52 लाख भारतीयों से क्यों परेशान हैं TRUMP? Hellhole वाले बयान का समझिए पूरा गणित

Published : Apr 24, 2026, 07:44 PM IST
Trump Calls India a Hellhole Birthright Citizenship Row Sparks Debate Over Indian Immigrants in America

सार

Trump Birthright Citizenship India: डोनाल्ड ट्रंप ने भारत और चीन को ‘हेलहोल’ बताने वाली पोस्ट शेयर कर नया विवाद खड़ा कर दिया। बर्थराइट सिटिजनशिप, अमेरिका में बढ़ती भारतीय आबादी और भारतीयों पर बढ़ते गुस्से के पीछे की पूरी कहानी जानिए।

Trump On Indian Immigrants USA: अमेरिका की राजनीति में एक बार फिर भारत का नाम सुर्खियों में है। इस बार वजह कोई व्यापार समझौता, वीजा नीति या कूटनीतिक बयान नहीं, बल्कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की एक सोशल मीडिया पोस्ट है, जिसने नया विवाद खड़ा कर दिया है। ट्रंप ने हाल ही में एक पोस्ट साझा की, जिसमें भारत और चीन को “Hellhole” यानी “नरक जैसा” बताया गया। यह पोस्ट कंजरवेटिव पॉडकास्ट होस्ट माइकल सैवेज की थी, जिसमें अमेरिका की जन्म आधारित नागरिकता यानी Birthright Citizenship कानून की आलोचना की गई थी। पोस्ट में दावा किया गया कि प्रवासी अपने बच्चों को अमेरिका में जन्म दिलाकर नागरिकता हासिल करते हैं और फिर अपने पूरे परिवार को भारत, चीन जैसे देशों से अमेरिका बुला लेते हैं। इसी बहस ने भारतीयों को लेकर एक नई राजनीतिक चर्चा छेड़ दी है।

क्या है बर्थराइट सिटिजनशिप का मामला?

अमेरिका में जन्म लेने वाला हर बच्चा, चाहे उसके माता-पिता किसी भी देश के हों, जन्म के साथ अमेरिकी नागरिक माना जाता है। यह व्यवस्था 1868 में अमेरिकी संविधान के 14वें संशोधन के तहत लागू हुई थी। गृहयुद्ध के बाद लाए गए इस कानून का उद्देश्य नागरिक अधिकारों को मजबूत करना था। लेकिन डोनाल्ड ट्रंप और उनके समर्थक लंबे समय से इसका विरोध करते रहे हैं। ट्रंप का तर्क है कि इस कानून का दुरुपयोग हो रहा है और इसे अदालतों या कानूनी व्याख्याओं के बजाय जनता की इच्छा के अनुसार बदला जाना चाहिए। 20 जनवरी 2025 को ट्रंप ने जन्म आधारित नागरिकता पर रोक लगाने की कोशिश भी की थी, लेकिन यह मामला अभी अमेरिकी अदालतों में लंबित है।

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अमेरिका में तेजी से बढ़ रही भारतीय आबादी

इस बहस के केंद्र में भारतीय समुदाय भी है। अमेरिका में भारतीय मूल की आबादी पिछले दो दशकों में तेजी से बढ़ी है। US Census Bureau के अनुमान के अनुसार, 2023 में लगभग 52 लाख लोगों ने खुद को भारतीय मूल का बताया। वहीं Pew Research Center की मई 2025 की रिपोर्ट के मुताबिक भारतीय-अमेरिकी, अमेरिका की दूसरी सबसे बड़ी एशियाई आबादी हैं। कुल एशियाई आबादी में भारतीयों की हिस्सेदारी लगभग 21 प्रतिशत है।

23 साल में 174% बढ़ी भारतीय आबादी

साल 2000 में अमेरिका में भारतीय मूल के लोगों की संख्या करीब 18 लाख थी, जो 2023 तक बढ़कर लगभग 49 लाख हो गई। यानी सिर्फ 23 वर्षों में 174 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज हुई। इनमें से करीब 66 प्रतिशत लोग ऐसे हैं, जो दूसरे देशों से आकर अमेरिका में बसे हैं। वहीं बड़ी संख्या अब अमेरिका में जन्मे भारतीय मूल के युवाओं की भी है। करीब 51 प्रतिशत भारतीय मूल के लोग अमेरिकी नागरिकता भी ले चुके हैं।

भारतीयों की मजबूत आर्थिक और शैक्षणिक स्थिति

अमेरिका में भारतीय समुदाय को सबसे सफल प्रवासी समूहों में गिना जाता है। 25 वर्ष से अधिक उम्र के 77 प्रतिशत भारतीयों के पास ग्रेजुएशन या उससे ऊपर की डिग्री है। भारतीय परिवारों की औसत वार्षिक आय 1,51,200 डॉलर है, जो एशियाई औसत से भी अधिक है। करीब 62 प्रतिशत भारतीयों के पास अपना घर है और लगभग 70 प्रतिशत भारतीय वयस्क शादीशुदा हैं। यह आर्थिक मजबूती भी कई बार राजनीतिक बहस का हिस्सा बन जाती है।

कौन सी भाषा बोलते हैं भारतीय?

5 वर्ष से अधिक उम्र के 84 प्रतिशत भारतीय अच्छी अंग्रेजी बोलते हैं। इनमें 28 प्रतिशत लोग घर में केवल अंग्रेजी बोलते हैं, जबकि 56 प्रतिशत दूसरी भाषा के साथ अंग्रेजी का भी प्रभावी उपयोग करते हैं। घर में सबसे अधिक बोली जाने वाली भाषाओं में हिंदी (18%), तेलुगु (11%), गुजराती (10%) और तमिल (7%) शामिल हैं। यानी “अब यहां अंग्रेजी नहीं बोली जाती” जैसे दावे पूरी तरह तथ्यात्मक नहीं माने जा सकते।

सबसे ज्यादा भारतीय कहां रहते हैं?

अमेरिका में सबसे ज्यादा भारतीय कैलिफोर्निया में रहते हैं, जहां उनकी संख्या लगभग 9.6 लाख है।इसके बाद टेक्सास, न्यू जर्सी, न्यूयॉर्क और इलिनोइस जैसे राज्यों में बड़ी भारतीय आबादी मौजूद है। न्यूयॉ, डलास और सैन फ्रांसिस्को जैसे बड़े शहर भारतीय समुदाय के प्रमुख केंद्र माने जाते हैं।

ट्रंप का बयान और राजनीतिक संदेश

ट्रंप की यह पोस्ट सिर्फ सोशल मीडिया प्रतिक्रिया नहीं, बल्कि 2026 के अमेरिकी राजनीतिक माहौल का संकेत भी मानी जा रही है।इमिग्रेशन, नागरिकता और राष्ट्रीय पहचान जैसे मुद्दे अमेरिका की राजनीति में हमेशा संवेदनशील रहे हैं। भारतीयों की बढ़ती संख्या और उनकी मजबूत सामाजिक-आर्थिक स्थिति अब इस बहस के केंद्र में दिखाई दे रही है। हालांकि भारतीय-अमेरिकी समुदाय का बड़ा हिस्सा शिक्षा, टेक्नोलॉजी, स्वास्थ्य और व्यापार में अहम योगदान दे रहा है, फिर भी राजनीतिक ध्रुवीकरण के दौर में प्रवासियों को निशाना बनाया जाना नई बात नहीं है।

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