
लखनऊ। उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन (UPSDM) ने प्रशिक्षण प्रदाताओं (ITPs) को सेक्टर के आधार पर लक्ष्य आवंटित कर दिए हैं। यह प्रक्रिया नेशनल स्किल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (NSDC) योजना के तहत पूरी की गई है। सरकार का उद्देश्य कौशल विकास कार्यक्रमों को मिशन मोड में लागू कर युवाओं को उद्योग आधारित और रोजगारोन्मुख प्रशिक्षण उपलब्ध कराना है। निदेशालय, उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन द्वारा जारी कार्यालय ज्ञापन में स्पष्ट कहा गया है कि सभी प्रशिक्षण प्रदाताओं को तय शर्तों और गुणवत्ता मानकों का पालन करते हुए निर्धारित लक्ष्य समय पर पूरा करना होगा।
प्रशिक्षण संस्थानों को लक्ष्य उनके पिछले प्रदर्शन और आवेदन के क्रम के आधार पर दिए गए हैं। उदाहरण के तौर पर:
इससे साफ है कि सरकार उद्योगों की जरूरत के अनुसार सेक्टर आधारित स्किल ट्रेनिंग को प्राथमिकता दे रही है, ताकि युवाओं को सीधे रोजगार से जोड़ा जा सके।
कौशल विकास कार्यक्रम के तहत प्रशिक्षण अवधि अधिकतम 600 घंटे निर्धारित की गई है। आवासीय प्रशिक्षण केंद्रों में रोजाना कम से कम 8 घंटे प्रशिक्षण अनिवार्य होगा। प्रशिक्षण शुरू करने से पहले पोर्टल पर सत्यापन जरूरी रहेगा। हर प्रशिक्षण प्रदाता को संबंधित सेक्टर स्किल काउंसिल से संबद्ध होना होगा और मानक पाठ्यक्रम के अनुसार प्रशिक्षण देना होगा। मूल्यांकन भी संबंधित सेक्टर स्किल काउंसिल के माध्यम से ही किया जाएगा। यह व्यवस्था प्रशिक्षण की गुणवत्ता बनाए रखने और परिणाम आधारित मॉनिटरिंग को मजबूत करने के लिए लागू की गई है।
प्रशिक्षणार्थियों की उपस्थिति और अन्य आवश्यक जानकारी NSDC/SDMS पोर्टल पर दर्ज करना अनिवार्य किया गया है। सत्यापन पूरा होने के बाद ही अनुदान राशि जारी की जाएगी। यदि किसी प्रशिक्षण प्रदाता द्वारा लापरवाही या अनियमितता पाई जाती है, तो उसके खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।
प्रदेश सरकार कौशल विकास को सीधे रोजगार सृजन से जोड़ने की रणनीति पर काम कर रही है। उद्योगों की मांग के अनुरूप प्रशिक्षण, निजी क्षेत्र की भागीदारी और डिजिटल मॉनिटरिंग सिस्टम के जरिए स्किल इकोसिस्टम को मजबूत किया जा रहा है। ज्ञापन में यह भी साफ किया गया है कि सभी निर्धारित लक्ष्य संबंधित वित्तीय वर्ष के भीतर पूरे करना अनिवार्य होगा। लक्ष्य पूरा न करने पर भविष्य के आवंटन पर असर पड़ सकता है।
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