
Donald Trump Hormuz Strait: फ्रांस में होने वाले G7 शिखर सम्मेलन से ठीक पहले वैश्विक राजनीति में एक ऐसा भूचाल आया है जिसने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉन के साथ एक बेहद अहम द्विपक्षीय बातचीत की शुरुआत में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एलान किया कि आगामी शुक्रवार से होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को "पूरी तरह से खोल" दिया जाएगा। मध्य पूर्व (Middle East) में महीनों से जारी भीषण युद्ध के कारण इस सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग पर जहाजों की आवाजाही लगभग ठप हो गई थी, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति पर संकट के बादल मंडरा रहे थे। लेकिन ट्रंप के इस एलान ने अंतरराष्ट्रीय बाजारों को राहत तो दी है, पर अपने पीछे कई अनसुलझे सवाल भी छोड़ दिए हैं।
भले ही राष्ट्रपति ट्रंप ने शुक्रवार से इस जलमार्ग को पूरी तरह खोलने का दावा किया हो, लेकिन उन्होंने जो अगली बात कही, उसने सुरक्षा विशेषज्ञों के कान खड़े कर दिए हैं। ट्रंप ने स्वीकार किया कि होर्मुज जलडमरूमध्य वर्तमान में "पहले से ही आंशिक रूप से खुला" था, लेकिन सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि वहां अभी भी बड़े पैमाने पर "खोज अभियान" चल रहा है। यह खोज किसी खजाने की नहीं, बल्कि पानी के नीचे बिछाई गई उन खतरनाक 'बारूदी सुरंगों' (Sea Mines) की है, जो किसी भी बड़े जहाज को पल भर में राख कर सकती हैं। जब तक यह पक्का नहीं हो जाता कि वहां से सभी बारूदी सुरंगें हटा दी गई हैं, तब तक वैश्विक व्यापारिक जहाजों के लिए वहां से गुजरना मौत के कुएं में उतरने जैसा होगा।
इस महासंकट के बीच ब्रिटेन (लंदन) और फ्रांस (पेरिस) ने मिलकर होर्मुज जलमार्ग की सुरक्षा के लिए एक 'संयुक्त नौसैनिक मिशन' का प्रस्ताव दिया था। लेकिन अपने चिर-परिचित बेबाक अंदाज में ट्रंप ने इस प्रस्ताव को एक तरह से खारिज कर दिया। मैक्रॉन के सामने बोलते हुए ट्रंप ने दो टूक कहा, "मुझे नहीं लगता कि हमें जलडमरूमध्य को खुला रखने के लिए बहुत ज्यादा मदद की जरूरत होगी।" अमेरिका के इस रुख ने यूरोपीय देशों को हैरान कर दिया है। क्या अमेरिका इस पूरे रूट पर अकेले अपना नियंत्रण रखना चाहता है, या उसके पास ईरान के साथ कोई ऐसा गुप्त सुरक्षा समझौता है जिसकी भनक अभी किसी को नहीं है?
इस पूरी शांति प्रक्रिया के पीछे की जो कहानी ट्रंप ने बयां की, वह किसी हॉलीवुड थ्रिलर फिल्म जैसी है। ट्रंप ने याद दिलाया कि कैसे 28 फरवरी को अमेरिका-इजरायल युद्ध के पहले ही दिन ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की हत्या कर दी गई थी। उसके बाद तेहरान के नेतृत्व में आए बदलावों पर सस्पेंस खोलते हुए ट्रंप ने कहा, "नेताओं का पहला समूह चला गया, दूसरा समूह चला गया और हमें तीसरा समूह बहुत समझदार लगा... हमने आखिरकार एक समझौता कर लिया।" हालांकि, ट्रंप ने रहस्यमयी तरीके से यह साफ नहीं किया कि वे ईरान के किन नेताओं या किस 'तीसरे ग्रुप' की बात कर रहे थे।
इस ऐतिहासिक शांति समझौते की सबसे बड़ी कामयाबी बताते हुए डोनाल्ड ट्रंप ने गर्व से कहा, "सबसे बड़ी बात यह है कि ईरान के पास अब कभी परमाणु हथियार नहीं होंगे।" उन्होंने उम्मीद जताई कि अभी मध्य पूर्व में बहुत सी अच्छी चीजें होने वाली हैं। इस समझौते को अंतिम रूप देने के लिए अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस आगामी शुक्रवार को आधिकारिक हस्ताक्षर समारोह में शामिल होने जा रहे हैं। हालांकि, यह महा-हस्ताक्षर समारोह किस देश या किस शहर में होगा, इसे अभी भी पूरी तरह 'टॉप सीक्रेट' रखा गया है। दुनिया अब शुक्रवार का इंतजार कर रही है, जब इस समझौते के पन्ने पूरी दुनिया के सामने खुलेंगे।
Asianet News Hindi पर पढ़ें देशभर की सबसे ताज़ा National News in Hindi, जो हम खास तौर पर आपके लिए चुनकर लाते हैं। दुनिया की हलचल, अंतरराष्ट्रीय घटनाएं और बड़े अपडेट — सब कुछ साफ, संक्षिप्त और भरोसेमंद रूप में पाएं हमारी World News in Hindi कवरेज में। अपने राज्य से जुड़ी खबरें, प्रशासनिक फैसले और स्थानीय बदलाव जानने के लिए देखें State News in Hindi, बिल्कुल आपके आसपास की भाषा में। उत्तर प्रदेश से राजनीति से लेकर जिलों के जमीनी मुद्दों तक — हर ज़रूरी जानकारी मिलती है यहां, हमारे UP News सेक्शन में। और Bihar News में पाएं बिहार की असली आवाज — गांव-कस्बों से लेकर पटना तक की ताज़ा रिपोर्ट, कहानी और अपडेट के साथ, सिर्फ Asianet News Hindi पर।