
UPI को लेकर इन दिनों सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या ₹2,000 से ज्यादा का पेमेंट करने पर अब ग्राहक से कोई चार्ज लिया जाएगा? वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने स्थिति साफ करते हुए कहा है कि प्रस्तावित Merchant Discount Rate (MDR) कोई टैक्स, सेस या सरचार्ज नहीं है और इसका पैसा सरकार के पास नहीं जाएगा।
नए ढांचे के तहत चुनिंदा Person-to-Merchant (P2M) लेनदेन में ₹2,000 से अधिक की राशि पर 0.4% MDR लागू होगा। ₹75,000 या उससे अधिक के लेनदेन पर MDR अधिकतम ₹300 प्रति ट्रांजैक्शन तक सीमित रहेगा। वहीं व्यक्ति से व्यक्ति यानी P2P भुगतान किसी भी राशि का हो, वह मुफ्त रहेगा।
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वित्त मंत्रालय के मुताबिक MDR भुगतान व्यवस्था के भीतर लिया जाने वाला शुल्क है। इसका भुगतान व्यापारी पक्ष से होगा और ग्राहकों पर इसे डालने की अनुमति नहीं होगी। यानी UPI से पेमेंट करने वाले व्यक्ति से अलग से MDR वसूलने का प्रावधान नहीं है। सरकार का कहना है कि यह शुल्क बैंकों, पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर्स और UPI ऐप जैसे सिस्टम के भागीदारों के बीच बांटा जाएगा।
सरकार के अनुसार नए ढांचे का करीब 96% P2M लेनदेन पर असर नहीं पड़ेगा। ₹2,000 तक के व्यापारी भुगतान मुफ्त रहेंगे। इसके अलावा UPI QR के जरिए महीने में ₹1 लाख तक प्राप्त करने वाले छोटे व्यापारियों के लिए भी जीरो-MDR व्यवस्था जारी रहेगी।
कुछ जरूरी क्षेत्रों के लिए अलग शुल्क व्यवस्था रखी गई है। रेलवे, टेलीकॉम, बीमा, ईंधन और कृषि इनपुट जैसे क्षेत्रों में ₹2,000 से ज्यादा के लेनदेन पर ₹5 का फ्लैट MDR होगा। वहीं म्यूचुअल फंड, सिक्योरिटीज और स्टॉकब्रोकर से जुड़े भुगतान पर 0.02% MDR होगा, जिसकी अधिकतम सीमा ₹300 है।
सरकार के मुताबिक इसका उद्देश्य UPI के लिए लंबे समय तक टिकाऊ आय ढांचा तैयार करना है, ताकि भुगतान व्यवस्था के इंफ्रास्ट्रक्चर, सुरक्षा और तकनीकी विकास को बनाए रखा जा सके। NPCI ने 15 सितंबर 2026 को संबंधित सर्कुलर जारी किया था।
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