68 हजार करोड़ का निवेश, उत्तर प्रदेश के रियल एस्टेट में रिकॉर्ड तोड़ ग्रोथ

Published : Jan 07, 2026, 11:15 PM IST
uttar pradesh real estate growth investment record 2025

सार

योगी सरकार की नीतियों से उत्तर प्रदेश के रियल एस्टेट सेक्टर में बड़ा उछाल आया है। 2025 में निवेश 44 हजार करोड़ से बढ़कर 68 हजार करोड़ रुपये पहुंचा। टाउनशिप नीति, धार्मिक पर्यटन और छोटे शहरों के विकास से निवेशकों का भरोसा मजबूत हुआ है।

उत्तर प्रदेश में रियल एस्टेट की तस्वीर तेजी से बदल रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में लागू की गई प्रभावी नीतियों का असर अब आंकड़ों में साफ दिखाई देने लगा है। प्रदेश में बीते एक वर्ष के भीतर रियल एस्टेट सेक्टर में 53 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई है, जिसने निवेशकों के भरोसे को नई मजबूती दी है।

एक साल में निवेश ने तोड़ा रिकॉर्ड

उत्तर प्रदेश रियल एस्टेट विनियामक प्राधिकरण (यूपी रेरा) की रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2025 में प्रदेश में 68 हजार 328 करोड़ रुपये का पूंजी निवेश हुआ। वर्ष 2024 में यह आंकड़ा 44 हजार 526 करोड़ रुपये था। यानी एक ही साल में निवेश में 53.5 प्रतिशत की प्रभावशाली बढ़ोतरी दर्ज की गई। इसी अवधि में प्रदेश में 309 नई रियल एस्टेट परियोजनाएं पंजीकृत हुईं, जो राज्य सरकार की नीतियों पर बढ़ते निवेशक विश्वास को दर्शाता है।

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टाउनशिप नीति में बदलाव बना गेमचेंजर

रियल एस्टेट में इस उछाल के पीछे सरकार द्वारा टाउनशिप नीति में किया गया बड़ा बदलाव अहम माना जा रहा है। बीते वर्ष सरकार ने टाउनशिप विकसित करने के लिए न्यूनतम 25 एकड़ की बाध्यता समाप्त कर दी और बिल्डरों को 12.5 एकड़ में भी टाउनशिप विकसित करने की अनुमति दी। नई नीति में परियोजनाओं की समयसीमा भी स्पष्ट की गई। 25 एकड़ की टाउनशिप को तीन साल में और इससे बड़ी टाउनशिप को अधिकतम पांच साल में पूरा करने का प्रावधान किया गया। पहले की नीतियों में कई परियोजनाएं 8 से 12 साल तक लंबित रहती थीं, जिससे आवंटियों का पैसा फंसा रहता था। नीति में बदलाव से निवेशकों के साथ-साथ घर खरीदारों को भी राहत मिली है।

एनसीआर से आगे बढ़ा निवेश का दायरा

पहले उत्तर प्रदेश के रियल एस्टेट में एनसीआर की प्रमुख भूमिका मानी जाती थी, लेकिन अब तस्वीर बदल रही है। वर्ष 2025 में पंजीकृत 308 परियोजनाओं में से 122 एनसीआर क्षेत्र में जबकि 186 परियोजनाएं गैर-एनसीआर जिलों में स्वीकृत हुईं। यह रुझान बताता है कि सरकार द्वारा किए गए बुनियादी ढांचे के विकास, बेहतर सड़क और एक्सप्रेसवे कनेक्टिविटी तथा टियर-2 शहरों के विस्तार का असर अब रियल एस्टेट सेक्टर पर भी दिखने लगा है।

राजधानी लखनऊ बना रियल एस्टेट का केंद्र

प्रदेश की राजधानी लखनऊ वर्ष 2025 में रियल एस्टेट का बड़ा केंद्र बनकर उभरी है। यहां 67 परियोजनाएं पंजीकृत हुईं। अन्य शहरों में बरेली में 15 और आगरा में 14 परियोजनाएं दर्ज की गईं। इसके अलावा बुलंदशहर, रामपुर, चंदौली, उन्नाव, गोंडा, मऊ और मिर्जापुर जैसे जिलों में भी नए प्रोजेक्ट्स को लेकर निवेश बढ़ा है, जो छोटे शहरों की बढ़ती मांग को दर्शाता है।

धार्मिक पर्यटन से रियल एस्टेट को मिली रफ्तार

प्रदेश में धार्मिक पर्यटन के विस्तार ने भी रियल एस्टेट निवेश को नई दिशा दी है। वर्ष 2025 में मथुरा में 23 परियोजनाएं, अयोध्या में 5, वाराणसी में 9 और प्रयागराज में 7 परियोजनाएं पंजीकृत हुईं। बेहतर कनेक्टिविटी, शहरी पुनर्विकास योजनाएं और श्रद्धालुओं व पर्यटकों की बढ़ती संख्या इन शहरों को रियल एस्टेट विकास के नए केंद्र के रूप में स्थापित कर रही है।

बदली उत्तर प्रदेश के रियल एस्टेट की तस्वीर

कुल मिलाकर, नीतिगत सुधार, समयबद्ध परियोजनाएं, धार्मिक पर्यटन और छोटे शहरों के विकास ने उत्तर प्रदेश के रियल एस्टेट सेक्टर को नई ऊंचाइयों पर पहुंचा दिया है। निवेश के बढ़ते आंकड़े इस बात का संकेत हैं कि प्रदेश अब रियल एस्टेट के क्षेत्र में भी देश के अग्रणी राज्यों की कतार में मजबूती से खड़ा हो रहा है।

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