ग्लोबल ऑयल वॉर में नया मोड़! US छूट से रूस को फायदा, क्या यूक्रेन पर पड़ेगा असर?

Published : Apr 18, 2026, 08:57 AM ISTUpdated : Apr 18, 2026, 08:58 AM IST

ईरान युद्ध के बीच अमेरिका ने रूसी तेल पर 1 महीने की छूट दी, जिससे वैश्विक तेल कीमतों में राहत की उम्मीद जगी। Donald Trump प्रशासन का यह कदम ऊर्जा संकट कम करने के लिए है, लेकिन इससे रूस को आर्थिक फायदा और यूक्रेन युद्ध पर असर की आशंका भी बढ़ी। 

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Russia Oil Sanctions Relief: ईरान से जुड़े बढ़ते तनाव और ऊर्जा संकट के बीच, डोनॉल्ड ट्रंप (Donald Trump) प्रशासन ने एक चौंकाने वाला फैसला लेते हुए रूसी तेल की खरीद पर लगी पाबंदियों में एक महीने की छूट दे दी है। यह छूट खास तौर पर उन तेल खेपों पर लागू होगी जो पहले से समुद्र में हैं। यानि भारत समेत अन्य देश 16 मई 2026 तक रूसी तेल खरीद सकते हैं। इस कदम ने वैश्विक बाजारों में हलचल मचा दी है, क्योंकि यह अमेरिका की पहले की सख्त नीति के बिल्कुल उलट दिखाई देता है।

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तेल की कीमतों में उछाल ने बढ़ाया दबाव

इस फैसले की असली वजह कहीं न कहीं बढ़ती तेल कीमतें हैं। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) में तनाव और जहाज़रानी पर असर के कारण वैश्विक सप्लाई बुरी तरह प्रभावित हुई है। नतीजतन, कच्चे तेल की कीमतों में तेज़ उछाल आया है, जिससे ऊर्जा आयात पर निर्भर देशों की अर्थव्यवस्था पर भारी दबाव पड़ा है।

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ट्रेजरी का बयान और फिर यू-टर्न

दिलचस्प बात यह है कि कुछ ही दिन पहले अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट (Scott Bessent) ने साफ कहा था कि ऐसी किसी छूट को आगे नहीं बढ़ाया जाएगा। लेकिन अब ट्रेजरी विभाग द्वारा जारी नए लाइसेंस के तहत, 16 मई तक रूसी तेल की सीमित खरीद की अनुमति दे दी गई है। यह अचानक बदलाव बताता है कि हालात कितनी तेजी से बदल रहे हैं।

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होर्मुज़ संकट: असली ट्रिगर पॉइंट

ईरान-इज़रायल तनाव के बीच तेहरान ने होर्मुज़ जलडमरूमध्य को प्रभावी रूप से बाधित कर दिया, जो दुनिया के लगभग 20% तेल ट्रांसपोर्ट का मुख्य मार्ग है। इस कदम ने वैश्विक ऊर्जा सप्लाई को झटका दिया और बाजार में अनिश्चितता बढ़ा दी। यही वह बिंदु था जिसने अमेरिका को अपनी रणनीति पर पुनर्विचार करने के लिए मजबूर किया।

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अमेरिका के अंदर बढ़ता राजनीतिक दबाव

तेल की कीमतों में उछाल का असर सिर्फ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नहीं, बल्कि अमेरिका के भीतर भी दिख रहा है। पेट्रोल की कीमतें बढ़ने से आम नागरिकों पर आर्थिक बोझ बढ़ा है, जो आने वाले चुनावों से पहले एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन सकता है। ऐसे में यह छूट सरकार के लिए एक डैमेज कंट्रोल मूव के तौर पर देखी जा रही है।

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रूस-यूक्रेन समीकरण पर खतरा

हालांकि इस फैसले के अपने जोखिम भी हैं। 2022 में शुरू हुए रूस का यूक्रेन पर आक्रमण (Russian invasion of Ukraine) के बाद पश्चिमी देशों ने रूस की तेल आय को सीमित करने की कोशिश की थी। अब यह छूट उस रणनीति को कमजोर कर सकती है, जिससे रूस को युद्ध के लिए जरूरी फंडिंग मिलती रह सकती है।

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G7 की चेतावनी और वैश्विक चिंता

हाल ही में ग्रुप ऑफ़ सेवेन (G7) (Group of Seven) की बैठक में फ्रांस के वित्त मंत्री रोलैंड लेस्क्योर (Roland Lescure) ने चेतावनी दी कि ईरान संकट का फायदा रूस को नहीं मिलना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि यूक्रेन को इस संघर्ष का “अनायास नुकसान” नहीं झेलना चाहिए।

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एक अस्थायी राहत या नई रणनीति?

फिलहाल यह छूट केवल एक महीने के लिए है, लेकिन इसके दूरगामी असर हो सकते हैं। क्या यह सिर्फ अस्थायी राहत है या अमेरिका की बदलती रणनीति का संकेत-यह आने वाले हफ्तों में साफ होगा। दुनिया की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि ऊर्जा, राजनीति और युद्ध के इस जटिल समीकरण में अगला कदम क्या होगा।

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