PAK से यारी-IND से गद्दारी..तुर्की को लगा 40 करोड़ डॉलर का फटका! क्या हमारे बिना कंगाल होगा अंकारा?

Published : Jun 04, 2026, 04:14 PM IST
Turkey Pakistan

सार

Turkey Pakistan Friendship Impact: तुर्की के विदेश मंत्री ने भारत से पैच-अप को लेकर क्या बड़ा बयान दिया है? पाकिस्तान से यारी और भारत की नाराजगी तुर्की की सरकार को कितनी भारी पड़ी है? भारत के दूरी बनाने से एर्दोगन सरकार को कितना बड़ा फटका लगा है?

Turkey India Relations: कहते हैं कि बिजनेस और दोस्ती में जब आप गलत पार्टनर चुन लेते हैं, तो घाटा होना पक्का होता है। ऐसा ही कुछ इस समय हमारे पड़ोसी देश पाकिस्तान के सबसे जिगरी यार यानी तुर्की (Turkey) के साथ हो रहा है। कभी कश्मीर के मुद्दे पर पाकिस्तान की हां में हां मिलाने वाला और भारत के खिलाफ कूटनीतिक चालें चलने वाला तुर्की आज अचानक घुटनों पर आ गया है। तुर्की के विदेश मंत्री हकान फिदान का एक ताजा बयान आया है, जिसमें वे साफ-साफ कह रहे हैं, 'हम भारत से अच्छे रिश्ते चाहते हैं, हमारे बीच में पाकिस्तान को नहीं आना चाहिए।' आखिर एक ही साल में ऐसा क्या बदल गया कि तुर्की के तेवर ठंडे पड़ गए? इसकी सबसे बड़ी और असली वजह है, भारतीय टूरिस्टों की ताकत और 40 करोड़ डॉलर का भारी-भरकम फटका! आइए जानते हैं कि भारत की नाराजगी ने तुर्की की टूरिज्म इंडस्ट्री (Tourism Industry) को कैसे हिलाकर रख दिया?

भारत की मदद के बदले तुर्की की मक्कारी

बात ज्यादा पुरानी नहीं है। साल 2023 में जब तुर्की में भयंकर भूकंप आया था, तब संकट की उस घड़ी में भारत ने इंसानियत का फर्ज निभाते हुए सबसे पहले मदद का हाथ बढ़ाया था। 'ऑपरेशन दोस्त' के तहत भारत ने वहां फील्ड अस्पताल खोले, दवाइयां और राहत सामग्री भेजी। तब तुर्की की जनता की आंखें नम थीं और वे भारतीयों को दुआएं दे रहे थे। लेकिन वहां की एर्दोगन सरकार ने इस अहसान को बहुत जल्दी भुला दिया। जब भारत ने अपनी सुरक्षा के लिए कड़े कदम उठाए, तो तुर्की ने भारत का साथ देने के बजाय पाकिस्तान को ड्रोन और हथियारों की सप्लाई शुरू कर दी। इंटरनेशनल मंचों पर भी उसने हमेशा पाकिस्तान का ही राग अलापा। भारत को समझ आ गया था कि इस 'एहसान फरामोशी' का जवाब बंदूक से नहीं, बल्कि एक साइलेंट कूटनीति से देना होगा।

भारतीयों ने मोड़ा मुंह, तो सूने पड़ गए तुर्की के आलीशान रिसॉर्ट्स

मजहब और पाकिस्तान के चश्मे में डूबी तुर्की सरकार को इस बात का अंदाजा ही नहीं था कि उनकी अर्थव्यवस्था (Economy) की चाबी काफी हद तक भारतीय जेबों में है। भारत का मिडिल क्लास और रईस तबका हर साल छुट्टियां मनाने और शादियों के लिए भारी तादाद में तुर्की जाता था। जैसे ही तुर्की की मक्कारी बेनकाब हुई, भारतीय पर्यटकों ने खुद ही तुर्की से दूरी बनानी शुरू कर दी। जो भारतीय रईस अपनी शादियों में करोड़ों रुपये पानी की तरह बहाकर तुर्की के होटलों को अमीर बनाते थे, उन्होंने अपनी बुकिंग्स कैंसिल कर दीं।

भारतीयों के न जाने से तुर्की को कितना नुकसान?

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, साल 2024 में जहां 3.3 लाख से ज्यादा भारतीय तुर्की घूमने गए थे, वहीं अगले ही साल यानी 2025 में यह संख्या घटकर सिर्फ 2.5 लाख के आसपास रह गई। यानी सीधे-सीधे 24.24% की बड़ी गिरावट दर्ज की गई। भारतीय टूरिस्टों और शादियों के इस तगड़े बॉयकाट की वजह से तुर्की और उसके साथी देशों को करीब 40 करोड़ अमेरिकी डॉलर का सीधा नुकसान उठाना पड़ा। 2025 की शुरुआत यानी मार्च महीने तक तुर्की जाने वाले भारतीयों की संख्या में बढ़ोतरी हो रही थी। लेकिन जैसे ही तुर्की ने भारत के खिलाफ पाकिस्तान का खुलकर साथ दिया, भारतीयों ने अपनी टिकटें कैंसिल करना शुरू कर दिया और यह ग्राफ धड़ाम से नीचे गिर गया।

फ्लाइट्स की सीटें कम हुईं, तो और बढ़ेगी आफत

तुर्की के लिए आफत यहीं खत्म नहीं हो रही है। भारत की दिग्गज एयरलाइन कंपनी इंडीगो (IndiGo) ने तुर्की एयरलाइंस से जो बड़े बोइंग (B777) विमान लीज पर ले रखे थे, वे भी वापस लौटने वाले हैं। उनकी जगह छोटे विमान (XLR) उड़ान भरेंगे। इसका सीधा मतलब यह है कि भारत से तुर्की जाने वाली फ्लाइट्स में सीटों की संख्या बहुत कम हो जाएगी। जब सीटें कम होंगी, तो टूरिस्टों का जाना और मुश्किल हो जाएगा, जिससे तुर्की के बचे-कुचे पर्यटन बाजार को और भी तगड़ा झटका लगने वाला है।

क्या सच में कंगाल हो जाएगी एर्दोगन सरकार?

अब सवाल आता है कि क्या भारत के बिना तुर्की पूरी तरह बर्बाद हो जाएगा? अगर आंकड़ों को देखें, तो तुर्की में रूस, जर्मनी और ब्रिटेन से बहुत बड़ी संख्या में इंटरनेशनल टूरिस्ट आते हैं। कुल विदेशी सैलानियों में भारतीयों की हिस्सेदारी 1% के आसपास है। भारतीय टूरिस्टों का स्पेंडिंग पावर (पैसा खर्च करने की क्षमता) बहुत ज्यादा होता है। भारतीय वहां सिर्फ घूमने नहीं जाते, बल्कि आलीशान होटलों में महंगी शादियां करते हैं, शॉपिंग करते हैं और जमकर फॉरेन करेंसी लुटाते हैं। जब यह प्रीमियम बिजनेस ठप होता है, तो होटल्स, ग्राउंड हैंडलिंग एजेंसियों और लोकल मार्केट की कमर टूट जाती है। 40 करोड़ डॉलर का यह फटका तुर्की जैसी पहले से ही कमजोर इकोनॉमी के लिए एक बड़ा नासूर बन चुका है। यही वजह है कि अब उनके विदेश मंत्री भारत से पैच-अप करने के लिए बयानबाजी कर रहे हैं।

 

PREV

Asianet News Hindi पर पढ़ें देशभर की सबसे ताज़ा National News in Hindi, जो हम खास तौर पर आपके लिए चुनकर लाते हैं। दुनिया की हलचल, अंतरराष्ट्रीय घटनाएं और बड़े अपडेट — सब कुछ साफ, संक्षिप्त और भरोसेमंद रूप में पाएं हमारी World News in Hindi कवरेज में। अपने राज्य से जुड़ी खबरें, प्रशासनिक फैसले और स्थानीय बदलाव जानने के लिए देखें State News in Hindi, बिल्कुल आपके आसपास की भाषा में। उत्तर प्रदेश से राजनीति से लेकर जिलों के जमीनी मुद्दों तक — हर ज़रूरी जानकारी मिलती है यहां, हमारे UP News सेक्शन में। और Bihar News में पाएं बिहार की असली आवाज — गांव-कस्बों से लेकर पटना तक की ताज़ा रिपोर्ट, कहानी और अपडेट के साथ, सिर्फ Asianet News Hindi पर।

Read more Articles on

Recommended Stories

दिल्ली में बदल जाएंगे रेलवे स्टेशनों के नाम! नई दिल्ली स्टेशन को लेकर आया बड़ा अपडेट
केरल में मॉनसून की दस्तक, क्या अगले 3 दिनों में महाराष्ट्र-गोवा समेत इन 7 राज्यों में होगी 'झमाझम'