उज्जैन शाही मस्जिद विवाद: कहां से आई भीड़, क्यों बढ़ा विवाद-कैसे बिगड़े हालात, जानें पूरी कहानी

Published : Sep 28, 2026, 01:45 PM IST
Ujjain Shahi Masjid Controversy

सार

Ujjain Shahi Mosque Controversy: उज्जैन में सिंहस्थ 2028 के लिए सड़क चौड़ीकरण के बीच शाही मस्जिद के प्रभावित हिस्से को हटाने पर विरोध हुआ। जानें सहमति, पथराव और पूरे विवाद की वजह।

उज्जैन में सिंहस्थ 2028 की तैयारियों के बीच सोमवार 28 सितंबर की सुबह शाही मस्जिद के एक हिस्से को हटाने को लेकर हालात तनावपूर्ण हो गए। कंठाल चौराहे से गोपाल मंदिर तक सड़क को 15 मीटर चौड़ा करने का काम चल रहा है। इसी सड़क की जद में गोपाल मंदिर इलाके में स्थित शाही मस्जिद का कुछ हिस्सा आ रहा है। प्रशासन की ओर से प्रभावित हिस्से को हटाने की तैयारी के बीच बड़ी संख्या में लोग मस्जिद के आसपास जमा हो गए, जिसके बाद बवाल मच गया।

प्रशासन और शहर काजी के बीच बनी थी सहमति

  • इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब शहर काजी खलिकुर्ररेहमान और प्रशासन के बीच प्रभावित हिस्से को हटाने पर सहमति बनने की बात सामने आई थी, तो सोमवार सुबह आखिर बवाल क्यों और कैसे शुरू हो गया?
  • आखिर इतनी बड़ी संख्या में भीड़ कहां से और कैसे आ गई? बता दें कि पहले तय किया गया था कि मशीनों से सीधे निर्माण हटाने के बजाय मस्जिद से जुड़े लोग खुद उस हिस्से को हटाएंगे, जो सड़क चौड़ीकरण की जद में आ रहा है।

सहमति के बाद क्यों शुरू हुआ विवाद?

  • रविवार रात सहमति बनने के बाद प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था के लिए बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात कर दिया था।
  • सोमवार सुबह मस्जिद के प्रभावित हिस्से को हटाने की प्रक्रिया समाज के कुछ लोगों की ओर से शुरू भी कर दी गई। लेकिन इसी दौरान विरोध करने वाला समाज का दूसरा गुट सामने आ गया।
  • धीरे-धीरे मस्जिद और उसके आसपास के इलाके में लोगों की भीड़ बढ़ने लगी।

क्यों बढ़ा विवाद?

  • बताया जा रहा है कि स्थानीय स्तर पर कुछ मैसेज सर्कुलेट होने के बाद लोग शाही मस्जिद के पास जमा हो गए। विरोध करने वालों में महिलाएं भी शामिल थीं।
  • पुलिस के मुताबिक, भीड़ में कुछ लोगों ने बैरिकेडिंग को धकेलकर प्रतिबंधित क्षेत्र में जाने की कोशिश की। इसके बाद पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तनाव बढ़ गया और पथराव शुरू हो गया।
  • स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े और हल्का बल प्रयोग करना पड़ा। इस दौरान कुछ पुलिसकर्मियों के घायल होने की जानकारी भी सामने आई है।

पूरी शाही मस्जिद नहीं, सिर्फ प्रभावित हिस्सा हटाने की कार्रवाई

इस विवाद में एक अहम बात यह है कि सड़क चौड़ीकरण के लिए पूरी शाही मस्जिद को गिराने की कार्रवाई नहीं हो रही है। प्रस्तावित कार्रवाई सिर्फ उस हिस्से तक सीमित है, जो 15 मीटर चौड़ी सड़क के तय अलाइनमेंट में आ रहा है। बताया गया है कि प्रभावित हिस्से में नमाज पढ़ने वाली जगह का एक हिस्सा, करीब 120 फीट ऊंची मीनार और मजहर चौक शाही का हिस्सा शामिल है।

हाईकोर्ट में प्रशासन ने क्या कहा था?

  • हाईकोर्ट के सामने प्रशासन की ओर से कहा गया था कि इस सड़क पर कई धार्मिक ढांचों के प्रभावित हिस्से पहले ही हटाए जा चुके हैं।
  • प्रशासन के मुताबिक, सिंहस्थ 2028 के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की आवाजाही को देखते हुए सड़क चौड़ीकरण जरूरी है।
  • कोर्ट के आदेश में यह भी दर्ज है कि इसी सड़क पर 10 मंदिरों और एक मस्जिद के हिस्से पहले ही हटाए जा चुके हैं।
  • उज्जैन के एसपी प्रदीप शर्मा ने भी कहा कि समाज के सभी समुदाय और वर्ग अपने-अपने क्षेत्रों में लगातार सहयोग और समर्थन दे रहे हैं।

शाही मस्जिद के हिस्से को हटाने का विरोध क्यों?

  • मस्जिद से जुड़े कुछ लोगों की ओर से कहा जा रहा है कि सड़क चौड़ीकरण के लिए आसपास की दुकानों और अन्य हिस्सों को पहले ही दिया जा चुका है।
  • उनका तर्क है कि अब मस्जिद का हिस्सा हटाने के बजाय सड़क का अलाइनमेंट बदलने जैसे विकल्पों पर भी विचार किया जाना चाहिए।
  • वहीं, प्रशासन का कहना है कि तय सड़क चौड़ाई और सिंहस्थ 2028 की तैयारियों को देखते हुए सड़क की जद में आने वाले प्रभावित निर्माण को हटाना जरूरी है।
  • इस बीच शहर काजी खलिकुर्ररेहमान ने लोगों से विवाद में नहीं पड़ने और प्रशासन की तय व्यवस्था के अनुसार काम करने की अपील की।
  • उन्होंने लोगों से अफवाहों पर ध्यान नहीं देने को भी कहा। हालांकि, जमीन पर सहमति बनने के बावजूद विरोध करने वाला दूसरा गुट सामने आने के बाद स्थिति बिगड़ गई।

900 मीटर सड़क में 7 धार्मिक स्थल

कंठाल चौराहे से गोपाल मंदिर के बीच करीब 900 मीटर लंबे रास्ते को चौड़ा करने का काम चल रहा है। इस सड़क के चौड़ीकरण में कुल 7 धार्मिक स्थल सड़क की जद में आने की बात सामने आई है। इनमें से ज्यादातर धार्मिक स्थलों के प्रभावित हिस्से हटाए जा चुके हैं। पास में बनी बोहरा समाज की मस्जिद को भी समाज की सहमति से हटाया गया था। अब इस पूरे मार्ग में सबसे ज्यादा विवाद शाही मस्जिद के प्रभावित हिस्से को लेकर सामने आया है।

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