US-Iran War LIVE: 80 हमलों के बाद ईरान का बड़ा दावा, 85 अमेरिकी मिलिट्री बेस तबाह, बढ़ा तनाव

Published : Jul 08, 2026, 12:18 PM IST
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सार

US-Iran War LIVE: अमेरिका के 80+ हमलों के बाद ईरान ने बहरीन और कुवैत में US के 85 सैन्य ठिकानों पर मिसाइल-ड्रोन हमले का दावा किया। ईरान ने MQ-9 ड्रोन मार गिराने की बात भी कही, जिससे तनाव और बढ़ गया।

US Iran War: मिडिल ईस्ट (Middle East) से इस वक्त की सबसे बड़ी और खौफनाक खबर सामने आ रही है, जिसने पूरी दुनिया को तीसरे विश्व युद्ध की दहलीज़ पर लाकर खड़ा कर दिया है। अमेरिका और ईरान के बीच सुलग रही चिंगारी अब एक विनाशकारी और खतरनाक सैन्य टकराव में बदल चुकी है। यूएस सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के आदेश पर अमेरिकी वायुसेना और नौसेना ने मंगलवार तड़के ईरान के भीतर एक साथ 80 से ज्यादा सैन्य ठिकानों पर भीषण बमबारी शुरू कर दी। आसमान से बरसते अमेरिकी बारूद ने ईरान के एयर डिफेंस सिस्टम, कमांड एंड कंट्रोल नेटवर्क, तटीय रडार साइटों और एंटी-शिप मिसाइल नेटवर्कों को पल भर में नेस्तनाबूद कर दिया। इतना ही नहीं, अमेरिकी सेना ने ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) की 60 से ज्यादा लड़ाकू नावों को भी निशाना बनाया है, ताकि समुद्री रास्ते पर उसकी रीढ़ तोड़ी जा सके। ईरान के बंदर अब्बास, सिरिक पोर्ट, केशम द्वीप और खार्ग द्वीप से आ रहे धमाकों के वीडियो और रिपोर्ट रोंगटे खड़े कर देने वाले हैं।

 

 

80 से ज्यादा ठिकानों पर अमेरिकी कार्रवाई, क्या यही बना पलटवार की वजह?

अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार, सैन्य अभियान मंगलवार को शुरू किया गया। अमेरिका का कहना है कि यह कार्रवाई होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजर रहे तीन वाणिज्यिक जहाजों पर हुए कथित हमलों के जवाब में की गई। CENTCOM के मुताबिक, इस अभियान में ईरान के 80 से अधिक सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया। इनमें एयर डिफेंस सिस्टम, कमांड एंड कंट्रोल नेटवर्क, तटीय रडार स्टेशन, एंटी-शिप मिसाइल सिस्टम और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) की कई नौसैनिक क्षमताएं शामिल थीं। अमेरिकी सेना का दावा है कि इन हमलों का उद्देश्य क्षेत्र में वाणिज्यिक जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करना था।

 

 

'इस्लामाबाद समझौता' तार-तार: होर्मुज जलडमरूमध्य का वो सीक्रेट, जिसने भड़काई जंग

आखिर अचानक इस महायुद्ध की शुरुआत कैसे हुई? इसके पीछे एक गहरा और पुराना कूटनीतिक सस्पेंस छिपा हुआ है। पेंटागन के पूर्व अधिकारी और थायर मार्शल इंस्टीट्यूट के प्रोफेसर डेविड डेस रोचेस के अनुसार, इस खूनी खेल की शुरुआत तब हुई जब ईरान ने 'इस्लामाबाद मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग' (MoU) के आर्टिकल 5 का खुला उल्लंघन किया। इस समझौते के तहत अमेरिका को ईरानी तेल की बिक्री पर छूट देनी थी (आर्टिकल 4), तो वहीं ईरान को होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) जैसे अति-महत्वपूर्ण समुद्री रास्ते से गुजरने वाले नागरिक जहाजों को सुरक्षा देनी थी। लेकिन आरोप है कि ईरान ने इस रास्ते से गुजर रहे तीन कमर्शियल जहाजों पर कथित तौर पर हमला कर दिया। अमेरिका ने इसे अपनी संप्रभुता और वैश्विक व्यापार पर सीधा हमला माना और पूर्ण नौसैनिक नाकेबंदी करने के बजाय सीधे ईरान के सैन्य ढांचे पर यह विनाशकारी जवाबी हमला बोल दिया।

 

 

बहरीन से कुवैत तक गूंजे सायरन... ईरान का 'ऑपरेशन 85' और अमेरिकी फिफ्थ फ्लीट पर हमला

अमेरिका के इस भीषण हमले से भड़के ईरान के खातम-अल-अंबिया सेंट्रल हेडक्वार्टर ने इसे "खुला आक्रामक कदम" करार देते हुए अंजाम भुगतने की चेतावनी दी। इसके कुछ ही घंटों बाद, IRGC की नौसेना और एयरोस्पेस फोर्स ने वो कर दिया जिसकी कल्पना शायद वाशिंगटन ने भी नहीं की थी। ईरान ने बहरीन और कुवैत में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाकर एक विशाल और संयुक्त मिसाइल व ड्रोन ऑपरेशन शुरू कर दिया। तेहरान का दावा है कि उसने बहरीन में स्थित अमेरिकी नौसेना के सबसे शक्तिशाली 'फिफ्थ फ्लीट' (Fifth Fleet) के मुख्यालय और कुवैत के 'अली अल-सलेम एयर बेस' समेत कुल 85 अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइलें दाग दी हैं। इस भीषण जवाबी हमले के बाद पूरे बहरीन और कुवैत में युद्ध के सायरन गूंज उठे हैं और वहां मौजूद अमेरिकी सैनिक बंकरों में छिपने को मजबूर हो गए हैं।

आसमान में बिखरा अमेरिकी घमंड: बुशहर की धरती पर गिरा 'MQ-9' रीपर ड्रोन

इस जंग में सस्पेंस और तनाव तब और चरम पर पहुंच गया जब ईरान की प्रतिष्ठित तस्नीम न्यूज़ एजेंसी ने एक बड़ा दावा किया। IRGC के प्रवक्ता हुसैन मोहबी ने आधिकारिक बयान जारी करते हुए बताया कि बुशहर प्रांत के खोरमुज के आसमान में मंडरा रहे अमेरिका के सबसे आधुनिक और बेहद महंगे खोजी ड्रोन 'MQ-9 रीपर' को ईरानी एयर डिफेंस सिस्टम ने हवा में ही इंटरसेप्ट करके मार गिराया है। अमेरिकी ड्रोन का मलबा ईरानी सीमा में गिरने से अमेरिकी खुफिया तंत्र में हड़कंप मच गया है।

अंतिम संस्कार की वो सीक्रेट टाइमिंग: क्या वाकई अमेरिका ने रची थी कोई गहरी साजिश?

इस पूरी क्रूर क्रोनोलॉजी के पीछे ईरान ने एक बेहद हैरान करने वाला और गंभीर आरोप लगाया है। यह भीषण अमेरिकी हमला ठीक उस वक्त हुआ, जब ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार की रस्में चल रही थीं और पूरा देश शोक में डूबा हुआ था। IRGC का सीधा आरोप है कि वाशिंगटन ने जानबूझकर इस टाइमिंग को चुना ताकि दुनिया का ध्यान इस ऐतिहासिक अंतिम संस्कार से भटकाया जा सके और ईरान को संभलने का मौका न मिले। फिलहाल, ईरान ने साफ कर दिया है कि वह होर्मुज जलडमरूमध्य में किसी भी बाहरी दखल को बर्दाश्त नहीं करेगा और तेल टैंकरों के लिए सुरक्षित रास्ता वही होगा जो ईरान तय करेगा। दुनिया भर के शेयर बाज़ार और कच्चे तेल की कीमतें इस वक्त आसमान छू रही हैं, क्योंकि दोनों परमाणु शक्तियों के बीच यह आर-पार की लड़ाई अब एक वैश्विक तबाही का रूप ले सकती है।

 

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