
कभी अधिवक्ताओं के टूटी छत वाले चैंबरों में केस की तैयारी होती थी, अब उसी जमीन पर हाईराइज इमारतें खड़ी होंगी। जहां आम लोग भटकते थे, वहां अब एक ही परिसर में न्यायालय, चैंबर, पार्किंग से लेकर कैंटीन तक की व्यवस्था होगी। उत्तर प्रदेश सरकार ने न्यायपालिका के इंफ्रास्ट्रक्चर को नए युग में प्रवेश कराने की दिशा में बड़ा कदम उठा दिया है।
शनिवार को चंदौली में देश के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की उपस्थिति में चंदौली, महोबा, अमेठी, शामली, हाथरस और औरैया जिलों के एकीकृत न्यायालय परिसर का शिलान्यास व भूमि पूजन किया। मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम में सभी न्यायाधीशों का स्वागत करते हुए कहा कि यह सिर्फ पत्थर रखने का कार्यक्रम नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश की न्यायिक यात्रा में ऐतिहासिक परिवर्तन की शुरुआत है।
सीएम योगी ने कहा कि सुशासन की पहली शर्त है कि आम नागरिक को न्याय आसानी से और समय पर मिले। यूपी में न्यायिक कार्यों को लेकर कोई देरी नहीं होती, क्योंकि सरकार न्यायालयों को सर्वोच्च प्राथमिकता देती है। उन्होंने कहा कि न्यायपालिका जितनी सक्षम और सुदृढ़ होगी, लोकतंत्र की जड़ें उतनी गहरी होंगी।
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मुख्यमंत्री ने बताया कि पांच साल पहले सुप्रीम कोर्ट ने सुझाव दिया था कि देश में इंटीग्रेटेड कोर्ट कॉम्प्लेक्स मॉडल लागू कर ऐसे परिसर बनाए जाएं जहां अदालतें, अधिवक्ताओं के चैंबर, न्यायिक अधिकारियों के आवास, पार्किंग, कैंटीन और अन्य सुविधाएं एक ही जगह उपलब्ध हों। इसी अवधारणा के आधार पर यूपी में छह जिलों में परियोजना शुरू की गई है। आने वाले महीनों में चार और जिलों में यह मॉडल लागू होगा।
सीएम योगी ने कहा कि अब वादकारी को अधिवक्ता से मिलने धूप या हवा में खड़े नहीं रहना पड़ेगा। पुराने जर्जर चैंबरों की जगह आधुनिक चैंबर बनाए जाएंगे। निर्माण कार्य एलएंडटी जैसी प्रतिष्ठित संस्था करेगी, जिससे गुणवत्ता और समयसीमा दोनों सुनिश्चित होंगी।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि सरकार न्यायिक ढांचे को मजबूत करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा "सरकार के पास पैसे की कमी नहीं। केवल कार्य की गति बढ़ाइए, समर्थन पूरा मिलेगा।"
सीएम योगी ने कहा कि चंदौली में शुरू हुआ यह यात्रा भारत के न्यायिक इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज होगी। कार्यक्रम के दौरान वरिष्ठ न्यायाधीश विक्रम नाथ, न्यायमूर्ति पंकज मिथल, न्यायमूर्ति मनोज मिश्र, न्यायमूर्ति राजेश बिंदल, इलाहाबाद हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश अरुण भंसाली, वरिष्ठ न्यायाधीश महेश चंद्र त्रिपाठी भी उपस्थित रहे।
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