
FDA Commissioner Power: महाराष्ट्र से लेकर देशभर में इस समय IAS तुकाराम मुंढे की चर्चा हो रही है। उनका नाम सामने आते ही लोगों के दिमाग में एक सख्त और बिना दबाव काम करने वाले अफसर की तस्वीर आती है। करीब दो दशक के करियर में कई तबादलों के बावजूद उनकी पहचान एक ऐसे अधिकारी की बनी, जो नियमों को लेकर समझौता करने के लिए तैयार नहीं रहते हैं। अब महाराष्ट्र के फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) की कमान संभालने के बाद उनका एक्शन फिर चर्चा में है। उनकी टीम ने मुंबई के मशहूर होटलों और बेकरियों के अलावा हाईकोर्ट की कैंटीन तक पर छापा मारा है। ऐसे में आइए जानते हैं तुकाराम मुंढे के पास कितनी पावर है? क्या वह अपनी मर्जी से किसी होटल को बंद करा सकते हैं? क्या किसी दुकान या रेस्टोरेंट का लाइसेंस रद्द कर सकते हैं?
महाराष्ट्र कैडर के 2005 बैच के IAS अधिकारी तुकाराम मुंढे को महाराष्ट्र के FDA (Food and Drug Administration) में कमिश्नर की जिम्मेदारी दी गई है। इसी विभाग के जरिए राज्य में खाने-पीने की चीजों की क्वालिटी, फूड सेफ्टी और नियमों का पालन देखने का काम होता है। पद संभालने के बाद FDA की तरफ से राज्यभर में बड़े स्तर पर जांच अभियान चलाया गया। जानकारी के मुताबिक, मई 2026 में जिम्मेदारी संभालने के बाद 1,100 से ज्यादा जगहों पर निरीक्षण किए गए। इस दौरान मिलावटी या नियमों के खिलाफ पाए गए खाद्य सामान पर कार्रवाई, लाइसेंस सस्पेंड करने और दूसरे कानूनी कदम उठाने की जानकारी सामने आई है। यही वजह है कि तुकाराम मुंढे एक बार फिर सोशल मीडिया और लोगों के बीच चर्चा में हैं।
तुकाराम मुंढे की पहचान सिर्फ उनकी मौजूदा पोस्ट की वजह से नहीं बनी है। उनके लंबे प्रशासनिक करियर और सख्त काम करने के अंदाज ने उन्हें पहले से ही काफी चर्चित बना रखा है। 2005 बैच के इस IAS अधिकारी के करीब दो दशक के करियर में लगभग 25 ट्रांसफर होने की बात लगातार चर्चा में रही है। उनके समर्थक इसे नियमों को लेकर उनकी सख्ती और दबाव में नहीं आने वाली कार्यशैली से जोड़ते हैं। इसी वजह से उन्हें समर्थकों के बीच 'सिंघम' जैसे नाम से भी जाना जाता है।
FDA के हालिया अभियान में मुंबई के कई बड़े होटल, रेस्टोरेंट, क्लब और बेकरी भी जांच के दायरे में आए। रिपोर्ट्स के मुताबिक, कुछ जगहों पर साफ-सफाई की कमी, कीड़ों की मौजूदगी, खाने को सही तरीके से स्टोर न करना और जरूरी रिकॉर्ड या नियमों का पालन नहीं करने जैसी कमियां सामने आईं। इन मामलों में कुछ प्रतिष्ठानों के लाइसेंस सस्पेंड किए गए या उन्हें अस्थायी रूप से बंद किया गया। हालांकि, हर मामले में कार्रवाई की अपनी प्रक्रिया और कानूनी स्थिति होती है। यही वजह है कि तुकाराम मुंढे के अभियान को लेकर चर्चा सिर्फ छोटे दुकानदारों तक सीमित नहीं रही। बड़े और मशहूर प्रतिष्ठान भी जांच के दायरे में आए तो मामला और ज्यादा चर्चा में आ गया।
FDA (Food and Drug Administration) का काम सिर्फ दुकानों पर छापा मारना नहीं है। इसका बड़ा काम यह देखना है कि लोगों तक पहुंचने वाला खाना और उससे जुड़े कारोबार तय फूड सेफ्टी नियमों के मुताबिक चल रहे हैं या नहीं। यानी किसी जगह पर खाना बनाया जा रहा है, पैक किया जा रहा है, स्टोर किया जा रहा है या बेचा जा रहा है, तो वहां नियमों का पालन हो रहा है या नहीं, इसकी जांच की जा सकती है। इसी वजह से FDA की कार्रवाई का दायरा काफी बड़ा है। रेस्टोरेंट, होटल, फूड मैन्युफैक्चरिंग यूनिट, डिस्ट्रीब्यूटर और दूसरी फूड बिजनेस गतिविधियां इसके दायरे में आ सकती हैं।
किसी होटल या दुकान को बंद करना सिर्फ किसी एक अधिकारी की निजी पावर नहीं होती है। FDA के अंदर अलग-अलग अधिकारियों की अलग जिम्मेदारियां तय हैं और कार्रवाई कानून में दी गई प्रक्रिया के मुताबिक होती है। महाराष्ट्र FDA की उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, नामित अधिकारी (Designated Officer) को फूड बिजनेस ऑपरेटर का लाइसेंस जारी करने या कैंसल करने और नियमों के खिलाफ पाए गए खाद्य पदार्थ की बिक्री पर रोक लगाने जैसे अधिकार दिए गए हैं। यानी अगर किसी होटल या फूड बिजनेस के खिलाफ कार्रवाई होती है तो उसके पीछे तय नियम, जांच, रिपोर्ट और संबंधित अधिकारी की भूमिका होती है। इसलिए इसे ऐसे समझना ज्यादा सही होगा कि तुकाराम मुंढे FDA के प्रमुख अधिकारी के तौर पर पूरे सिस्टम की निगरानी और दिशा तय करने में अहम भूमिका रखते हैं, लेकिन हर कार्रवाई उनकी खुद की मर्जी से नहीं होती है।
महाराष्ट्र FDA के अनुसार, नामित अधिकारी को फूड बिजनेस ऑपरेटर का लाइसेंस जारी करने और कैंसल करने की जिम्मेदारी दी गई है। इसके अलावा नियमों के खिलाफ खाद्य पदार्थ की बिक्री रोकने की पावर भी इस पद के दायरे में आती है। इसका मतलब यह हुआ कि अगर किसी फूड बिजनेस में गंभीर नियम उल्लंघन मिलता है तो कार्रवाई का रास्ता सिर्फ चेतावनी तक सीमित नहीं रहता। मामले की प्रकृति और जांच के आधार पर लाइसेंस से जुड़ा एक्शन भी लिया जा सकता है। यही वजह है कि FDA की जांच को लेकर होटल और रेस्टोरेंट मालिक इसे काफी गंभीरता से लेते हैं।
FDA की पूरी कार्रवाई सिर्फ ऊपर बैठे अधिकारियों पर निर्भर नहीं रहती है। फूड सेफ्टी ऑफिसर (Food Safety Officer) भी जमीन पर जाकर जांच करने और सबूत जुटाने का अहम काम करते हैं। महाराष्ट्र FDA की जानकारी के अनुसार, फूड सेफ्टी ऑफिसर बिक्री या इंसानी इस्तेमाल के लिए रखे गए खाने के सैंपल ले सकता है। अगर कोई खाद्य पदार्थ नियमों के खिलाफ दिखाई देता है तो उसे जब्त भी किया जा सकता है। अधिकारी उस जगह में प्रवेश कर जांच कर सकते हैं जहां खाना बनाया, रखा या बेचा जा रहा हो। यानी किसी होटल या दुकान की जांच में सिर्फ बाहर से सफाई देखकर फैसला नहीं होता। जरूरत पड़ने पर खाद्य पदार्थों के सैंपल लिए जा सकते हैं और उन्हें जांच के लिए भेजा जा सकता है।
हां, फूड सेफ्टी ऑफिसर को कानून के तहत उन जगहों में एंट्री और जांच करने की पावर दी गई है जहां खाना बनाया, स्टोर या बेचा जाता है या जहां मिलावट से जुड़ी चीजें रखी हो सकती हैं। जांच के दौरान सैंपल लिए जा सकते हैं। जरूरत पड़ने पर नियमों के मुताबिक खाद्य पदार्थ या जांच से जुड़े दूसरे सामान को जब्त भी किया जा सकता है। यही वह पावर है जिसकी वजह से FDA की टीम किसी रेस्टोरेंट, होटल, दुकान या फूड यूनिट तक पहुंच सकती है।
अगर जांच में कोई खाद्य पदार्थ नियमों के मुताबिक नहीं मिलता तो उसके बाद मामला सिर्फ सामान फेंकने तक सीमित नहीं रहता है। सैंपल को जांच के लिए फूड एनालिस्ट (Food Analyst) के पास भेजा जा सकता है। अगर जांच में खाद्य पदार्थ नियमों के खिलाफ पाया जाता है तो रिपोर्ट के आधार पर आगे कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू हो सकती है। गंभीर मामलों में कानूनी कार्रवाई और प्रॉसिक्यूशन की प्रक्रिया भी आगे बढ़ सकती है। यानी FDA की असली ताकत सिर्फ रेड में नहीं, बल्कि जांच से लेकर कानूनी कार्रवाई तक चलने वाली पूरी प्रक्रिया में है।
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