
नई दिल्ली/कोलकाता: पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के राजनीतिक साम्राज्य में एक ऐसा भूचाल आ चुका है, जिसने तृणमूल कांग्रेस (TMC) के अस्तित्व को ही संकट में डाल दिया है। बुधवार, 10 जून 2026 को टीएमसी की दिग्गज नेता और राज्यसभा सांसद सुष्मिता देव ने अचानक अपने पद से इस्तीफा दे दिया। सुखेंदु शेखर रॉय के बाद, महज एक हफ्ते के भीतर संसद के उच्च सदन से इस्तीफा देने वाली वह दूसरी बड़ी नेता बन गई हैं। इस नाटकीय घटनाक्रम ने दिल्ली से लेकर कोलकाता तक की सियासत में खलबली मचा दी है।
सुष्मिता देव के इस कदम के पीछे की कहानी बेहद चौंकाने वाली है। सूत्रों के मुताबिक, देव आज दोपहर ठीक 1 बजे उपराष्ट्रपति और राज्यसभा के सभापति सी.पी. राधाकृष्णन से मिलकर अपना इस्तीफा आधिकारिक तौर पर सौंपेंगी। लेकिन सस्पेंस यहीं खत्म नहीं होता। अंदरूनी सूत्रों का दावा है कि पद छोड़ने से ठीक पहले सुष्मिता देव ने टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी से माफी भी मांगी है। असम की राजनीति में एक बड़ा रसूख रखने वाली देव को आखिरकार यह अहसास हो गया कि टीएमसी या कांग्रेस के जरिए असम की जमीन पर टिके रहना अब उनके लिए नामुमकिन है।
Sushmita Dev who jumped to TMC from the Congress resigns from party, likely to switch to the BJP now. Meeting with Assam CM Himanta Biswa Sharma done. pic.twitter.com/nh4RZK3HNI
— Prashant Kumar (@scribe_prashant) June 10, 2026
राजनीतिक गलियारों में सबसे बड़ी अटकल इस बात को लेकर है कि सुष्मिता देव का अगला ठिकाना क्या होगा? कूटनीतिक सूत्रों के हवाले से खबर आई है कि बीजेपी में शामिल होने का अंतिम फैसला लेने से पहले देव ने असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के साथ एक बेहद गोपनीय मुलाकात की थी। इस बैठक के बाद अब यह पूरी तरह तय माना जा रहा है कि वह जल्द ही भारतीय जनता पार्टी (BJP) का दामन थामने वाली हैं और बीजेपी उम्मीदवार के तौर पर एक बार फिर राज्यसभा के रास्ते संसद में वापसी करेंगी। टीएमसी के वरिष्ठ नेता सौगत रॉय ने भी भारी मन से कबूल किया है कि सुष्मिता का जाना पार्टी के लिए एक "बहुत बड़ा झटका" है।
सिर्फ एक सप्ताह पहले राज्यसभा में TMC के लंबे समय तक चीफ़ व्हिप रहे सुखेंदु शेखर रॉय ने भी इस्तीफ़ा देकर सबको चौंका दिया था। अपने तीखे पत्र में उन्होंने पार्टी पर भ्रष्टाचार, प्रशासनिक विफलता और महिलाओं की सुरक्षा जैसे गंभीर आरोप लगाए थे। अब सुष्मिता देव का अचानक इस्तीफ़ा इस बात को और मजबूत करता है कि पार्टी के भीतर सब कुछ सामान्य नहीं है। सवाल उठ रहा है कि क्या यह केवल शुरुआत है और आने वाले दिनों में और भी बड़े नाम TMC से दूरी बना सकते हैं?
#BREAKING
बंगाल की राजनीति में बड़ा झटका, TMC से सुष्मिता देव का इस्तीफा
पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) की राज्यसभा सांसद Sushmita Dev ने पार्टी और राज्यसभा से इस्तीफा दे दिया है।
यह पिछले एक सप्ताह में पार्टी के लिए दूसरा बड़ा… pic.twitter.com/Th3chfiT9P— UN News (@UNNEWS_24X7) June 10, 2026
टीएमसी में बगावत की यह चिंगारी संसद तक कैसे पहुंची, इसकी कहानी एक हफ्ते पहले शुरू हुई थी। 13 साल तक राज्यसभा में टीएमसी के चीफ व्हिप रहे सुखेंदु शेखर रॉय ने ममता बनर्जी को एक बेहद तीखा और विस्फोटक पत्र लिखकर इस्तीफा दे दिया था। सुखेंदु ने अपने पत्र में लिखा था: "बंगाल की जनता ने पार्टी के बेतहाशा भ्रष्टाचार, महिलाओं के प्रति अत्यधिक उत्पीड़न और शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार व कानून-व्यवस्था में फैली भारी अराजकता को पूरी तरह नकार दिया है। इतिहास में पहली बार मतदाताओं ने भाजपा को सीटों के मामले में भारी जीत दिलाई है और नई सरकार बंगाल के पुनर्निर्माण में जुट गई है।"
TMC के भीतर चल रहा यह संकट केवल दो इस्तीफों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक बहुत बड़ी संगठनात्मक बगावत का रूप ले चुका है। बागी TMC सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने सोमवार को एक ऐसा दावा किया जिसने राजनीतिक पंडितों के होश उड़ा दिए। दस्तीदार के अनुसार, TMC के 28 लोकसभा सांसदों में से कम से कम 20 सांसद राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) का समर्थन करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। इस बागी गुट ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को एक पत्र भी सौंपा है। इस बागी धड़े का नेतृत्व खुद काकोली घोष दस्तीदार कर रही हैं और वरिष्ठ सांसद शताब्दी रॉय को इस समूह का उप-नेता बनाया गया है।
इस बगावत का सीधा असर देश की राजधानी में भी दिखने लगा है। नई दिल्ली में TMC की गतिविधियों का मुख्य केंद्र माने जाने वाले सरकारी बंगले से पार्टी सांसद पार्थ भौमिक ने खुद ही हटने का अनुरोध किया और मंगलवार को वहां से अपना बोरिया-बिस्तर समेट लिया। इस बीच, बढ़ते दबाव को देख टीएमसी नेतृत्व ने भी तीखा रुख अख्तियार कर लिया है। पार्टी के कद्दावर नेता कल्याण बनर्जी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बागी गुट पर जमकर भड़ास निकाली। उन्होंने कहा कि जो नेता पार्टी से नाखुश हैं, उन्हें संगठन का सार्वजनिक तमाशा बनाने के बजाय नैतिक रूप से तुरंत अपने पदों से इस्तीफा दे देना चाहिए।
61 विधायकों के बागी नेता रिताब्रता बनर्जी के पक्ष में खड़े होने और अब संसद में दो फाड़ होने के दावों के बाद, ममता बनर्जी की अपनी पार्टी पर पकड़ पूरी तरह कमजोर होती दिख रही है। अब देखना यह है कि क्या ममता इस सबसे बड़े बिखराव को रोक पाती हैं, या टीएमसी का यह किला पूरी तरह ढहने वाला है? सस्पेंस गहरा चुका है।
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