
लखनऊ: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सोच के अनुसार उत्तर प्रदेश सरकार ने बजट 2026–27 में राज्य को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर का बड़ा केंद्र बनाने की दिशा में कई अहम फैसले लिए हैं। सरकार ने 5 गीगावाट क्षमता के 4–5 डाटा सेंटर क्लस्टर बनाने की घोषणा की है। इसके लिए शुरुआती तौर पर 100 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इस पूरी योजना को लागू करने की जिम्मेदारी स्टेट ट्रांसफॉर्मेशन कमीशन को दी गई है। मुख्यमंत्री का मानना है कि आने वाले समय में एआई दुनिया की अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाने वाली सबसे बड़ी ताकत बनेगा और डाटा सेंटर इस नई डिजिटल अर्थव्यवस्था की बुनियाद हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार ने चरणबद्ध योजना बनाई है। पहले चरण में 2030 तक 5 गीगावाट क्षमता तैयार की जाएगी और 2047 तक इसे बढ़ाकर 40 गीगावाट करने का लक्ष्य रखा गया है।
आज भारत दुनिया में बहुत ज्यादा डाटा पैदा करता है, लेकिन डाटा सेंटर क्षमता के मामले में पीछे है। अमेरिका के पास करीब 54 गीगावाट, चीन के पास 20 गीगावाट और यूरोप के पास लगभग 13 गीगावाट क्षमता है। भारत की मौजूदा क्षमता सिर्फ 1.6 गीगावाट है, जबकि दुनिया के करीब 20 प्रतिशत डाटा का निर्माण भारत में होता है। इसके बावजूद वैश्विक डाटा सेंटर क्षमता में भारत की हिस्सेदारी सिर्फ 2–3 प्रतिशत है। ऐसे में उत्तर प्रदेश की यह पहल बहुत महत्वपूर्ण मानी जा रही है। सरकार का कहना है कि डाटा सेंटर क्लस्टर के लिए पर्याप्त जमीन, सस्ती और लगातार बिजली, पानी, तेज इंटरनेट बैंडविड्थ और प्रशिक्षित मानव संसाधन उपलब्ध कराया जाएगा। निवेशकों को जल्दी अनुमति मिले, इसके लिए प्रक्रियाएं आसान और पारदर्शी बनाई जाएंगी। डाटा सेंटर बनाना पूंजी-गहन काम है। एक मेगावाट क्षमता लगाने में 70–80 करोड़ रुपये तक खर्च हो सकता है। इसलिए इससे बड़े स्तर पर निवेश आएगा और रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।
जहां डाटा सेंटर क्लस्टर बनेंगे, वहां डिजिटल टाउनशिप भी विकसित की जाएगी। इसका मतलब है कि वहां आईटी कंपनियां, स्टार्टअप, क्लाउड सेवाएं, साइबर सुरक्षा और एआई आधारित उद्योग एक साथ विकसित होंगे। इससे प्रदेश में टेक्नोलॉजी आधारित उद्योगों को मजबूती मिलेगी।
सरकार 'डेटा इज द न्यू ऑयल' की सोच के साथ स्टेट डाटा अथॉरिटी बनाने जा रही है। अभी अलग-अलग विभाग एक ही तरह का डाटा अलग-अलग इकट्ठा करते हैं, जिससे आंकड़ों में फर्क आ जाता है। नई व्यवस्था में सभी विभागों का डाटा एक जगह इकट्ठा होगा और रियल-टाइम अपडेट मिलेगा। इससे योजनाएं ज्यादा सटीक और पारदर्शी बनेंगी। सरकार का लक्ष्य 2029 तक 1 ट्रिलियन डॉलर और 2047 तक 6 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाना है।
राज्य में एक नया और आधुनिक ‘स्टेट डाटा सेंटर 2.0’ बनाया जाएगा। इसके लिए 100 करोड़ रुपये का बजट रखा गया है। यह सभी विभागों के डिजिटल डाटा को सुरक्षित तरीके से संभालेगा।
‘टेक युवा–समर्थ युवा’ योजना के तहत 25 लाख युवाओं और छात्रों को एआई, एआर (Augmented Reality), वीआर (Virtual Reality) और ईआर (Extended Reality) जैसी तकनीकों में प्रशिक्षण दिया जाएगा। पहले से दिए गए टैबलेट्स के जरिए युवाओं को डिजिटल ट्रेनिंग मिलेगी। इसके लिए 100 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
सरकार ‘उत्तर प्रदेश नई और उभरती टेक्नोलॉजी मिशन’ शुरू कर रही है। इसके तहत रोबोटिक्स, फोटोनिक्स और एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्रों में रिसर्च और स्टार्टअप को बढ़ावा मिलेगा। इसके लिए 100 करोड़ रुपये का बजट तय किया गया है।
नोएडा और ग्रेटर नोएडा में रोबोटिक्स इंडस्ट्री तेजी से बढ़ रही है। उत्तर प्रदेश रोबोटिक्स मिशन के लिए भी 100 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जिससे रिसर्च, नवाचार और स्टार्टअप को समर्थन मिलेगा।
भारत सरकार के सहयोग से 3 एआई सेंटर ऑफ एक्सीलेंस और 49 आईटीआई में एआई डाटा लैब स्थापित की जाएंगी। इसके लिए 32.82 करोड़ रुपये का बजट रखा गया है।
डिजिटल गवर्नेंस मजबूत करने के लिए ‘यूपीस्वान-3’ के तहत राज्य के सभी सरकारी दफ्तरों तक हाई बैंडविड्थ इंटरनेट पहुंचाया जाएगा। इसके लिए 117.63 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
लखनऊ और गौतमबुद्ध नगर में ‘यू-हब’ बनाए जाएंगे, जहां स्टार्टअप को इन्क्यूबेशन, रिसर्च और सहयोग मिलेगा। इसके लिए 100 करोड़ रुपये तय किए गए हैं।
सरकार महिला स्वयं सहायता समूहों के उत्पादों की बिक्री के लिए बड़े शहरों और प्रमुख स्थानों पर शोरूम खोलेगी। तीन साल तक किराया सरकार देगी। इस योजना के लिए 100 करोड़ रुपये का बजट रखा गया है।
हर न्याय पंचायत स्तर पर डिजिटल इन्टरप्रन्योर तैयार किए जाएंगे। युवाओं को 10 लाख रुपये तक का ब्याज मुक्त ऋण मिलेगा, जिसे 5 साल में चुकाना होगा। कम से कम 50 प्रतिशत लाभार्थी महिलाएं होंगी।
कृषि उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाने के लिए ‘कृषि एक्सपोर्ट सपोर्ट मिशन’ शुरू किया जाएगा। इसके लिए 100 करोड़ रुपये का प्रावधान है।
सरकार उद्योगों के लिए नियम आसान बनाने जा रही है। छोटी गलतियों पर आपराधिक कार्रवाई खत्म की जाएगी और प्रक्रियाएं डिजिटल होंगी। इसके लिए 10 करोड़ रुपये का प्रारंभिक बजट रखा गया है।
राज्य में मातृ मृत्यु दर 141 है। सरकार इसे 20 से नीचे लाने का लक्ष्य लेकर चल रही है। ‘मुख्यमंत्री मातृत्व सुरक्षा संकल्प योजना’ के लिए 1000 करोड़ रुपये का प्रस्ताव है।
राज्य के 40 लाख निजी नलकूपों को सोलर ऊर्जा से चलाने की योजना है। इससे डीजल खर्च कम होगा और किसानों को राहत मिलेगी। इस पूरी योजना की अनुमानित लागत 1.80 लाख करोड़ रुपये है, जबकि शुरुआत में 2000 करोड़ रुपये का प्रावधान संभव है।
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