
नई दिल्ली/कीव: काला सागर (Black Sea) का बारूदी समंदर भारतीय नाविकों के लिए लगातार काल बनता जा रहा है। अभी कुछ ही दिन पहले हुए एक जानलेवा हमले का जख्म भरा भी नहीं था कि यूक्रेन के ओडेसा पोर्ट से एक और दहला देने वाली खबर सामने आ गई है। ओडेसा पोर्ट पर खड़े एक कमर्शियल मर्चेंट शिप पर भीषण हमला हुआ है, जिसके बाद जहाज पर सवार चालक दल के दो भारतीय सदस्य रहस्यमयी ढंग से लापता हो गए हैं। इस ताजा हमले ने अंतरराष्ट्रीय शिपिंग रूट्स पर हड़कंप मचा दिया है और युद्धग्रस्त क्षेत्र में भारतीय नागरिकों की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर बड़ा सस्पेंस खड़ा कर दिया है।
यूक्रेन की राजधानी कीव में स्थित भारतीय दूतावास से मिली आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, यह दिल दहला देने वाली घटना 25 जुलाई को घटित हुई। ओडेसा पोर्ट पर लंगर डाले खड़े मर्चेंट शिप MV AGN Ragnar पर अचानक जोरदार हमला हुआ। हमले के वक्त जहाज पर चार भारतीय नागरिक सवार थे। धमाके और तबाही के बीच दो भारतीयों को तो सुरक्षित बचा लिया गया है, लेकिन बाकी दो भारतीय चालक दल के सदस्यों का कोई सुराग नहीं मिल पा रहा है। सुरक्षा कारणों से अभी तक लापता नाविकों की पहचान उजागर नहीं की गई है, और उनके सुरक्षित होने को लेकर सस्पेंस गहराता जा रहा है।
Russia twice hit a civilian ship carrying 2,800 tons of corn as it was leaving a port in Odesa region, bound for Greece.
Two crew members missing.
While Russians are crying over Wildberries crap their drones are hunting grain ships in the Black Sea. pic.twitter.com/5kZ1t8nokB— Maria Avdeeva (@maria_avdv) July 25, 2026
हमले की खबर मिलते ही यूक्रेनी सुरक्षा बलों और रेस्क्यू टीमों ने ओडेसा पोर्ट के आसपास के समुद्री इलाके में एक सघन तलाशी और बचाव (Search and Rescue) अभियान शुरू कर दिया है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक आधिकारिक बयान जारी करते हुए भारतीय मिशन ने कहा कि वे स्थानीय यूक्रेनी अधिकारियों के साथ लगातार संपर्क में हैं और पल-पल बदलते घटनाक्रम पर पैनी नजर रख रहे हैं। भारतीय दूतावास ने युद्ध क्षेत्र में फंसे अन्य भारतीय नागरिकों के लिए 24 घंटे काम करने वाली हेल्पलाइन और आपातकालीन संपर्क नंबर भी एक्टिव कर दिए हैं।
सस्पेंस और डर का माहौल इसलिए भी ज्यादा है क्योंकि यह हमला कोई पहली घटना नहीं है। इससे ठीक एक हफ्ता पहले, 19 जुलाई को एक और मर्चेंट शिप MV Golden Leo जब यूक्रेनी पोर्ट से बाहर निकल रहा था, तब उस पर भी एक घातक हमला हुआ था। उस खूनी हमले में चालक दल के 4 भारतीय सदस्यों की मौके पर ही मौत हो गई थी, जबकि एक भारतीय नाविक गंभीर रूप से घायल हो गया था। भारत सरकार ने कमर्शियल जहाजों को निशाना बनाए जाने और वैश्विक नेविगेशन व व्यापार की स्वतंत्रता में बाधा डालने वाले इन हमलों को "बेहद निंदनीय" करार दिया था।
Point of Contact, Embassy of India, Ukraine
cons.kyiv@mea.gov.in
cons1.kyiv@mea.gov.in
Our Emergency contact no. - +380933559958 Mr. Aji Kumar, SS ( Consular) @MEAIndia pic.twitter.com/2XolkORrcu— India in Ukraine (@IndiainUkraine) July 26, 2026
हैरानी की बात यह है कि इस नए हमले की खबर आने से महज कुछ घंटे पहले ही भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) ने एक बेहद सख्त सुरक्षा एडवाइजरी जारी की थी। सरकार ने साफ कहा है कि अप्रैल 2026 से लेकर अब तक ब्लैक सी में हुए हमलों में 5 भारतीय नाविक अपनी जान गंवा चुके हैं। विदेश मंत्रालय ने भारतीय युवाओं और नाविकों से अपील की है कि वे इस 'डेंजर ज़ोन' में नौकरी स्वीकार करने से पहले सौ बार सोचें।
इस घटना ने इसलिए भी चिंता बढ़ा दी है क्योंकि विदेश मंत्रालय (MEA) ने इसी दिन ब्लैक सी क्षेत्र को लेकर विस्तृत एडवाइजरी जारी की थी। मंत्रालय ने साफ चेतावनी दी थी कि इस क्षेत्र में सुरक्षा हालात बेहद अस्थिर हैं और व्यावसायिक जहाज लगातार मिसाइल तथा ड्रोन हमलों के खतरे का सामना कर रहे हैं। सरकार ने भारतीय नाविकों से कहा था कि वे संघर्ष प्रभावित समुद्री क्षेत्र में नौकरी स्वीकार करने से पहले जहाज का रूट, सुरक्षा व्यवस्था, बीमा, इमरजेंसी रिस्पॉन्स सिस्टम और निकासी की पूरी जानकारी अवश्य लें।
यदि कोई नाविक वहां जाता भी है, तो उसे कुछ बेहद सख्त नियमों का पालन करना होगा:
सरकार ने साफ किया है कि आपातकालीन स्थिति में कांसुलर सहायता के लिए भारतीय दूतावास, रूस (+7 9652773414) और भारतीय दूतावास, यूक्रेन (+38 0933559958) पर तुरंत संपर्क किया जा सकता है। अब पूरी दुनिया की नजरें ओडेसा पोर्ट के रेस्क्यू ऑपरेशन पर टिकी हैं कि क्या लापता दोनों भारतीय सुरक्षित वापस लौट पाते हैं या नहीं।
लगातार बढ़ते मिसाइल और ड्रोन हमलों, भारतीय नाविकों की मौत और अब दो भारतीयों के लापता होने की घटना ने ब्लैक सी में काम करने वाले हजारों समुद्री कर्मचारियों की सुरक्षा पर नई बहस छेड़ दी है। सरकार ने फिलहाल किसी प्रकार का पूर्ण प्रतिबंध नहीं लगाया है, लेकिन स्पष्ट कर दिया है कि संघर्ष प्रभावित क्षेत्र में जाने से पहले हर भारतीय नागरिक को जोखिम का गंभीरता से आकलन करना चाहिए। अब सबकी नजर सर्च एंड रेस्क्यू ऑपरेशन पर टिकी है। सबसे बड़ा सवाल यही है कि लापता दोनों भारतीय सुरक्षित मिलेंगे या नहीं। आने वाले घंटे इस पूरी घटना की दिशा तय करेंगे।
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