
भोपाल की चर्चित ट्विशा शर्मा मौत मामले में बुधवार को बड़ा मोड़ आ गया। अदालत ने ट्विशा के परिवार की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें दूसरी बार पोस्टमॉर्टम कराने की मांग की गई थी। कोर्ट के इस फैसले के बाद अब परिवार के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या वे आगे कानूनी लड़ाई जारी रखेंगे या फिर अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी करेंगे।
33 वर्षीय ट्विशा शर्मा, जो मूल रूप से नोएडा की रहने वाली थीं, 12 मई को भोपाल के कटारा हिल्स स्थित अपने ससुराल में फंदे से लटकी मिली थीं। शादी को अभी महज पांच महीने ही हुए थे। घटना के बाद से ही यह मामला लगातार सुर्खियों में बना हुआ है।
ट्विशा की मौत के बाद से उनका शव 13 मई से AIIMS भोपाल की मोर्चरी में रखा हुआ है। परिवार ने शव लेने से इनकार कर दिया था। उनका आरोप है कि ट्विशा की मौत सामान्य आत्महत्या नहीं बल्कि संदिग्ध परिस्थितियों में हुई है और मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। परिवार लगातार स्वतंत्र जांच और दूसरे पोस्टमॉर्टम की मांग कर रहा था। उनका कहना है कि पहली जांच में कई महत्वपूर्ण पहलुओं को नजरअंदाज किया गया।
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मामला तब और गंभीर हो गया जब शव को सुरक्षित रखने की प्रक्रिया को लेकर अलग-अलग दावे सामने आए। परिवार का आरोप है कि लंबे समय तक शव मोर्चरी में रखने से अहम फॉरेंसिक सबूत नष्ट हो सकते हैं। बताया गया कि पुलिस ने परिवार को जानकारी दी थी कि शव को माइनस 4 डिग्री सेल्सियस तापमान पर संरक्षित रखा गया है। वहीं, AIIMS भोपाल के फॉरेंसिक मेडिसिन और टॉक्सिकोलॉजी विभाग के डॉक्टरों की ओर से कथित तौर पर कहा गया कि लंबे समय तक शरीर को सुरक्षित रखने के लिए माइनस 80 डिग्री सेल्सियस तापमान जरूरी होता है। इसी विरोधाभास के बाद परिवार ने अदालत में दूसरी पोस्टमॉर्टम की मांग रखी थी।
ट्विशा शर्मा की मौत ने पूरे मामले को हाई-प्रोफाइल बना दिया है। परिवार ने ससुराल पक्ष पर उत्पीड़न और मानसिक प्रताड़ना के आरोप लगाए हैं। पुलिस फिलहाल दहेज मृत्यु और क्रूरता से जुड़ी धाराओं के तहत जांच कर रही है। सूत्रों के मुताबिक, जांच एजेंसियां डिजिटल सबूत, कॉल रिकॉर्ड, चैट और फॉरेंसिक रिपोर्ट की भी बारीकी से जांच कर रही हैं। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश में जुटी है कि मौत आत्महत्या थी या इसके पीछे कोई और वजह थी।
कोर्ट द्वारा दूसरी पोस्टमॉर्टम की मांग खारिज किए जाने के बाद अब परिवार के पास सीमित कानूनी विकल्प बचे हैं। हालांकि परिवार के करीबी लोगों का कहना है कि वे उच्च अदालत का रुख करने पर विचार कर सकते हैं। इस बीच, सोशल मीडिया पर भी मामले को लेकर बहस तेज हो गई है। कई लोग निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं, जबकि कुछ लोग लंबी कानूनी प्रक्रिया पर सवाल उठा रहे हैं। ट्विशा शर्मा मौत मामला अब सिर्फ एक पारिवारिक त्रासदी नहीं, बल्कि जांच प्रक्रिया, फॉरेंसिक पारदर्शिता और महिलाओं की सुरक्षा से जुड़ा बड़ा सवाल बन चुका है।
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