
लखनऊ, 11 फरवरी। उत्तर प्रदेश की राजनीति और अर्थव्यवस्था के लिहाज से मंगलवार का दिन अहम रहा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विधानसभा के सभागार में पत्रकारों को संबोधित करते हुए वर्ष 2026-27 का बजट विस्तार से प्रस्तुत किया। 9,12,000 करोड़ रुपये से अधिक के इस बजट को सरकार ने प्रदेश के “अनलिमिटेड पोटेंशियल स्टेट” बनने की दिशा में निर्णायक कदम बताया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले नौ वर्षों में उत्तर प्रदेश ने “पॉलिसी पैरालिसिस” की छवि से बाहर निकलकर खुद को देश की अग्रणी अर्थव्यवस्थाओं में स्थापित किया है। उनका दावा है कि यह बजट उसी बदले हुए परसेप्शन और वित्तीय अनुशासन का प्रतिबिंब है।
मुख्यमंत्री के अनुसार, बीते नौ वर्षों में प्रदेश का बजट तीन गुना से अधिक बढ़ा है। इस बार 43,565 करोड़ रुपये से अधिक की राशि नई योजनाओं के लिए प्रस्तावित की गई है, जबकि 2 लाख करोड़ रुपये से अधिक कैपिटल एक्सपेंडिचर (पूंजीगत व्यय) के लिए आवंटित किए गए हैं।
कैपिटल एक्सपेंडिचर को सरकार रोजगार सृजन और इंफ्रास्ट्रक्चर निर्माण का प्रमुख आधार मानती है। मुख्यमंत्री ने यह भी रेखांकित किया कि पिछले नौ वर्षों में कोई नया टैक्स नहीं लगाया गया है। कर चोरी और राजस्व लीकेज पर नियंत्रण तथा बेहतर वित्तीय प्रबंधन के जरिए प्रदेश को “बीमारू राज्य” की छवि से बाहर लाने का दावा किया गया।
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सरकार के अनुसार:
भारतीय रिजर्व बैंक की गाइडलाइन के मुताबिक राज्यों के लिए जीएसडीपी के 30 प्रतिशत से अधिक कर्ज चिंताजनक माना जाता है। सरकार का कहना है कि यूपी ने एफआरबीएम सीमा के भीतर रहकर वित्तीय अनुशासन कायम रखा है और अब वह देश की टॉप तीन अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है।
मुख्यमंत्री ने दावा किया कि प्रदेश की बेरोजगारी दर 17-19 प्रतिशत (2017 से पहले) से घटकर 2.24 प्रतिशत पर आ गई है। बजट में एमएसएमई, स्टार्टअप, ओडीओपी और स्थानीय उद्यमों को बढ़ावा देने के लिए नई निवेश योजनाओं का प्रावधान किया गया है।
एक बड़ा संस्थागत कदम “स्टेट डेटा अथॉरिटी” के गठन की घोषणा है। सरकार का कहना है कि इससे रियल टाइम डेटा मॉनिटरिंग और सटीक नीति-निर्माण संभव होगा।
इमर्जिंग टेक्नोलॉजी के तहत:
सरकार का मानना है कि डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और एआई आधारित मॉडल भविष्य के रोजगार बाजार में यूपी को प्रतिस्पर्धी बनाएंगे।
बजट की थीम “सुरक्षित नारी, सक्षम युवा, खुशहाल किसान और हर हाथ को काम” रखी गई है। स्वयं सहायता समूहों के जरिए महिला उद्यमिता को बढ़ावा देने और ‘शी-मार्ट’ विपणन केंद्र विकसित करने की योजना घोषित की गई है, ताकि ग्रामीण और शहरी महिलाओं के उत्पादों को बाजार मिल सके।
सरकार ने कृषि को आय आधारित और वैल्यू एडिशन मॉडल की ओर ले जाने की बात कही है। प्रमुख घोषणाएं:
इसके साथ ही 2 लाख मीट्रिक टन अतिरिक्त खाद्यान्न भंडारण क्षमता विकसित करने का लक्ष्य तय किया गया है। वेयरहाउस निर्माण के लिए विशेष सब्सिडी दी जाएगी। पशुधन बीमा योजना के तहत 85 प्रतिशत तक प्रीमियम सरकार देगी। मछुआरों के लिए स्टेट ऑफ द आर्ट होलसेल फिश मंडी और फिश प्रोसेसिंग सेंटर की स्थापना की जाएगी।
नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट को एग्री एक्सपोर्ट हब के रूप में विकसित करने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की घोषणा भी की गई है, ताकि यूपी के कृषि उत्पाद वैश्विक बाजार तक पहुंच सकें।
गंगा एक्सप्रेसवे के विस्तार को लेकर कई घोषणाएं की गईं:
हर जिले में स्किल डेवलपमेंट केंद्र स्थापित करने की घोषणा की गई है, जिन्हें “हब एंड स्पोक” मॉडल पर विकसित किया जाएगा। 50 से 100 एकड़ में सरदार वल्लभभाई पटेल इंप्लायमेंट जोन स्थापित करने का भी प्रस्ताव है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2017 में यूपी की ईज ऑफ डूइंग बिजनेस रैंकिंग 13-14 के आसपास थी, जो अब देश में दूसरे स्थान पर है। सरकार ने खुद को “चीफ अचीवर स्टेट” के रूप में स्थापित करने का दावा किया।
एमएसएमई सेक्टर में 3 करोड़ से अधिक युवाओं को रोजगार मिलने का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि 50 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव आना बदले हुए कानून-व्यवस्था और निवेश माहौल का संकेत है।
वर्ष 2026-27 का यह बजट आकार, थीम और घोषणाओं के लिहाज से महत्वाकांक्षी है। सरकार ने इसे वित्तीय अनुशासन, इंफ्रास्ट्रक्चर विस्तार, डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन और कृषि-आधारित आय वृद्धि के संतुलन के रूप में प्रस्तुत किया है।
हालांकि बजट की वास्तविक सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि घोषित योजनाओं का जमीनी क्रियान्वयन कितना प्रभावी रहता है, रोजगार और आय वृद्धि के दावों का स्वतंत्र आंकड़ों से कितना मेल बैठता है, और निवेश प्रस्ताव कितनी तेजी से धरातल पर उतरते हैं।
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