ईरान पर US के कड़े प्रतिबंधों से बढ़ेगा तेल संकट! ट्रंप के Economic War में चीन-होर्मुज क्यों अहम?

Published : Aug 21, 2026, 08:25 AM IST
us iran sanctions oil prices trump economic war hormuz china

सार

US Iran Sanctions: ग्लोबल मार्केट में बड़े तूफान की आहट! ईरान पर अमेरिका के ‘इतिहास के सबसे कड़े प्रतिबंध’ की धमकी से तेल बाजार में हलचल है। तेहरान ने इसे ‘आर्थिक आतंकवाद’ कहा। क्या ट्रंप का नया आर्थिक वार युद्ध को रोकेगा या संकट बढ़ाएगा? जानिए इस आर्थिक घेराबंदी का खौफनाक सच!

US Iran Conflict: अमेरिका और ईरान के बीच तनाव अब सैन्य मोर्चे से निकलकर आर्थिक युद्ध की ओर तेजी से बढ़ता दिखाई दे रहा है। ट्रंप प्रशासन ने तेहरान पर ऐसे प्रतिबंध लगाने की तैयारी शुरू कर दी है, जिन्हें अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने “इतिहास के सबसे कड़े प्रतिबंध” बताया है। यह ऐलान ऐसे समय हुआ है, जब दोनों देशों के बीच करीब छह महीने से जारी संघर्ष खत्म होने का नाम नहीं ले रहा। बेसेंट के मुताबिक, अमेरिका का लक्ष्य ईरान पर इतना बड़ा आर्थिक दबाव बनाना है कि आगे बड़े सैन्य अभियान की जरूरत कम हो जाए। उनका बयान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की उस चेतावनी के एक दिन बाद आया, जिसमें उन्होंने ईरान के खिलाफ “आर्थिक युद्ध” और पूर्ण आर्थिक अलगाव की बात कही थी।

प्रतिबंधों की खबर आते ही क्यों उछलीं तेल की कीमतें?

अमेरिकी धमकी का असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर भी दिखाई दिया। तेल की कीमतें तीन सप्ताह से अधिक समय के उच्चतम स्तर पर पहुंच गईं। बाजार पहले से ही मध्य पूर्व में ऊर्जा आपूर्ति बाधित होने और होर्मुज जलडमरूमध्य में शिपिंग पर दबाव को लेकर चिंतित हैं। होर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में से एक है। संघर्ष शुरू होने से पहले वैश्विक तेल व्यापार का करीब पांचवां हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता था। ऐसे में यहां जहाजों की आवाजाही बाधित होने का सीधा असर दुनिया भर में तेल की कीमतों और सप्लाई पर पड़ सकता है। बेसेंट ने हालांकि तेल की कीमतों में उछाल को लेकर कहा कि उन्हें इसकी पूरी वजह निश्चित रूप से पता नहीं है। उन्होंने संकेत दिया कि अगर आर्थिक दबाव अधिकतम स्तर पर पहुंचाया जाता है, तो बड़े पैमाने पर सैन्य कार्रवाई दोबारा शुरू होने की संभावना कम हो सकती है।

ईरान ने कहा- यह प्रतिबंध नहीं, ‘आर्थिक आतंकवाद’ है

अमेरिकी योजना पर ईरान ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। ईरानी विदेश मंत्रालय ने प्रस्तावित प्रतिबंधों को “आर्थिक आतंकवाद” करार दिया। तेहरान का आरोप है कि अमेरिकी प्रतिबंधों का सबसे ज्यादा असर आम ईरानी नागरिकों पर पड़ेगा और यह नीति मानवता के खिलाफ अपराध के समान है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने भी वॉशिंगटन की नीति पर हमला बोला। उन्होंने अमेरिका पर अपने आर्थिक संकट, भारी कर्ज और बढ़ती ब्याज दरों जैसे मुद्दों से ध्यान भटकाने का आरोप लगाया।

चीन भी निशाने पर आया तो क्या होगा?

अमेरिका की नई रणनीति का असर सिर्फ ईरान तक सीमित रहने की आशंका नहीं है। बेसेंट ने उन देशों को भी चेतावनी दी है जो ईरान के साथ व्यापार जारी रखते हैं। चीन को लेकर पूछे गए सवाल पर बेसेंट ने सीधा संकेत दिया कि ईरान के साथ व्यापार करने वालों को अमेरिकी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, समुद्री रास्ते से ईरान से खरीदे जाने वाले तेल में चीन की हिस्सेदारी 80 प्रतिशत से अधिक रही है। यही वजह है कि अगर वॉशिंगटन चीनी संस्थाओं पर भी व्यापक प्रतिबंध लगाता है, तो अमेरिका-चीन आर्थिक रिश्तों पर नया दबाव पैदा हो सकता है। चीन अमेरिका के लिए महत्वपूर्ण व्यापारिक साझेदार है और दुर्लभ-पृथ्वी खनिजों जैसे रणनीतिक संसाधनों के मामले में भी अहम भूमिका रखता है।

दशकों पुराने प्रतिबंध, लेकिन इस बार दांव कितना बड़ा?

ईरान अमेरिकी प्रतिबंधों का सामना दशकों से कर रहा है। 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद से दोनों देशों के रिश्ते लगातार तनावपूर्ण रहे हैं और तेहरान पर अलग-अलग चरणों में व्यापक आर्थिक प्रतिबंध लगाए जाते रहे हैं। लेकिन इस बार हालात इसलिए ज्यादा गंभीर हैं क्योंकि आर्थिक प्रतिबंधों के साथ क्षेत्रीय सैन्य तनाव, ऊर्जा आपूर्ति और होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा भी जुड़ी हुई है। अमेरिका का दावा है कि आर्थिक दबाव ईरानी शासन को कमजोर कर सकता है। दूसरी ओर, तेहरान इसे अपनी संप्रभुता और जनता के खिलाफ हमला बता रहा है।

ट्रंप के युद्ध के लक्ष्य पूरे हुए या नहीं?

संघर्ष की शुरुआत में ट्रंप प्रशासन ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम को खत्म करने, क्षेत्रीय प्रतिद्वंद्वियों पर हमला करने की उसकी क्षमता को कमजोर करने और ईरान के धार्मिक नेतृत्व पर दबाव बढ़ाने जैसे लक्ष्य सामने रखे थे। हालांकि, उपलब्ध घटनाक्रम से साफ है कि इन लक्ष्यों को लेकर अभी भी कई सवाल बाकी हैं। अमेरिका और ईरान के बीच अप्रैल और जून में युद्धविराम की कोशिशें भी हुईं, लेकिन दोनों समझौते ज्यादा समय तक टिक नहीं सके। अब वॉशिंगटन आर्थिक दबाव को अपने अगले बड़े हथियार के रूप में इस्तेमाल करने की तैयारी में है।

असली खतरा होर्मुज में छिपा है?

इस पूरे संकट का सबसे संवेदनशील बिंदु फिलहाल होर्मुज जलडमरूमध्य बना हुआ है। ईरान ने पहले ही इस रणनीतिक जलमार्ग से शिपिंग को प्रभावित करने की अपनी क्षमता का प्रदर्शन किया है। दूसरी ओर, तेहरान ओमान के साथ जलडमरूमध्य में ट्रैफिक मैनेजमेंट को लेकर समझौते की कोशिश कर रहा है। बातचीत आगे बढ़ने के संकेत जरूर मिले हैं, लेकिन क्षेत्र में स्थायी सुरक्षा के लिए व्यापक शांति जरूरी होगी। ओमान के विदेश मंत्री बद्र अलबुसैदी ने भी तनाव बढ़ाने के बजाय क्षेत्रीय शांति पर जोर दिया है।

PREV

Asianet News Hindi पर पढ़ें देशभर की सबसे ताज़ा National News in Hindi, जो हम खास तौर पर आपके लिए चुनकर लाते हैं। दुनिया की हलचल, अंतरराष्ट्रीय घटनाएं और बड़े अपडेट — सब कुछ साफ, संक्षिप्त और भरोसेमंद रूप में पाएं हमारी World News in Hindi कवरेज में। अपने राज्य से जुड़ी खबरें, प्रशासनिक फैसले और स्थानीय बदलाव जानने के लिए देखें State News in Hindi, बिल्कुल आपके आसपास की भाषा में। उत्तर प्रदेश से राजनीति से लेकर जिलों के जमीनी मुद्दों तक — हर ज़रूरी जानकारी मिलती है यहां, हमारे UP News सेक्शन में। और Bihar News में पाएं बिहार की असली आवाज — गांव-कस्बों से लेकर पटना तक की ताज़ा रिपोर्ट, कहानी और अपडेट के साथ, सिर्फ Asianet News Hindi पर।

Read more Articles on

Recommended Stories

मुंबई में ट्रांसजेंडर बनकर घर में घुसा शख्स, ‘बुरी नजर’ का बहाना, फिर महिला से रेप, CCTV से खुला राज
हैदराबाद Aston Martin हादसा: सेल्सवुमन की मौत, MP के बेटे पर FIR, फिर गिरफ्तारी क्यों नहीं?