Truth Social पोस्ट से मचा बवाल: ट्रंप के दावे पर ईरान का सख्त पलटवार, हकीकत पर सवाल

Published : Apr 23, 2026, 09:49 AM IST

Donald Trump Iran Claim: डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि ईरान ने उनकी अपील पर महिला प्रदर्शनकारियों की फांसी रोकी और रिहाई मानी, लेकिन तेहरान ने इसे ‘मनगढ़ंत’ बताया। मानवाधिकार समूहों के अनुसार मामला जटिल है और कुछ महिलाएं पहले ही जमानत पर थीं।

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Iran Execution Row: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनॉल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने एक चौंकाने वाला दावा करते हुए कहा कि ईरान ने उनकी “गुज़ारिश” का सम्मान किया और हिरासत में ली गई आठ महिला प्रदर्शनकारियों की फांसी रोक दी गई। ट्रंप के अनुसार, इनमें से चार महिलाओं को तुरंत रिहा किया जाएगा, जबकि बाकी चार को एक महीने की जेल की सजा दी जाएगी। यह बयान उन्होंने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर साझा किया, जिसे उन्होंने “बहुत अच्छी खबर” बताया।

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हकीकत कितनी अलग? मानवाधिकार समूहों ने उठाए सवाल

हालांकि, इस दावे पर तुरंत सवाल उठने लगे। ईरान पर नजर रखने वाले मानवाधिकार संगठनों ने बताया कि मामला उतना सीधा नहीं है जितना ट्रंप ने पेश किया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, जिन महिलाओं का जिक्र किया जा रहा है, उनमें से कुछ पहले ही मार्च में जमानत पर रिहा हो चुकी थीं। वहीं, बाकी के खिलाफ आरोप जरूर गंभीर थे, लेकिन फांसी की सजा तय थी या नहीं-इस पर स्पष्टता नहीं है।

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तेहरान की सख्त प्रतिक्रिया-‘मनगढ़ंत कहानी’

ईरान की न्यायपालिका ने ट्रंप के दावे को सिरे से खारिज कर दिया। तेहरान ने इसे “मनगढ़ंत” करार देते हुए कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति अपनी छवि सुधारने के लिए झूठी उपलब्धियां गढ़ रहे हैं। ईरानी मीडिया के मुताबिक, ऐसा कोई फैसला नहीं हुआ है जैसा ट्रंप ने दावा किया, और न ही किसी तत्काल फांसी का आदेश जारी था।

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सोशल मीडिया से शुरू हुई कहानी

इस पूरे घटनाक्रम की शुरुआत तब हुई जब ट्रंप ने सोशल मीडिया पर हिरासत में ली गई महिलाओं की तस्वीर साझा की, जिसमें कुछ किशोर लड़कियां भी शामिल थीं। इसके बाद उन्होंने उनके खिलाफ चल रहे मामलों को उजागर किया और कथित तौर पर हस्तक्षेप की बात कही। लेकिन सवाल यह है-क्या यह वास्तविक कूटनीतिक दबाव था या सिर्फ एक राजनीतिक संदेश?

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कूटनीति, प्रचार या दबाव की रणनीति?

विश्लेषकों का मानना है कि यह मामला केवल मानवाधिकार का नहीं, बल्कि वैश्विक राजनीति का भी हिस्सा हो सकता है। एक ओर ट्रंप खुद को एक प्रभावशाली वैश्विक नेता के रूप में प्रस्तुत करना चाहते हैं, वहीं ईरान इस दावे को खारिज कर अपनी संप्रभुता और छवि को बचाने की कोशिश कर रहा है।

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सच्चाई अब भी धुंध में

इस पूरे घटनाक्रम में सच्चाई क्या है, यह अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। क्या वाकई ट्रंप के हस्तक्षेप से महिलाओं की जान बची, या यह एक राजनीतिक नैरेटिव है? फिलहाल, यह मामला अंतरराष्ट्रीय कूटनीति, मीडिया नैरेटिव और मानवाधिकार के बीच उलझा हुआ दिखाई देता है-जहां हर पक्ष अपनी कहानी को सच साबित करने में जुटा है।

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