
US Iran Conflict: मंगलवार की रात होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में वो हुआ जिसने पूरी दुनिया की सांसें रोक दीं। वैश्विक व्यापार की जीवनरेखा माने जाने वाले इस संकरे समुद्री रास्ते से गुज़र रहे तीन कमर्शियल तेल टैंकरों पर अचानक एक के बाद एक कई अज्ञात प्रोजेक्टाइल से हमला किया गया। जहाजों से उठती आग की लपटों और धुएं के गुबार ने यह साफ़ कर दिया कि खाड़ी में एक बार फिर बारूद की गंध फैल चुकी है। लेकिन असली धमाका अभी बाकी था। इस हमले के कुछ ही घंटों बाद, अमेरिकी सेना के सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने एक ऐसा कदम उठाया जिसने मध्य पूर्व को सीधे महायुद्ध के मुहाने पर लाकर खड़ा कर दिया है।
The US has launched fresh strikes on southern Iran, hitting areas near Bandar Abbas, Sirik and Qeshm Island. According to CENTCOM, these are retaliatory strikes after Iran attacked commercial vessels passing through the Strait of Hormuz, a move Washington called a clear violation… pic.twitter.com/pTAgC8pnMd
— G K Gourav (@GouravGKRepots) July 7, 2026
जैसे ही तीन कमर्शियल जहाजों पर हमले की पुष्टि हुई, अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने बिना कोई वक्त गंवाए आधी रात को ईरान के खिलाफ़ "ज़बरदस्त" सैन्य हमलों की घोषणा कर दी। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जारी एक बेहद सख्त बयान में CENTCOM ने कहा कि यह कार्रवाई "कमर्शियल शिपिंग को निशाना बनाने और उन पर हमला करने की भारी कीमत वसूलने" के लिए की गई है। अमेरिका ने दो टूक शब्दों में चेतावनी दी कि ईरान की दिखाई गई यह आक्रामकता पूरी तरह से अनुचित, खतरनाक और मौजूदा युद्धविराम का स्पष्ट उल्लंघन थी। इसके तुरंत बाद, अमेरिकी लड़ाकू विमानों और मिसाइलों ने ईरानी सीमाओं को भेदना शुरू कर दिया।
🇺🇸🇮🇷 The CENTCOM has announced the beginning of a wave of air strikes against Iran in retaliation to the attacks on Oil Tankers in the Strait of Hormuz.
The US is now striking Bandar Abbas port in Iran and has alerted Gulf states to prepare for retaliation.
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प्रतिष्ठित अमेरिकी मीडिया आउटलेट Axios के मुताबिक, वाशिंगटन ने इस बार ईरान को घुटनों पर लाने के लिए उसके सबसे संवेदनशील सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है। अमेरिकी हमलों के लक्ष्यों में ईरानी एयर डिफेंस सिस्टम, तटीय निगरानी सिस्टम, सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलें, एंटी-शिप क्रूज़ मिसाइल साइटें, ड्रोन लॉन्च साइटें और रणनीतिक बंदरगाह सुविधाएं शामिल थीं। कुछ ही देर में ईरानी सरकारी मीडिया ने भी देश के प्रमुख बंदरगाह शहरों-बंदर अब्बास और सिरिक-के साथ-साथ रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण केशम द्वीप (Qeshm Island) पर सिलसिलेवार और भयानक विस्फोटों की पुष्टि की।
U.S. Central Command forces have begun launching a series of powerful strikes against Iran to impose heavy costs for targeting and attacking commercial shipping crewed by innocent civilians in an international waterway. The U.S. strikes are in response to Iranian attacks on three…
— U.S. Central Command (@CENTCOM) July 7, 2026
इस भीषण सैन्य कार्रवाई ने दोनों देशों के बीच पिछले महीने हुए उस बेहद नाजुक अंतरिम समझौते को पूरी तरह से मलबे में तब्दील कर दिया है, जिसे बड़ी मुश्किल से अमलीजामा पहनाया गया था। इस नए मोड़ के बाद अमेरिका और ईरान दोनों एक-दूसरे पर समझौते की शर्तों को तार-तार करने का आरोप लगा रहे हैं। हमलों के तुरंत बाद आक्रोशित अमेरिका ने वो विशेष लाइसेंस भी रद्द कर दिया है जिसके तहत ईरान को अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल बेचने की छूट मिली हुई थी। यह रियायत दोनों देशों के बीच तनाव कम करने के लिए हुए समझौता ज्ञापन (MoU) का सबसे मुख्य हिस्सा थी, जो अब खत्म हो चुकी है।
🚨🚨BREAKING NEWS 🚨
🇺🇸🇮🇷 US Airstrikes Hammer Iranian Missile Sites After Iran Hormuz Vessel Attacks
US fighter jets conducted the largest airstrikes on Iran since the recent ceasefire, hitting IRGC missile launchers, air defenses, radars, and drone storage facilities in… pic.twitter.com/IAGhTIjfJ2— Corefrontline (@corefrontline) July 7, 2026
अमेरिका के इस फैसले से बौखलाए ईरान ने भी आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है। ईरान के विदेश मंत्रालय ने तेल प्रतिबंधों में छूट रद्द करने के वाशिंगटन के कदम की तीखी आलोचना की है। ईरान के विदेश मामलों के उप-मंत्री काज़ेम ग़रीबाबादी ने X पर मोर्चा संभालते हुए कहा, "ईरान के तेल की बिक्री पर लगे प्रतिबंधों से छूट देने वाली रियायत को रद्द करने का अमेरिका का कदम इस्लामाबाद समझौता ज्ञापन के अनुच्छेद 10 का खुला उल्लंघन है। इसके बाद की गई सैन्य कार्रवाई भी अनुच्छेद 1 और 2 का गंभीर उल्लंघन है।" उन्होंने दुनिया को आगाह करते हुए बेहद डरावनी चेतावनी दी कि अमेरिका द्वारा किए गए इस विश्वासघात के नतीजे बेहद गंभीर होंगे और ईरान अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए कोई भी निर्णायक कदम उठाने से पीछे नहीं हटेगा।
जानकारों का मानना है कि इन ताज़ा हमलों के बाद होर्मुज़ जलडमरूमध्य को फिर से सुरक्षित खोलने, ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर लगाम लगाने और मध्य पूर्व के इस खूनी संकट को स्थायी रूप से समाप्त करने की बची-खुची उम्मीदें भी खत्म हो गई हैं। गौरतलब है कि इस पूरे महासंकट की शुरुआत इसी साल 28 फरवरी को हुई थी, जब अमेरिका और इज़राइल ने संयुक्त रूप से ईरान पर एक बड़ा हमला किया था, जिसमें ईरान के तत्कालीन सर्वोच्च नेता अली खामेनेई की मौत हो गई थी। अब जबकि दोनों देश एक बार फिर आमने-सामने हैं, पूरी दुनिया की नजरें कच्चे तेल की कीमतों और तीसरे विश्व युद्ध के मंडराते बादलों पर टिकी हुई हैं।
U.S. Central Command (CENTCOM) has launched a series of powerful retaliatory strikes against Iranian targets along the country's southern shores following an IRGC attack on three commercial vessels in the Strait of Hormuz. The operation was initiated to impose heavy costs on… pic.twitter.com/rG3OzjBW4P
— Sharif Behruz🇹🇯 (@sharif_behruz) July 8, 2026
इन घटनाओं ने पश्चिम एशिया में चल रही शांति वार्ताओं के भविष्य पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। होर्मुज़ जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक माना जाता है, जहां किसी भी सैन्य टकराव का असर वैश्विक ऊर्जा बाजार, अंतरराष्ट्रीय व्यापार और क्षेत्रीय सुरक्षा पर पड़ सकता है। अब दुनिया की नजर इस बात पर टिकी है कि दोनों देशों के बीच तनाव कूटनीति से कम होगा या यह टकराव एक नए और बड़े संकट का रूप लेगा।
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