UP Election 2027: क्या है कांग्रेस की '200 डिमांड' जिसने बढ़ाई अखिलेश की मुश्किल, कहां फंसा पेंच?

Published : Oct 05, 2026, 10:19 PM IST

Congress-SP Seat Sharing in UP: कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के रिश्ते हमेशा उतार-चढ़ाव वाले रहे हैं। अब उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले दोनों दलों के बीच सीटों के बंटवारे को लेकर खींचतान बढ़ती दिखाई दे रही है।

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‘छोटे भाई’ का रोल नहीं चाहती कांग्रेस

दरअसल, कांग्रेस अब अखिलेश यादव की समाजवादी पार्टी के साथ सिर्फ ‘छोटे भाई’ की भूमिका में रहना नहीं चाहती। पार्टी की कोशिश है कि उत्तर प्रदेश में बीजेपी की रणनीति की तरह छोटी पार्टियों को साथ लेकर एक बड़ा गठबंधन तैयार किया जाए। मौजूदा बातचीत में कांग्रेस की ओर से 200 सीटों की मांग की बात सामने आई है।

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कांग्रेस ने बीजेपी से क्या सीखा?
  • उत्तर प्रदेश की राजनीति में छोटी पार्टियों को साथ लेकर चलना बीजेपी की रणनीति का अहम हिस्सा रहा है। खासकर गैर-यादव OBC और दलित वर्ग पर प्रभाव रखने वाली छोटी पार्टियों के साथ गठबंधन ने बीजेपी को अलग-अलग जातीय समूहों तक पहुंच बनाने में मदद की।
  • इसे बीजेपी की ‘कास्ट इंजीनियरिंग’ रणनीति का हिस्सा माना गया, जिसका पार्टी को चुनावों में फायदा मिला। 2017 और 2022 के विधानसभा चुनावों में बीजेपी ने छोटी पार्टियों के साथ गठबंधन करके अपना सामाजिक आधार मजबूत किया।
  • पिछले विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने निषाद पार्टी, अपना दल (सोनेलाल) और कुछ अन्य छोटे दलों के साथ गठबंधन किया था। बीजेपी ने 255 सीटें जीती थीं। हालांकि यह आंकड़ा 2017 में जीती गई 312 सीटों से कम था, लेकिन फिर भी पार्टी ने स्पष्ट बहुमत हासिल किया था।
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कांग्रेस 403 में 200 सीटें क्यों चाहती है?
  • कांग्रेस अब उत्तर प्रदेश में अपनी भूमिका को बड़ा करना चाहती है। पार्टी की रणनीति सिर्फ समाजवादी पार्टी के साथ सीटों का बंटवारा करने तक सीमित नहीं दिख रही, बल्कि वह अपने हिस्से में आने वाली सीटों के जरिए छोटे दलों और प्रभावशाली नेताओं को भी साथ जोड़ना चाहती है।
  • कांग्रेस के यूपी प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम ने हाल में कहा कि उन्होंने 150 नहीं, बल्कि 200 सीटों की बात की थी। उन्होंने सीट शेयरिंग में ‘बराबर सम्मान’ और ‘बराबर हिस्सेदारी’ की मांग दोहराई है। हालांकि अंतिम सीटों की संख्या पार्टी की वरिष्ठ नेतृत्व तय करेगा।
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स्वामी प्रसाद मौर्य और छोटी पार्टियों पर कांग्रेस की नजर
  • सूत्रों के मुताबिक, स्वामी प्रसाद मौर्य का गुट और कुछ अन्य छोटी पार्टियां कांग्रेस के संपर्क में हैं। स्वामी प्रसाद मौर्य ने हाल ही में दिल्ली में राहुल गांधी से मुलाकात की। उनके कांग्रेस नेताओं से संपर्क के बाद यूपी की राजनीति में नई अटकलें तेज हो गई हैं।
  • स्वामी प्रसाद मौर्य 2022 के विधानसभा चुनाव से पहले बीजेपी छोड़कर समाजवादी पार्टी में शामिल हुए थे। उन्होंने सपा के टिकट पर फाजिलनगर से चुनाव लड़ा था, लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा था।
  • वहीं निषाद पार्टी ने 2022 का विधानसभा चुनाव बीजेपी के साथ गठबंधन में लड़ा था और छह सीटों पर जीत हासिल की थी। अब सूत्रों के हवाले से उसके कांग्रेस के संपर्क में होने की बात भी सामने आई है।
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कांग्रेस क्यों खत्म करना चाहती है ‘छोटे भाई’ वाली भूमिका?
  • कांग्रेस के अंदर यह सोच मजबूत हो रही है कि उत्तर प्रदेश में पार्टी को अब समाजवादी पार्टी की सहयोगी के तौर पर सीमित भूमिका नहीं निभानी चाहिए।
  • पार्टी के कई नेताओं का मानना है कि बीजेपी के खिलाफ लड़ाई में कांग्रेस खुद को सबसे आगे रख रही है। चाहे 2024 का लोकसभा चुनाव हो या वोट चोरी जैसे मुद्दे, कांग्रेस लगातार बीजेपी के खिलाफ आक्रामक अभियान चला रही है।
  • इसी वजह से पार्टी चाहती है कि यूपी विधानसभा चुनाव में उसे सम्मानजनक और बड़ी हिस्सेदारी मिले। कांग्रेस प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम भी सीट शेयरिंग का फैसला जल्द करने की मांग कर रहे हैं।
  • कांग्रेस चाहती है कि सीटों का बंटवारा समय रहते तय हो, ताकि उम्मीदवारों को चुनावी तैयारी के लिए पर्याप्त समय मिल सके।
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सपा भी दिखा रही अपनी संगठनात्मक ताकत
  • कांग्रेस की बढ़ती मांगों के बीच समाजवादी पार्टी भी पीछे हटने के मूड में नहीं दिख रही है। सपा सांसद धर्मेंद्र यादव ने कांग्रेस नेताओं के बयानों पर जवाब देते हुए जमीन पर पार्टी की स्थिति और संगठनात्मक ताकत का हवाला दिया है।
  • उन्होंने कांग्रेस से कहा है कि सीट शेयरिंग से जुड़ी मांगों को मीडिया के जरिए उठाने के बजाय सीधे सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव के सामने रखा जाए। सपा का रुख है कि गठबंधन की बातचीत आपसी संवाद से होनी चाहिए।
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सीट शेयरिंग के लिए समिति बना सकती है कांग्रेस
  • सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस आने वाले दिनों में सीट शेयरिंग पर बातचीत के लिए एक समिति बनाने पर विचार कर रही है। इसमें उत्तर प्रदेश के वरिष्ठ नेताओं को शामिल किया जा सकता है।
  • यह समिति समाजवादी पार्टी के साथ सीटों के बंटवारे के अलावा गठबंधन से जुड़े दूसरे मुद्दों पर भी बातचीत कर सकती है। फिलहाल दोनों दलों के बीच बातचीत का रास्ता खुला है, लेकिन सीटों की संख्या को लेकर दोनों की स्थिति अलग-अलग है।
  • कांग्रेस जहां बड़ी हिस्सेदारी और ‘बराबर सम्मान’ की बात कर रही है, वहीं सपा अपने संगठन और जमीनी ताकत के आधार पर सीटों पर अपना दावा मजबूत करना चाहती है। ऐसे में 2027 के चुनाव से पहले यूपी में INDIA गठबंधन का सीट शेयरिंग फॉर्मूला बेहद अहम होने वाला है।

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