UP Budget 2026-27 में योगी सरकार ने कृषि, मत्स्य, दुग्ध, उद्यान और खाद्य-रसद के लिए हजारों करोड़ का प्रावधान किया है। किसानों के सोलर पंप, निजी नलकूप बिजली, डेयरी प्लांट और एक्वा पार्क जैसी योजनाओं पर बड़ा फोकस किया गया है।
लखनऊ में 11 फरवरी को पेश हुए उत्तर प्रदेश बजट 2026-27 में योगी सरकार ने साफ संकेत दिया है कि उसकी प्राथमिकता ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति देना है। वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने सदन में बजट पेश करते हुए कहा कि किसानों, युवाओं, महिलाओं और श्रमिकों का सशक्तिकरण सरकार की नीति का केंद्र है। इसी दिशा में कृषि, मत्स्य, उद्यान, दुग्ध विकास और खाद्य-रसद से जुड़े विभागों के लिए बड़ी धनराशि प्रस्तावित की गई है।
सरकार इसे “बॉटलनेक टू ब्रेकथ्रू” की रणनीति बता रही है, अर्थात जिन क्षेत्रों में अड़चनें थीं, उन्हें दूर कर उत्पादन, प्रसंस्करण और विपणन की पूरी श्रृंखला को मजबूत करना।
कृषि योजनाओं के लिए 10,888 करोड़ रुपये
वित्त मंत्री के अनुसार, वर्ष 2026-27 में कृषि योजनाओं के लिए 10,888 करोड़ रुपये की व्यवस्था प्रस्तावित है, जो पिछले वित्त वर्ष की तुलना में लगभग 20 प्रतिशत अधिक है। सरकार ने 753.55 लाख मीट्रिक टन खाद्यान्न और 48.18 लाख मीट्रिक टन तिलहन उत्पादन का लक्ष्य रखा है।
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यूपीएग्रीज और एग्रीएक्सपोर्ट पर फोकस
- यूपीएग्रीज परियोजना के तहत एक्वा कल्चर आधारभूत संरचना, विश्वस्तरीय हैचरी और ट्रेनिंग सेंटर के लिए 155 करोड़ रुपये।
- एग्रीएक्सपोर्ट हब की स्थापना के लिए 245 करोड़ रुपये।
- किसान उत्पादक संगठनों (FPO) के लिए रिवाल्विंग फंड योजना में 75 करोड़ रुपये।
यह कदम कृषि उत्पादों के निर्यात और वैल्यू चेन को मजबूत करने की दिशा में अहम माना जा रहा है।
डीजल पंप से सोलर पंप की ओर
कृषकों के डीजल पंप सेट को सोलर पंप में परिवर्तित करने के लिए 637 करोड़ 84 लाख रुपये प्रस्तावित हैं। ऊर्जा लागत घटाने और पर्यावरण अनुकूल खेती को बढ़ावा देने के लिए यह योजना महत्वपूर्ण मानी जा रही है। नेशनल मिशन ऑन नेचुरल फार्मिंग के तहत 94,300 हेक्टेयर क्षेत्र में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है, जिसके लिए 298 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई है।
निजी नलकूपों को निर्बाध बिजली
किसानों के निजी नलकूपों को निर्बाध विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए 2,400 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इसके साथ ही:
- सीड पार्क विकास परियोजना (बीज स्वावलंबन नीति 2024) के लिए 251 करोड़ रुपये।
- पं. दीनदयाल उपाध्याय किसान समृद्धि योजना के लिए लगभग 103 करोड़ रुपये।
उद्यान और खाद्य प्रसंस्करण: 2,832 करोड़ का प्रावधान
सरकार ने उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र के लिए 2,832 करोड़ रुपये प्रस्तावित किए हैं, जो पिछले वर्ष से अधिक है।
- राष्ट्रीय औद्यानिक मिशन: 715 करोड़ रुपये।
- प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना: 478 करोड़ रुपये।
- खाद्य प्रसंस्करण उद्योग नीति-2022 के क्रियान्वयन हेतु 300 करोड़ रुपये।
- मुख्यमंत्री राज्य औद्यानिक विकास योजना: 25 करोड़ रुपये।
यह प्रावधान किसानों की आय बढ़ाने के लिए प्रसंस्करण और बाजार से जुड़ाव पर जोर देता है।
दुग्ध विकास: मथुरा में 1 लाख लीटर क्षमता का नया प्लांट
दुग्ध विकास के अंतर्गत मथुरा में प्रस्तावित डेयरी प्लांट की क्षमता 30 हजार लीटर प्रतिदिन से बढ़ाकर 1 लाख लीटर प्रतिदिन की गई है। इसके लिए 23 करोड़ रुपये का प्रावधान है। इसके अलावा 220 नई दुग्ध समितियों के गठन और 450 समितियों के पुनर्गठन के लिए 107 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई है।
पशुधन और गो-आश्रय: 2,000 करोड़
प्रदेश के 7,497 गो-आश्रय स्थलों में 12 लाख से अधिक गोवंश संरक्षित हैं।
- छुट्टा गोवंश के रखरखाव के लिए 2,000 करोड़ रुपये।
- वृहद गो-संरक्षण केंद्रों की स्थापना हेतु 100 करोड़ रुपये।
- पशु रोग नियंत्रण योजना के लिए 253 करोड़ रुपये।
- पशु चिकित्सालयों के सुदृढ़ीकरण के लिए 155 करोड़ रुपये।
प्रदेश में पहली बार मोबाइल वेटरेनरी यूनिट को भी शामिल किया गया है।
मत्स्य क्षेत्र: एकीकृत एक्वा पार्क और थोक बाजार
मत्स्य क्षेत्र में:
- प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत 195 करोड़ (पुरुष घटक) और 115 करोड़ (महिला घटक)।
- एकीकृत एक्वा पार्क के लिए 190 करोड़ रुपये।
- अत्याधुनिक मत्स्य थोक बाजार, एक्वा पार्क और प्रसंस्करण केंद्र की नई योजना के लिए 100 करोड़ रुपये।
खाद्य एवं रसद: 20,124 करोड़
खाद्य एवं रसद विभाग के लिए 20,124 करोड़ रुपये का प्रावधान:
- अन्नपूर्ति योजना: 15,480 करोड़ रुपये।
- निःशुल्क एलपीजी सिलिंडर रीफिलिंग योजना: 1,500 करोड़ रुपये।
- अन्नपूर्णा भवन निर्माण: 500 करोड़ रुपये।
UP Budget 2026-27 में कृषि और उससे जुड़े क्षेत्रों पर केंद्रित यह निवेश ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की रणनीति का हिस्सा है। उत्पादन लक्ष्य, प्रसंस्करण ढांचा, निर्यात हब, डेयरी विस्तार और मत्स्य पार्क इन सबके जरिए सरकार कृषि को पारंपरिक ढांचे से आगे ले जाकर मूल्य संवर्धन और रोजगार सृजन से जोड़ना चाहती है।
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