क्या शुरू होने वाला है ज़ीरो आवर? ईरान की धमकी के बाद ट्रंप का बड़ा सैन्य दांव, क्या भड़केगा युद्ध?

Published : Jul 18, 2026, 08:13 AM IST
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सार

मिडिल ईस्ट में फूटेगा बारूद! ईरान की 'ज़ीरो आवर' की खुली धमकी और ट्रंप का इज़राइल में विमानों का सीक्रेट चक्रव्यूह। क्या परमाणु ठिकानों पर हमले के साथ शुरू होगा महाविनाश? जानिए इस तनाव के पीछे का पूरा सच।

वॉशिंगटन/तेहरान: मिडिल ईस्ट एक ऐसे बारूदी ढेर पर खड़ा हो चुका है, जहां कभी भी भयंकर विस्फोट हो सकता है। पिछले महीने हुआ अस्थायी युद्धविराम पूरी तरह टूट चुका है और होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) पर नियंत्रण को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच सीधी जंग शुरू हो गई है। ईरान ने अब खुलेआम "ज़ीरो आवर" यानी हमले के सटीक समय की धमकी दी है, वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान की घेराबंदी के लिए इज़राइल में अपने घातक लड़ाकू और रीफ्यूलिंग विमानों का चक्रव्यूह तैयार कर लिया है।

होर्मुज़ में पांच दिनों से भारी बमबारी: आर्थिक लाइफलाइन पर प्रहार

अमेरिका ने गुरुवार को लगातार पांचवें दिन होर्मुज़ जलडमरूमध्य में ईरानी ठिकानों पर भीषण हवाई हमले किए। अमेरिकी वायुसेना का मुख्य निशाना बंदर अब्बास शहर बना हुआ है, जो ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) की सैन्य गतिविधियों का सबसे बड़ा केंद्र है। एक वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी के अनुसार, इसी बंदर अब्बास के रास्ते होर्मुज़ जलडमरूमध्य तक गोला-बारूद, रसद और अतिरिक्त सैनिक भेजे जा रहे थे, जिसे अमेरिका ने तबाह करना शुरू कर दिया है। अमेरिका की रणनीति साफ है—नेवल नाकेबंदी करके ईरान की आर्थिक लाइफलाइन को पूरी तरह काट दिया जाए।

इज़राइल के एयरबेस पर अमेरिकी विमानों का जमावड़ा: सीक्रेट मिशन लीक!

Axios की एक सनसनीखेज रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका आने वाले दिनों में इज़राइल को दर्जनों रीफ्यूलिंग प्लेन भेजने की तैयारी में है। इज़राइल इस समय ईरान के खिलाफ एक बहुत बड़े मिलिट्री ऑपरेशन की रूपरेखा तैयार कर चुका है। हमले की गंभीरता का अंदाज़ा इस बात से लगाया जा सकता है कि अमेरिका पहले ही इज़राइल के बेन गुरियन एयरपोर्ट पर लगभग 30 मिलिट्री रीफ्यूलिंग एयरक्राफ्ट तैनात कर चुका है, और इतनी ही संख्या में विमान देश के दक्षिणी हिस्से में स्थित रेमन एयरपोर्ट पर भी मौजूद हैं। सुरक्षा कारणों से अमेरिका बेन गुरियन एयरपोर्ट से ही अपने इन रीफ्यूलिंग विमानों को ऑपरेट करेगा, क्योंकि मिडिल ईस्ट के अन्य एयर बेस पर ईरान के मिसाइल हमलों का खतरा बहुत ज़्यादा है।

 

 

क्या बड़े ऑपरेशन की तैयारी में है अमेरिका?

Axios की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका इज़राइल को दर्जनों एयर-टू-एयर रीफ्यूलिंग विमान भेज रहा है। रिपोर्ट में अमेरिकी और इज़राइली अधिकारियों के हवाले से कहा गया है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप आने वाले दिनों में ईरान के खिलाफ बड़े सैन्य अभियान को मंजूरी दे सकते हैं। हालांकि इस संबंध में कोई आधिकारिक अंतिम घोषणा नहीं की गई है। बताया जा रहा है कि अमेरिका अपने रीफ्यूलिंग विमान मुख्य रूप से बेन गुरियन एयरपोर्ट से संचालित करेगा।

सिचुएशन रूम में ट्रंप की आधी रात की बैठक: क्या परमाणु ठिकानों पर होगा हमला?

व्हाइट हाउस के सिचुएशन रूम में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार रात एक बेहद संवेदनशील और हाई-लेवल मीटिंग की। वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के अनुसार, इस बैठक में ट्रंप ने उपराष्ट्रपति जेडी वेंस, रक्षा सचिव पीट हेगसेथ, विदेश मंत्री मार्को रुबियो और ज्वाइंट चीफ्स ऑफ़ स्टाफ़ के चेयरमैन जनरल डैन केन के साथ कई घातक मिलिट्री विकल्पों पर चर्चा की।

इन विकल्पों में ईरान के प्रमुख पावर प्लांट को उड़ाना और उसकी न्यूक्लियर फैसिलिटीज़ पर बमबारी करके उनके यूरेनियम को ज़मीन के और नीचे दफन कर देना शामिल है। इसके अलावा 'पिकैक्स माउंटेन' पर भी हमले की योजना है, जो ईरान का एक बेहद मज़बूत अंडरग्राउंड बेस है और जिसका सीधा संबंध उनके परमाणु कार्यक्रम से माना जाता है। ट्रंप ईरान को इस हद तक झुकाना चाहते हैं कि वह होर्मुज़ जलडमरूमध्य को खोलने और परमाणु मुद्दे पर अमेरिका की सभी शर्तों को मानने पर मजबूर हो जाए।

ईरान का पलटवार: "हमारे ड्रोन ने तबाह किए अमेरिकी फाइटर जेट्स!"

इस बीच ईरान ने भी शांत बैठने से इनकार कर दिया है। ईरान का दावा है कि उसने जॉर्डन में तैनात अमेरिकी सेना के कई विमानों को अपनी बैलिस्टिक मिसाइलों और सुसाइड ड्रोनों से नष्ट कर दिया है। यह हमला अमेरिका द्वारा ईरान में रात भर की गई बमबारी के जवाब में किया गया, जिसमें कम से कम आठ लोगों की मौत हो गई थी।

IRGC ने आधिकारिक बयान जारी कर कहा कि उन्होंने अमेरिका के कई रीफ्यूलिंग विमानों और फाइटर जेट्स को मलबे में तब्दील कर दिया है। हालांकि, ईरान के दावों में कुछ कमियां भी दिखीं, जब उन्होंने सीरिया में एक अमेरिकी बेस को निशाना बनाने का दावा किया, जिसे अमेरिकी सेना महीनों पहले ही खाली कर चुकी थी। फिलहाल ईरान इज़राइल पर सीधा बड़ा हमला करने से कतरा रहा है, क्योंकि उसे डर है कि इससे बेहद विनाशकारी जवाबी कार्रवाई शुरू हो सकती है।

"इंतज़ार करो और देखो"-IRGC की अंतिम चेतावनी

ईरान के सरकारी टेलीविजन पर आए एक बयान ने पूरी दुनिया के बाजारों और सुरक्षा एजेंसियों में खलबली मचा दी है। IRGC नेवी कमांड ने कहा है कि उनकी नेवल यूनिट्स मिडिल ईस्ट में गश्त कर रहे हर एक अमेरिकी सैनिक और उनके मिलिट्री इक्विपमेंट पर गिद्ध जैसी नज़र रखे हुए हैं। ईरानी सेना ने कहा, "अमेरिकी सेना इस क्षेत्र में CENTCOM नेवी यूनिट्स के खिलाफ ईरान के ऑपरेशन के 'ज़ीरो आवर' के बेहद करीब पहुंच रही है।" उन्होंने बेहद डरावने लहज़े में अपनी चेतावनी को खत्म करते हुए कहा-"इंतज़ार करें और देखें"। अब पूरी दुनिया की नज़रें इस बात पर टिकी हैं कि क्या यह तनाव तीसरे विश्व युद्ध की चिंगारी बनेगा या कूटनीति के ज़रिए इस महाविनाश को टाला जा सकेगा।

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