TMC) के कई पार्टी ऑफिस हैं। कल शाम तक इन दफ्तरों पर ताले लटके थे, शटर बंद थे। जो कुछ TMC समर्थक रोज यहां बैठकर टीवी पर खबरें और मैच देखते थे, उनमें से कुछेक ही दिखे, वो भी मायूस। लेकिन आज सुबह तक तस्वीर पूरी तरह बदल गई! TMC का झंडा, ममता-अभिषेक-अरूप की तस्वीरों वाले बोर्ड, सब गायब। रातों-रात पार्टी ऑफिस पर BJP के झंडे लग गए हैं। बस शटर खुलना बाकी है। ये सब देखकर स्थानीय लोग मुस्कुरा रहे हैं। कुछ लोग तो नाराज़ होकर कह रहे हैं, 'गिरगिट भी इनसे ट्यूशन लेने आ सकता है।'

TMC और विचारधारा…

मैंने कई रिपोर्ट्स में पढ़ा और पॉडकास्ट में सुना है कि TMC में ज़्यादातर लोग विचारधारा के लिए नहीं हैं। कई लोग तो दबी जुबान में TMC को 'टका मारा कंपनी' (पैसे मारने वाली कंपनी) कहते थे। अब तो खुलकर बोल रहे हैं। तो जो लोग पैसा मारते थे, वही तो अब भगवा गुलाल लगाकर घूम रहे हैं! जो मोहल्ले-मोहल्ले में सिंडिकेट चलाते थे, लोगों पर अत्याचार करते थे, वो रातों-रात दूसरी पार्टी में जाकर वाल्मीकि बन जाएंगे, इसकी क्या गारंटी है? तो अब ये 'बिन बुलाया पानी' BJP की उपजाऊ जमीन पर फसल उगाने के लिए तैयार है।

और सिर्फ छोटे कार्यकर्ताओं को दोष क्यों दें। कानों-कान खबर है कि चुनाव नतीजे आने से पहले ही पूर्व मंत्री और विधायक अरूप बिस्वास ने सोनारपुर में एक स्थानीय BJP नेत्री के फार्महाउस पर बिप्लब देब के साथ मीटिंग कर ली थी। इस लिस्ट में सुजीत बसु, सब्यसाची दत्ता जैसे कई और बड़े नाम भी सुने जा रहे हैं। स्थानीय लोगों ने तो अरूप का एक नया नाम भी रख दिया है। वैसे ये नाम नया नहीं है। जबसे युवा भारती स्टेडियम में मेसी वाला कांड हुआ था, तब से ही लोग उन्हें 'मेसी-अरूप' बुलाने लगे थे। कुछ लोग मज़ाक में कहते थे, 'टॉलीगंज में TMC वाले अब नीली-सफेद जर्सी देखकर ही चिढ़ जाते हैं, जो मेसी की 10 नंबर जर्सी का रंग है।'

नाम और बदनामियां

हार के बाद से अरूप बिस्वास इलाके में दिखे नहीं हैं। टॉलीगंज के स्टूडियो পাড়া (स्टूडियो पारा) से लेकर आम लोगों तक, कोई भी उनके बारे में अच्छा नहीं बोलता। जो अब तक बोलते थे, वो डर से बोलते थे। वजह बताने की जरूरत नहीं है। मंदिरों के चंदे में हिस्सा, मैदान पर कब्जा करके दुकानें बेचना, सिंडिकेट, हर चीज में अरूप का नाम जुड़ा हुआ था। लोग जानते थे कि पुलिस में शिकायत करने का कोई फायदा नहीं होगा। सामने सब चुप रहते थे, लेकिन अंदर ही अंदर गुस्सा था। वही गुस्सा वोटिंग में निकला है।

अब ये नजारा सिर्फ टॉलीगंज का है या पूरे राज्य का, ये जानने के लिए कुछ दिन और इंतजार करना होगा। लेकिन टॉलीगंज के TMC कार्यकर्ताओं, माफ कीजिएगा, पूर्व TMC कार्यकर्ताओं का प्रोसेसर काफी तेज है, ये तो साफ है। और सिर्फ यही क्यों, रिक्शावाले, ऑटोवाले, दुकानदार - सबने रातों-रात TMC के झंडे हटाकर कमल के झंडे लगा लिए हैं। कुछ इसी तरह 2011 में लेफ्ट के मौकापरस्त कार्यकर्ता भी TMC में शामिल हो गए थे। कुछ मार खाने के डर से, कुछ पुलिस केस से बचने के लिए, और ज्यादातर सिर्फ पैसा कमाने के लिए। जैसा कि पहले कहा, TMC कोई विचारधारा के लिए नहीं करता। लेकिन BJP तो खुद को एक अनुशासित और विचारधारा वाली पार्टी बताती है। अगर ये 'बिन बुलाया पानी' पार्टी में शामिल हो गया, तो क्या BJP का शीर्ष नेतृत्व गारंटी दे सकता है कि उनकी विचारधारा नाली में नहीं बह जाएगी?

लूट की खुली छूट

TMC ने ये गलती शायद जान-बूझकर की। पिछले 15 सालों में ममता बनर्जी की एक ही नीति रही है: चुनाव में मुझे जिताओ, बदले में तुम्हें कुछ भी करने की खुली छूट है। मतलब, 'मैं और मेरी पार्टी जीत गई, तो तुम लोग जो चाहे करो, जैसे चाहे लूटो, बस मेरा हिस्सा पहुंचा देना।' राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि एक ऐसा ही अघोषित समझौता काम कर रहा था। अब यही 'बिन बुलाया पानी' कुछ तो मार खाने के डर से और ज्यादातर अपनी कमाई बंद न हो जाए, इसलिए गिरगिट को शर्मिंदा करते हुए 'भगवाधारी' बन गया है।

जय श्री राम का नारा लगाने वाले BJP समर्थक भी ये अच्छी तरह जानते हैं कि रावण ने भगवा वस्त्र पहनकर ही सीता का हरण किया था। भगवा पहनने से हर कोई त्यागी नहीं हो जाता। और इन लोगों ने कभी कुछ त्यागा हो, ऐसा तो इनके कट्टर समर्थक भी नहीं कह सकते। इसलिए, साधु सावधान! बिन बुलाए पानी से पार्टी का क्या हाल हो सकता है, इसका जीता-जागता उदाहरण TMC खुद है। उससे पहले लेफ्ट पार्टियों ने भी यही गलती की थी। और जब भी इन दलबदलुओं के कारण कोई पार्टी हारी है, तो वो पूरी तरह हारी है। वापसी का रास्ता नहीं मिला।

क्या BJP भी वही गलती दोहराएगी?

PREV

Asianet News Hindi पर पढ़ें देशभर की सबसे ताज़ा National News in Hindi, जो हम खास तौर पर आपके लिए चुनकर लाते हैं। दुनिया की हलचल, अंतरराष्ट्रीय घटनाएं और बड़े अपडेट — सब कुछ साफ, संक्षिप्त और भरोसेमंद रूप में पाएं हमारी World News in Hindi कवरेज में। अपने राज्य से जुड़ी खबरें, प्रशासनिक फैसले और स्थानीय बदलाव जानने के लिए देखें State News in Hindi, बिल्कुल आपके आसपास की भाषा में। उत्तर प्रदेश से राजनीति से लेकर जिलों के जमीनी मुद्दों तक — हर ज़रूरी जानकारी मिलती है यहां, हमारे UP News सेक्शन में। और Bihar News में पाएं बिहार की असली आवाज — गांव-कस्बों से लेकर पटना तक की ताज़ा रिपोर्ट, कहानी और अपडेट के साथ, सिर्फ Asianet News Hindi पर।

Read more Articles on

Recommended Stories

Raghav Chadha Meet President: राष्ट्रपति से मिलने के बाद भगवंत मान-केजरीवाल पर जमकर बरसे राघव चड्ढा
108 सीटें जीतकर भी संकट में विजय! क्या 2 हफ्तों में बन पाएगी TVK की सरकार?