Twisha Sharma Case:-4°C में 7 दिन रखा गया शव, अदालत ने पूछा, आखिर सच कौन छिपा रहा है?

Published : May 21, 2026, 08:41 AM IST
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सार

ट्विशा शर्मा मौत केस में हर दिन नए रहस्य सामने आ रहे हैं। AIIMS भोपाल में शव 7 दिनों तक सिर्फ -4°C पर रखा गया, जबकि अदालत ने माना कि सुरक्षित संरक्षण के लिए -80°C जरूरी था। पोस्टमॉर्टम में गर्दन पर दोहरे निशान, देर से FIR, दूसरे पोस्टमॉर्टम की मांग और SIT जांच ने दहेज मौत मामले को और सनसनीखेज बना दिया है।

Twisha Sharma Case: पूर्व मॉडल और एक्ट्रेस ट्विशा शर्मा की मौत का मामला हर गुजरते दिन के साथ एक खौफनाक और पेचीदा रहस्य बनता जा रहा है। 12 मई को भोपाल के कटारा हिल्स में अपने ससुराल में संदिग्ध परिस्थितियों में मृत पाई गईं ट्विशा की मौत के आठ दिन बाद भी इंसाफ की जंग मोर्चरी के बंद दरवाजों के पीछे अटकी हुई है। अब इस हाई-प्रोफाइल मामले में भोपाल की अदालत ने एक ऐसा चौंकाने वाला आदेश दिया है, जिसने मध्य प्रदेश के चिकित्सा ढांचे से लेकर पुलिस की तफ्तीश तक, सबको कठघरे में खड़ा कर दिया है।

मोर्चरी में सबूत मिटने का डर: -80°C का वो अदालती अल्टीमेटम

अदालत में सुनवाई के दौरान एक बेहद गंभीर और विचलित करने वाली सच्चाई सामने आई। 33 वर्षीय ट्विशा का पार्थिव शरीर पिछले एक हफ्ते से AIIMS भोपाल की मोर्चरी में महज $-4^\circ\text{C}$ तापमान पर रखा हुआ है। चिकित्सा विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि शव को लंबे समय तक सड़ने से बचाने और फॉरेंसिक सबूतों को महफूज रखने के लिए 'अल्ट्रा-लो टेम्परेचर' यानी लगभग $-80^\circ\text{C}$ की सख्त जरूरत होती है।

 

 

अदालत में बड़ा खुलासा, परिवार ने उठाए गंभीर सवाल

हैरानी की बात यह है कि पूरे भोपाल शहर में ऐसी कोई आधुनिक सुविधा उपलब्ध ही नहीं है। पुलिस ने ट्विशा के पिता नवनिधि शर्मा को पत्र लिखकर शव को सुपुर्द लेने का आग्रह किया और चेतावनी दी कि इसके सड़ने की "पूरी संभावना" है। इस पर अदालत ने कड़ा रुख अपनाते हुए कटारा हिल्स पुलिस के SHO को निर्देश दिया है कि वे तत्काल मध्य प्रदेश और देश के अन्य बड़े शहरों में ऐसे चिकित्सा संस्थानों की पहचान करें जहां $-80^\circ\text{C}$ का फ्रीजर मौजूद हो, ताकि सच को सड़ने से बचाया जा सके।

पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट का वो पन्ना: गर्दन पर 'दो समानांतर निशान' का खौफनाक राज

ट्विशा के परिवार की रातें जिस बात ने हराम कर रखी हैं, वह है पहली पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में दर्ज एक खौफनाक विवरण। डॉक्टरों के मुताबिक, ट्विशा की गर्दन पर दो समानांतर (Parallel) निशान पाए गए हैं, जो लगभग 2 सेंटीमीटर चौड़े हैं। ये निशान थायरॉइड वाले हिस्से के ऊपर की ओर जाते हुए लाल रंग के खरोंच जैसे दिख रहे हैं, और गर्दन के अंदरूनी टिशूज़ में खून जमने और रिसने के साफ लक्षण हैं।

 

 

हालांकि, डॉक्टरों ने इसका निष्कर्ष "फांसी लगाने से पहले दम घुटना" (Asphyxia as a result of ante-mortem hanging) बताया है, जिसका मतलब है कि फांसी के वक्त ट्विशा जिंदा थी। लेकिन गर्दन पर एक के बजाय दो गहरे समानांतर निशान होने की बात ने हत्या की आशंका को हवा दे दी है। नोएडा का रहने वाला पीड़ित परिवार आरोप लगा रहा है कि जांचकर्ता जानबूझकर फांसी के असली सबूतों को छिपा रहे हैं और पहली जांच में उस चीज को भी रिकॉर्ड पर नहीं लाया गया जिससे फांसी लगाई गई थी।

'SIT' की रडार पर रिटायर्ड जज सास और फरार वकील पति

ट्विशा के परिवार ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी तीखे सवाल दागे हैं कि आखिर मौत के तीन दिन बाद तक FIR क्यों नहीं दर्ज की गई? फिलहाल, स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) इस मामले की जांच दहेज उत्पीड़न, शारीरिक हमले और सबूतों को नष्ट करने की संगीन धाराओं के तहत कर रही है। केस में ट्विशा के पति, वकील समर्थ सिंह और उनकी सास, सेवानिवृत्त न्यायाधीश गिरिबाला सिंह के खिलाफ मामला दर्ज है।

कानूनी लड़ाई और पुलिस का दावा

जहां एक तरफ रिटायर्ड जज गिरिबाला सिंह ने खुद पर लगे तमाम उत्पीड़न के आरोपों को सिरे से खारिज किया है, वहीं भोपाल के पुलिस कमिश्नर संजय कुमार का कहना है कि पुलिस किसी दबाव में नहीं है और मामला आत्महत्या का ही लग रहा है। अदालत द्वारा दिल्ली AIIMS में दोबारा पोस्टमॉर्टम कराने की याचिका खारिज होने के बाद, ट्विशा के पिता अब हाई कोर्ट का रुख करने की तैयारी में हैं। जब तक ऊपरी अदालत का फैसला नहीं आता, तब तक ट्विशा का शव और उसकी मौत का राज, दोनों ही भोपाल के उस ठंडे मुर्दाघर में इंसाफ के पिघलने का इंतजार कर रहे हैं।

आत्महत्या या दबे हुए सच की परत?

भोपाल पुलिस कमिश्नर संजय कुमार का कहना है कि जांच फिलहाल आत्महत्या के एंगल से आगे बढ़ रही है और पुलिस पर किसी तरह का दबाव नहीं है। लेकिन अदालत की टिप्पणियां, मोर्चरी की स्थिति, पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के विवरण और परिवार के आरोप इस मामले को लगातार रहस्यमयी बना रहे हैं। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि SIT की जांच और संभावित हाई कोर्ट हस्तक्षेप इस हाई-प्रोफाइल मामले में कौन सा नया सच सामने लाते हैं।

 

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