
वाशिंगटनः अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर 500 प्रतिशत टैरिफ लगाने वाले एक नए प्रतिबंध बिल को हरी झंडी दे दी है। ट्रंप प्रशासन का यह नया आयात टैरिफ बिल मुख्य रूप से भारत, चीन और ब्राजील को निशाना बनाता है। यह बिल अमेरिकी कांग्रेस में इस मकसद से पेश किया गया है ताकि रूस को युद्ध की तैयारियों के लिए मिल रही आर्थिक मदद को रोका जा सके। जल्द ही अमेरिकी कांग्रेस में इस बिल पर वोटिंग होगी। अगर यह नया बिल अमेरिकी कांग्रेस से पास हो जाता है, तो यह भारत, चीन और ब्राजील के लिए एक बड़ी चुनौती होगी। यह भी साफ हो रहा है कि यह भारी टैक्स तेल के अलावा रूसी यूरेनियम खरीदने वालों पर भी लागू होगा।
यह नया बिल उन देशों के खिलाफ कड़े आर्थिक कदम उठाने का अधिकार देता है जो रूसी तेल का आयात करते हैं। बिल में उन देशों से होने वाले आयात पर 500 प्रतिशत तक टैक्स लगाने का प्रस्ताव है जो रूस से कच्चा तेल खरीदना जारी रखते हैं। ट्रंप प्रशासन का कहना है कि यह यूक्रेन पर हमले के बाद रूस पर लगाए गए अमेरिकी प्रतिबंधों को और कड़ा करने का एक हिस्सा है। चीन, भारत और ब्राजील रूसी तेल के सबसे बड़े खरीदार हैं। इस मामले में चीन पहले और भारत दूसरे स्थान पर है। पुतिन की युद्ध मशीन को आर्थिक मदद मिलने से रोकने की घोषणा के साथ आने वाला यह नया प्रतिबंध बिल चीन और भारत के लिए एक बड़ा झटका होगा। ट्रंप के टैरिफ युद्ध ने पहले ही भारत के साथ अमेरिका के संबंधों पर काफी असर डाला है। पिछले साल भी ट्रंप प्रशासन ने भारतीय उत्पादों पर टैक्स बढ़ा दिया था। रूसी तेल खरीदने के जुर्माने के तौर पर 25 प्रतिशत अतिरिक्त टैक्स लगने से कुछ भारतीय उत्पादों पर कुल टैक्स लगभग 50 प्रतिशत तक बढ़ गया था।
रूस के सबसे बड़े व्यापारिक भागीदार चीन को भी अमेरिका से बड़े पैमाने पर टैक्स युद्ध का सामना करना पड़ रहा है। जब अमेरिका ने चीनी उत्पादों पर 145 प्रतिशत टैक्स लगाया, तो जवाब में चीन ने भी अमेरिकी उत्पादों पर 125 प्रतिशत टैक्स लगाकर पलटवार किया है। माना जा रहा है कि इस नए बिल के लागू होने से वैश्विक बाजार में बड़े आर्थिक परिणाम देखने को मिलेंगे।
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