
नई दिल्ली: तृणमूल कांग्रेस (TMC) में मची खींचतान के बीच अब लोकसभा स्पीकर ओम बिड़ला ने दोनों पक्षों को बातचीत के लिए बुलाया है। स्पीकर ऑफिस ने पार्टी के आधिकारिक नेतृत्व और बागी सांसदों, दोनों को चिट्ठी भेजी है। ममता बनर्जी के खेमे और बागियों की दलीलें सुनने के बाद ही स्पीकर विलय पर कोई फैसला लेंगे।
बंगाल का सियासी ड्रामा उस वक्त और गरमा गया, जब TMC छोड़ चुके बागी सांसदों ने एक साथ NCPI में शामिल होने का ऐलान कर दिया। संकेत हैं कि और भी कई नेता बागी गुट में शामिल हो सकते हैं। इसी बीच, ममता बनर्जी के करीबी और कोलकाता पोर्ट के विधायक फिरहाद हकीम, बीजेपी नेता और बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के साथ एक कार्यक्रम में दिखे। ममता के बहनोई, जो एक काउंसलर हैं, भी इस कार्यक्रम में मौजूद थे। बागी गुट ने काकोली घोष दस्तीदार को NCPI का अध्यक्ष बनाने का फैसला किया है। उन्होंने यह भी बताया है कि 20 सांसदों के NCPI में शामिल होने की जानकारी चुनाव आयोग को दे दी गई है। हालांकि, TMC का आरोप है कि जिस NCPI पार्टी में बागी शामिल हुए हैं, वह रजिस्टर्ड ही नहीं है।
दरअसल, बागी सांसद लोकसभा में अलग गुट के तौर पर बैठने की इजाजत हासिल नहीं कर पाए। इसके बाद अयोग्यता से बचने के लिए उन्होंने NCPI नाम की एक अनजान पार्टी में विलय का फैसला किया। बागियों का कहना है कि दो-तिहाई सांसदों के दूसरी पार्टी में विलय करने से उनकी सदस्यता बच जाएगी। लेकिन कानून के जानकार मानते हैं कि सिर्फ इतने से उनकी अयोग्यता नहीं टलेगी।
वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल और मनु अभिषेक सिंघवी ने भी साफ किया है कि कानून के मुताबिक, अयोग्यता से बचने के लिए सिर्फ सांसदों का नहीं, बल्कि पार्टी के दो-तिहाई सदस्यों का विलय जरूरी है। इसी दलील को आधार बनाकर TMC का ममता खेमा बागियों पर तंज कस रहा है। उनका कहना है कि बीजेपी ने भी बागियों के लिए दरवाजे बंद कर दिए हैं और उन्हें सिर्फ मेहमान की तरह देखा जा रहा है।
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