
US Iran Sanctions: अमेरिका ने ईरान के खिलाफ आर्थिक दबाव बढ़ाते हुए भारत की चार कंपनियों और तीन भारतीय नागरिकों पर प्रतिबंध लगाया है। वॉशिंगटन का आरोप है कि ये कंपनियां ईरान के पेट्रोलियम और पेट्रोकेमिकल उत्पादों के कारोबार से जुड़ी गतिविधियों में शामिल थीं। यह कार्रवाई अमेरिकी प्रशासन के नए ‘Operation Economic Outcast’ अभियान का हिस्सा है, जिसके तहत ईरान के वित्तीय और कारोबारी नेटवर्क पर दबाव बढ़ाया जा रहा है। अमेरिकी विदेश विभाग के मुताबिक, इस व्यापक कार्रवाई में ईरान की सैन्य गतिविधियों, खरीद नेटवर्क और पेट्रोलियम-पेट्रोकेमिकल कारोबार से कथित तौर पर जुड़े करीब 60 संस्थाओं, व्यक्तियों और जहाजों को निशाना बनाया गया है।
अमेरिकी विदेश विभाग के दस्तावेजों के अनुसार, इन भारतीय कंपनियों पर आरोप है कि उन्होंने पिछले कुछ वर्षों में करोड़ों डॉलर के ईरानी पेट्रोलियम और पेट्रोकेमिकल उत्पादों का आयात और परिवहन किया है।
BREAKING: 🇺🇸🇮🇷 U.S. Secretary of the Treasury, Scott Bessent, officially announced the start of ‘Operation Economic Outcast’ against Iran
This marks the beginning of an economic isolation campaign that includes sanctions, secondary sanctions, and cutting off all economic… pic.twitter.com/WkBAfrvxKZ— Megatron (@Megatron_ron) August 24, 2026
अमेरिकी विदेश विभाग के अनुसार, भारत में काम करने वाली कस्टम ब्रोकर कंपनी Porties Partners ने भारत में ईरानी पेट्रोकेमिकल उत्पादों की कई खेपों में कथित तौर पर मदद की। वॉशिंगटन के मुताबिक, Sadashiva Overseas ने फरवरी 2024 से जून 2025 के बीच लगभग 69 मिलियन डॉलर मूल्य के ईरानी पेट्रोलियम उत्पादों का आयात किया। इसी तरह PP Softech पर जनवरी 2024 से जून 2025 के बीच करीब 25 मिलियन डॉलर के ईरानी पेट्रोलियम उत्पादों के आयात में शामिल होने का आरोप लगाया गया है। वहीं, Prakrateej Infra Impex India पर मई 2023 से फरवरी 2026 के बीच लगभग 25 मिलियन डॉलर के ईरानी पेट्रोलियम उत्पादों के आयात में शामिल होने का आरोप लगाया गया।
अमेरिका का कहना है कि इन प्रतिबंधों का मुख्य उद्देश्य ईरानी सरकार के उन राजस्व स्रोतों को रोकना है, जिनका इस्तेमाल वॉशिंगटन के अनुसार सैन्य गतिविधियों, क्षेत्रीय हमलों और विदेशों में आतंकवाद के समर्थन के लिए किया जाता है। अमेरिकी विदेश विभाग ने स्पष्ट किया है कि वह ईरान के पेट्रोलियम और पेट्रोकेमिकल कारोबार से आने वाली आय पर दबाव बढ़ाना चाहता है। इसी रणनीति के तहत ईरान से जुड़े कारोबारी नेटवर्क की अंतरराष्ट्रीय कड़ियों को निशाना बनाया जा रहा है।
अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी Scott Bessent ने सोमवार को नए अभियान को ‘Operation Economic Outcast’ नाम दिया। इस अभियान का घोषित उद्देश्य दुनिया भर में ईरान के वित्तीय संपर्कों को कमजोर करना और उसके लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कारोबार करना मुश्किल बनाना है। अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि वह ईरानी सरकार की आर्थिक गतिविधियों को समर्थन देने वाली “लाइफलाइन” को खत्म करना चाहता है। इसके लिए ईरानी तेल, पेट्रोलियम उत्पादों और पेट्रोकेमिकल्स के कारोबार से जुड़े नेटवर्क पर कार्रवाई की जा रही है।
अमेरिकी कार्रवाई सिर्फ कंपनियों और व्यक्तियों तक सीमित नहीं है। वॉशिंगटन ने ईरान के पेट्रोलियम शिपिंग नेटवर्क को भी निशाना बनाया है। इस नेटवर्क में ईरानी क्रूड, पेट्रोलियम उत्पादों और पेट्रोकेमिकल्स के परिवहन में कथित तौर पर शामिल जहाजों तथा अंतरराष्ट्रीय बिचौलियों को शामिल किया गया है। इससे ईरान के तेल कारोबार की सप्लाई चेन पर दबाव बढ़ाने की अमेरिकी रणनीति साफ दिखाई देती है।
भारत की चार कंपनियों और तीन नागरिकों पर लगाए गए अमेरिकी प्रतिबंध ऐसे समय आए हैं, जब अमेरिका ईरान से जुड़े कारोबार पर सेकेंडरी सैंक्शंस का दायरा बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। वॉशिंगटन ने दुनिया भर की सरकारों और कंपनियों को प्रतिबंधित ईरानी संस्थाओं के साथ कारोबार करने के जोखिम को लेकर चेतावनी भी दी है। ऐसे में भारतीय कंपनियों पर कार्रवाई का असर सिर्फ संबंधित कारोबार तक सीमित नहीं रह सकता, बल्कि ईरान से जुड़े अंतरराष्ट्रीय व्यापार में शामिल अन्य कंपनियां भी अपने लेन-देन की समीक्षा कर सकती हैं।
अमेरिका की इस कार्रवाई ने एक बार फिर भारत-अमेरिका संबंधों के साथ-साथ भारत के ईरान के साथ कारोबारी रिश्तों को भी चर्चा में ला दिया है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि वॉशिंगटन के ‘Operation Economic Outcast’ का अगला निशाना कौन बनता है और क्या अमेरिकी प्रतिबंधों का दायरा आने वाले दिनों में और बढ़ाया जाएगा।
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