
Iran-US Conflicts: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को खुलेआम चेतावनी देते हुए कहा है कि अगले 10 दिनों में अगर ईरान कोई “सार्थक और अच्छी डील” नहीं करता है तो कई बुरी चीजें हो सकती हैं। वॉशिंगटन में आयोजित एक कार्यक्रम में बोलते हुए ट्रंप ने बताया कि ईरान के प्रतिनिधियों के साथ बातचीत जारी है। उन्होंने इन बातचीतों को सकारात्मक और रचनात्मक बताया, लेकिन यह भी कहा कि ईरान के साथ समझौता करना हमेशा से कठिन रहा है।
ट्रंप ने ईरान के साथ अप्रत्यक्ष बातचीत में शामिल अमेरिकी प्रतिनिधियों स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि दोनों के ईरानी प्रतिनिधियों के साथ अच्छे संबंध हैं और कई अहम बैठकों में प्रगति की कोशिश की गई है। ट्रंप ने कहा, हमें एक अच्छी डील करनी होगी, नहीं तो बुरे नतीजे सामने आएंगे। उन्होंने संकेत दिया कि अगले 10 दिनों में स्थिति साफ हो जाएगी। उनका यह भी कहना था कि संभव है डील हो जाए, लेकिन यदि ऐसा नहीं हुआ तो अमेरिका अगला कदम उठाने के लिए तैयार है।
ट्रंप का यह बयान ऐसे समय में आया है, जब वॉशिंगटन और तेहरान के बीच तनाव बढ़ रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका ने मिडिल ईस्ट में अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ा दी है। इस क्षेत्र में एयरक्राफ्ट कैरियर, फाइटर जेट और अतिरिक्त डिफेंस सिस्टम तैनात किए गए हैं। सैटेलाइट तस्वीरों से यह भी संकेत मिला है कि ईरान अपने न्यूक्लियर और मिसाइल से जुड़े ठिकानों को मजबूत कर रहा है। इसमें सुरंगों के प्रवेश द्वारों को मजबूत करना और संवेदनशील जगहों पर कंक्रीट शील्डिंग लगाना शामिल है। हालांकि, तेहरान लगातार न्यूक्लियर हथियार बनाने के आरोपों से इनकार करता रहा है।
गौरतलब है कि ट्रंप ने अपने पहले कार्यकाल में 2015 के न्यूक्लियर समझौते से अमेरिका को बाहर कर लिया था। तब से वे एक नए और ज्यादा मजबूत समझौते की मांग कर रहे हैं। पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडेन के कार्यकाल में पुराने समझौते को फिर से शुरू करने की कोशिशें की गईं, लेकिन कोई अंतिम समझौता नहीं हो सका। हाल ही में जिनेवा में अमेरिकी और ईरानी अधिकारियों के बीच हुई बातचीत को दोनों पक्षों ने सकारात्मक बताया, लेकिन वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारियों का मानना है कि अब भी कई अहम मुद्दों पर मतभेद बने हुए हैं।
ट्रंप की 10 दिन की समयसीमा यह संकेत देती है कि जल्द ही कोई बड़ा फैसला लिया जा सकता है। उन्होंने दोहराया कि डील अभी भी संभव है, लेकिन अगर बातचीत असफल होती है तो अमेरिका अन्य विकल्पों पर विचार करेगा। फिलहाल किसी तत्काल सैन्य कार्रवाई का आधिकारिक संकेत नहीं दिया गया है। हालांकि, कूटनीतिक दबाव, बढ़ती सैन्य तैनाती और परमाणु कार्यक्रम को लेकर तनाव के कारण US-ईरान संबंध एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय सुर्खियों में हैं।
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