US-Iran Talks: 60 दिन की डेडलाइन भी पड़ सकती है कम, बातचीत लंबी खिंचने के आसार

Published : Jun 23, 2026, 10:56 PM IST
US Iran Negotiations Could Extend Beyond 60 Day Deadline S&P Global Expert Says

सार

S&P ग्लोबल के एक एक्सपर्ट ने ANI को बताया कि अमेरिका-ईरान के बीच चल रही बातचीत 60 दिन की डेडलाइन से आगे बढ़ सकती है, क्योंकि कई जियोपॉलिटिकल मुद्दे अभी सुलझे नहीं हैं। हालांकि, होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही में सुधार हुआ है, लेकिन अनिश्चितता बनी हुई है।

अमेरिका और ईरान के बीच चल रही बातचीत को पूरा होने में 60 दिन की मौजूदा समय-सीमा से ज़्यादा वक्त लग सकता है। S&P ग्लोबल एनर्जी के एक टॉप एक्सपर्ट ने मंगलवार को ANI को बताया कि कई जियोपॉलिटिकल मुद्दे अभी भी अनसुलझे हैं, भले ही होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से जहाजों की आवाजाही में सुधार के संकेत दिख रहे हैं। S&P ग्लोबल एनर्जी में लिक्विड बल्क, कमोडिटीज एट सी के डायरेक्टर और ग्लोबल हेड बेंजामिन टैंग से जब पूछा गया कि क्या 60 दिन की यह शांति वार्ता की खिड़की बढ़ाई जा सकती है, तो उन्होंने ANI से कहा, "हां, इस बात की संभावना है कि इन चर्चाओं को किसी नतीजे पर पहुंचने में 60 दिन से ज़्यादा लग सकते हैं।"

कई जियोपॉलिटिकल मुद्दे अभी बाकी

टैंग ने बताया कि मौजूदा समझौते में यह क्लॉज है कि अगर जरूरत पड़ी तो बातचीत को शुरुआती समय-सीमा से आगे बढ़ाया जा सकता है। उन्होंने कहा, “दोनों देशों के द्विपक्षीय समझौतों में 60 दिन की बातचीत को बढ़ाने का प्रावधान है।” S&P ग्लोबल के एग्जीक्यूटिव ने कहा कि कई अहम मुद्दे अभी भी सुलझे नहीं हैं और ये बातचीत की रफ्तार पर असर डाल सकते हैं। टैंग ने कहा, "अभी बहुत सी चीजें हैं जिन पर फैसला होना बाकी है।"

बातचीत में आ रही मुख्य चुनौतियों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, “मुझे लगता है कि सबसे बड़ा मुद्दा यह है कि न्यूक्लियर सिचुएशन का क्या होगा। इसके अलावा लेबनान, अलग-अलग हमलों और उन पर दी जाने वाली प्रतिक्रियाओं जैसे मुद्दे भी हैं।” टैंग ने कहा कि ये मुद्दे बातचीत के भविष्य के लिए बहुत अहम हैं। उन्होंने कहा, "ये ऐसे प्रमुख मुद्दे हैं, जिन्हें पूरी तरह से सुलझाने के लिए 60 दिन काफी होंगे या नहीं, यह अभी साफ नहीं है।"

होर्मुज जलडमरूमध्य में सुधार के संकेत

इन अनिश्चितताओं के बावजूद, टैंग ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य में कुछ उत्साहजनक संकेत मिले हैं, जो ग्लोबल एनर्जी ट्रेड के लिए एक बेहद अहम रास्ता है। उन्होंने बताया, “हमने देखा है कि पिछले हफ्ते यहां से गुजरने वाले जहाजों की संख्या बढ़ी है। अब रोजाना औसतन करीब 30 जहाज यहां से निकल रहे हैं, जबकि पिछले कुछ महीनों में यह आंकड़ा सिर्फ 12 था।” हालांकि, उन्होंने यह भी चेताया कि ट्रैफिक का लेवल अभी भी सामान्य से काफी नीचे है। टैंग ने कहा, “यह संख्या युद्ध से पहले देखे गए 135 जहाजों के आंकड़े से बहुत दूर है।” उन्होंने कहा कि शिपिंग की मंजूरी, इंश्योरेंस की लागत और इस रास्ते से गुजरने के लिए भविष्य की व्यवस्थाओं जैसे कई ऑपरेशनल और कमर्शियल मुद्दों को अभी भी सुलझाना बाकी है। उन्होंने कहा, "तो संकेत पॉजिटिव हैं, लेकिन अभी भी अनिश्चितताएं और कई डिटेल्स पर काम करना बाकी है।"

ईरानी कच्चे तेल का एक्सपोर्ट बढ़ा

ईरान के कच्चे तेल के एक्सपोर्ट पर टैंग ने कहा कि हाल के दिनों में टैंकरों की एक्टिविटी बढ़ी है। उन्होंने बताया, “पिछले हफ्ते, अमेरिकी नाकाबंदी हटने के बाद, हमने देखा है कि बहुत सारे ईरानी टैंकरों ने निकलना शुरू कर दिया है।” टैंग के मुताबिक, हाल के दिनों में कम से कम 12 ईरानी टैंकर निकले हैं, जिससे एक्सपोर्ट युद्ध से पहले के स्तर के करीब पहुंच गया है। उन्होंने कहा, "हमारा अनुमान है कि जून महीने के लिए यह करीब 15 लाख बैरल प्रति दिन है। यह आंकड़ा युद्ध से पहले के स्तर जैसा ही है।"

भारत ने दिखाई सूझबूझ

उन्होंने यह भी कहा कि अभी जो कार्गो बाजार में पहुंच रहे हैं, उनमें से कई इस रुकावट से पहले ही लोड किए जा चुके थे और इस पर सवाल बने हुए हैं कि ईरान का प्रोडक्शन पूरी तरह से कितनी जल्दी बढ़ पाएगा।

टैंग ने इस संकट पर भारत की प्रतिक्रिया की भी तारीफ की। उन्होंने कहा कि भारत ने तेजी से कच्चे तेल के वैकल्पिक सोर्स हासिल करके और अपनी सोर्सिंग में विविधता लाकर अपनी क्षमता दिखाई है। उन्होंने बताया कि रूस, ब्राजील, पश्चिम अफ्रीका और अमेरिका के कच्चे तेल के ग्रेड भारत के इम्पोर्ट पोर्टफोलियो का अहम हिस्सा बन गए हैं, जबकि रिफाइनर सप्लाई सिक्योरिटी और लागत के बीच संतुलन बनाना जारी रखे हुए हैं। टैंग ने कहा कि जहाजों की आवाजाही और कच्चे तेल के फ्लो में हालिया सुधार के बावजूद, अमेरिका-ईरान बातचीत की प्रगति एनर्जी मार्केट के लिए एक प्रमुख फैक्टर बनी रहेगी, क्योंकि इसका असर क्षेत्रीय स्थिरता, ग्लोबल ऑयल फ्लो और एनर्जी सिक्योरिटी पर पड़ता है।

PREV

Asianet News Hindi पर पढ़ें देशभर की सबसे ताज़ा National News in Hindi, जो हम खास तौर पर आपके लिए चुनकर लाते हैं। दुनिया की हलचल, अंतरराष्ट्रीय घटनाएं और बड़े अपडेट — सब कुछ साफ, संक्षिप्त और भरोसेमंद रूप में पाएं हमारी World News in Hindi कवरेज में। अपने राज्य से जुड़ी खबरें, प्रशासनिक फैसले और स्थानीय बदलाव जानने के लिए देखें State News in Hindi, बिल्कुल आपके आसपास की भाषा में। उत्तर प्रदेश से राजनीति से लेकर जिलों के जमीनी मुद्दों तक — हर ज़रूरी जानकारी मिलती है यहां, हमारे UP News सेक्शन में। और Bihar News में पाएं बिहार की असली आवाज — गांव-कस्बों से लेकर पटना तक की ताज़ा रिपोर्ट, कहानी और अपडेट के साथ, सिर्फ Asianet News Hindi पर।

Read more Articles on

Recommended Stories

CUET Examination: Delhi की Devina का CUET में 1st Rank, सुनिए क्या बताया...
'ममता बनर्जी को पार्टी से ज्यादा भतीजा प्यारा' TMC में जारी अंदरूनी कलह पर क्या बोलीं Keya Ghosh