
Ukraine Electricity Crisis: यूक्रेन में लगातार हो रहे हमलों ने देश के बिजली ढांचे के सामने बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है। बिजली संयंत्रों, सबस्टेशनों और ट्रांसमिशन नेटवर्क को नुकसान पहुंचने के कारण कई इलाकों में बिजली आपूर्ति प्रभावित होती रही है। ऐसे हालात में अब कारोबारी, रिहायशी इमारतें और आम लोग बड़े बिजली ग्रिड पर निर्भर रहने के बजाय अपनी छतों पर सोलर पैनल और बैटरी स्टोरेज सिस्टम लगाने पर जोर दे रहे हैं।
युद्ध के बीच यह बदलाव सिर्फ स्वच्छ ऊर्जा की ओर कदम नहीं है, बल्कि बिजली की उपलब्धता बनाए रखने का एक तरीका भी बनता जा रहा है। छोटे और स्थानीय बिजली सिस्टम ग्रिड से अलग भी काम कर सकते हैं और बैटरी के जरिए बिजली को बाद के लिए सुरक्षित रखा जा सकता है।
मध्य यूक्रेन के बिला त्सेरक्वा शहर में इसका उदाहरण देखने को मिल रहा है। यहां दरवाजे बनाने वाली एक फैक्ट्री ने बिजली कटौती से परेशान होकर सौर ऊर्जा में निवेश किया। रूस के साथ युद्ध शुरू होने के बाद क्षेत्र में बिजली आपूर्ति कई बार प्रभावित हुई, जिससे फैक्ट्री का उत्पादन चलाना मुश्किल हो गया था।
फैक्ट्री मालिक यारोस्लाव के लिए सोलर सिस्टम लगाना जरूरत बन गया था। सर्दियों में बिजली की कमी के दौरान उत्पादन जारी रखना बड़ी चुनौती थी। कई मौकों पर कर्मचारियों को गोदाम गर्म रखने के लिए बेकार लकड़ी जलानी पड़ी, जबकि बैकअप जनरेटर चलाने का खर्च भी लगातार बढ़ रहा था।
फैक्ट्री को उम्मीद है कि सौर ऊर्जा से उत्पादन को ज्यादा स्थिर रखा जा सकेगा और राष्ट्रीय बिजली ग्रिड पर निर्भरता कम होगी। साथ ही बिजली के खर्च को नियंत्रित करने में भी मदद मिल सकती है। यह सिस्टम निजी बिजली और गैस आपूर्तिकर्ता कंपनी यास्नो ने लगाया है। कंपनी के मुताबिक, उसने 2024 में काम दोबारा शुरू करने के बाद पिछले दो वर्षों में 117 जगहों पर सोलर सिस्टम लगाए हैं, जिनकी संयुक्त क्षमता 23 मेगावाट है।
यूक्रेन में कारोबारियों और अन्य संस्थाओं को स्थानीय बिजली उत्पादन बढ़ाने के लिए सरकारी वित्तीय सहायता भी मिल रही है। ‘Affordable Loans 5-7-9%’ योजना के दायरे में ऊर्जा उत्पादन और स्टोरेज से जुड़े उपकरणों के लिए कर्ज की सुविधा दी गई है। जनवरी 2026 में सरकार ने इस कार्यक्रम के तहत ऊर्जा परियोजनाओं के लिए अधिकतम निवेश ऋण सीमा बढ़ाकर 250 मिलियन यूक्रेनी रिव्निया कर दी थी।
2024 से ही इस योजना के तहत कारोबारियों और आवासीय संस्थाओं को सौर ऊर्जा तथा बिजली स्टोरेज उपकरणों में निवेश के लिए कर्ज उपलब्ध कराया जा रहा है।
युद्ध से पहले यूक्रेन की बिजली व्यवस्था बड़े और केंद्रीकृत बिजली संयंत्रों पर काफी निर्भर थी। लेकिन ऊर्जा ढांचे पर लगातार हमलों ने इस मॉडल की कमजोरियां सामने ला दी हैं। अब छोटे-छोटे बिजली उत्पादन केंद्र और बैटरी सिस्टम ज्यादा महत्वपूर्ण होते जा रहे हैं। किसी बड़े पावर प्लांट या ट्रांसमिशन लाइन के प्रभावित होने पर पूरे इलाके की बिजली बाधित हो सकती है, जबकि स्थानीय सोलर सिस्टम जरूरत के समय सीमित स्तर पर बिजली उपलब्ध करा सकते हैं।
यह बदलाव सिर्फ फैक्ट्रियों तक सीमित नहीं है। यूक्रेन के कुछ शहरों में रिहायशी इमारतें भी अपनी छतों पर सोलर पैनल और बैटरी सिस्टम लगा रही हैं। इनका इस्तेमाल ब्लैकआउट के दौरान लिफ्ट, हीटिंग सिस्टम और दूसरी जरूरी सुविधाओं को चालू रखने के लिए किया जा सकता है। सरकारी योजनाओं के तहत निजी घरों के लिए भी सोलर पैनल और बैटरी जैसे उपकरणों पर रियायती कर्ज की व्यवस्था की गई है।
युद्ध के अग्रिम मोर्चे के करीब स्थित इलाकों में स्थानीय बिजली व्यवस्था की जरूरत और ज्यादा महसूस की जा रही है। बिजली की लाइनें क्षतिग्रस्त होने या सुरक्षा कारणों से ग्रिड से संपर्क टूटने की स्थिति में सोलर पैनल और बैटरी सिस्टम स्थानीय स्तर पर जरूरी बिजली उपलब्ध कराने में मदद कर सकते हैं। इसी वजह से स्वयंसेवी संगठन और गैर-सरकारी संस्थाएं भी प्रभावित इलाकों में सोलर पैनल और बैटरी सिस्टम लगाने के प्रोजेक्ट चला रहे हैं।
यूक्रेन में सौर ऊर्जा का बढ़ता इस्तेमाल अब केवल कार्बन उत्सर्जन कम करने या स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने से जुड़ा विषय नहीं रह गया है। युद्ध के बीच यह बिजली की निरंतरता और स्थानीय स्तर पर आत्मनिर्भरता का साधन बन रहा है।
सरकारी वित्तीय योजनाओं का विस्तार भी इसी दिशा में है। सितंबर 2026 में यूक्रेन की नेशनल डेवलपमेंट इंस्टीट्यूशन ने बताया कि युद्ध के कारण कारोबारों को सोलर पैनल, बैटरी स्टोरेज, जनरेटर और अन्य स्थानीय बिजली स्रोतों में निवेश की जरूरत बढ़ रही है।
Asianet News Hindi पर पढ़ें देशभर की सबसे ताज़ा National News in Hindi, जो हम खास तौर पर आपके लिए चुनकर लाते हैं। दुनिया की हलचल, अंतरराष्ट्रीय घटनाएं और बड़े अपडेट — सब कुछ साफ, संक्षिप्त और भरोसेमंद रूप में पाएं हमारी World News in Hindi कवरेज में। अपने राज्य से जुड़ी खबरें, प्रशासनिक फैसले और स्थानीय बदलाव जानने के लिए देखें State News in Hindi, बिल्कुल आपके आसपास की भाषा में। उत्तर प्रदेश से राजनीति से लेकर जिलों के जमीनी मुद्दों तक — हर ज़रूरी जानकारी मिलती है यहां, हमारे UP News सेक्शन में। और Bihar News में पाएं बिहार की असली आवाज — गांव-कस्बों से लेकर पटना तक की ताज़ा रिपोर्ट, कहानी और अपडेट के साथ, सिर्फ Asianet News Hindi पर।