क्या है US Operation Economic Outcast? 4 भारतीय कंपनियां, 3 नागरिक निशाने पर, ईरान से कारोबार बैन

Published : Aug 26, 2026, 10:52 AM IST
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सार

अमेरिका का खौफनाक 'ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट' और निशाने पर आईं 4 भारतीय कंपनियां और 3 नागरिक! करोड़ों डॉलर के तेल व्यापार का आरोप। आखिर Trump प्रशासन ने ‘Economic Outcast’ से क्यों बढ़ाया दबाव?

US Iran Sanctions: अमेरिका ने ईरान के खिलाफ आर्थिक दबाव बढ़ाते हुए भारत की चार कंपनियों और तीन भारतीय नागरिकों पर प्रतिबंध लगाया है। वॉशिंगटन का आरोप है कि ये कंपनियां ईरान के पेट्रोलियम और पेट्रोकेमिकल उत्पादों के कारोबार से जुड़ी गतिविधियों में शामिल थीं। यह कार्रवाई अमेरिकी प्रशासन के नए ‘Operation Economic Outcast’ अभियान का हिस्सा है, जिसके तहत ईरान के वित्तीय और कारोबारी नेटवर्क पर दबाव बढ़ाया जा रहा है। अमेरिकी विदेश विभाग के मुताबिक, इस व्यापक कार्रवाई में ईरान की सैन्य गतिविधियों, खरीद नेटवर्क और पेट्रोलियम-पेट्रोकेमिकल कारोबार से कथित तौर पर जुड़े करीब 60 संस्थाओं, व्यक्तियों और जहाजों को निशाना बनाया गया है।

करोड़ों डॉलर का संदिग्ध कारोबार: अमेरिका के रडार पर कैसे आई भारतीय संस्थाएं?

अमेरिकी विदेश विभाग के दस्तावेजों के अनुसार, इन भारतीय कंपनियों पर आरोप है कि उन्होंने पिछले कुछ वर्षों में करोड़ों डॉलर के ईरानी पेट्रोलियम और पेट्रोकेमिकल उत्पादों का आयात और परिवहन किया है।

  • पोर्टीज़ पार्टनर्स LLP (Portease Partners LLP): कस्टम ब्रोकर के रूप में कार्यरत इस कंपनी पर भारत में ईरानी पेट्रोकेमिकल्स के कई शिपमेंट को सुविधाजनक बनाने का आरोप है।
  • सदाशिवा ओवरसीज लिमिटेड (Sadashiva Overseas Limited): आरोप है कि इस कंपनी ने फरवरी 2024 से जून 2025 के बीच लगभग $69 मिलियन (करीब 575 करोड़ रुपये) के ईरानी पेट्रोलियम उत्पाद इंपोर्ट किए।
  • PP सॉफ्टटेक प्राइवेट लिमिटेड (PP Softtech Pvt Ltd): इस फर्म ने जनवरी 2024 से जून 2025 तक करीब $25 मिलियन का ईरानी तेल आयात किया।
  • प्राकृतीज इंफ्रा इम्पेक्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड (Prakrutees Infra Impex): कंपनी पर मई 2023 से फरवरी 2026 के बीच लगभग $25 मिलियन के ईरानी तेल लेन-देन का आरोप लगा है। इसके अलावा पोर्टीज़ पार्टनर्स के सहयोगी इंद्रिस्मिया अशरफमिया शेख व हरीश रामचंद्र रंगी और PP सॉफ्टटेक के डायरेक्टर प्रशांत गर्ग पर व्यक्तिगत रूप से प्रतिबंध लगाए गए हैं।

करोड़ों डॉलर के ईरानी तेल कारोबार का आरोप

अमेरिकी विदेश विभाग के अनुसार, भारत में काम करने वाली कस्टम ब्रोकर कंपनी Porties Partners ने भारत में ईरानी पेट्रोकेमिकल उत्पादों की कई खेपों में कथित तौर पर मदद की। वॉशिंगटन के मुताबिक, Sadashiva Overseas ने फरवरी 2024 से जून 2025 के बीच लगभग 69 मिलियन डॉलर मूल्य के ईरानी पेट्रोलियम उत्पादों का आयात किया। इसी तरह PP Softech पर जनवरी 2024 से जून 2025 के बीच करीब 25 मिलियन डॉलर के ईरानी पेट्रोलियम उत्पादों के आयात में शामिल होने का आरोप लगाया गया है। वहीं, Prakrateej Infra Impex India पर मई 2023 से फरवरी 2026 के बीच लगभग 25 मिलियन डॉलर के ईरानी पेट्रोलियम उत्पादों के आयात में शामिल होने का आरोप लगाया गया।

आखिर क्यों अमेरिका ने उठाया इतना बड़ा कदम?

अमेरिका का कहना है कि इन प्रतिबंधों का मुख्य उद्देश्य ईरानी सरकार के उन राजस्व स्रोतों को रोकना है, जिनका इस्तेमाल वॉशिंगटन के अनुसार सैन्य गतिविधियों, क्षेत्रीय हमलों और विदेशों में आतंकवाद के समर्थन के लिए किया जाता है। अमेरिकी विदेश विभाग ने स्पष्ट किया है कि वह ईरान के पेट्रोलियम और पेट्रोकेमिकल कारोबार से आने वाली आय पर दबाव बढ़ाना चाहता है। इसी रणनीति के तहत ईरान से जुड़े कारोबारी नेटवर्क की अंतरराष्ट्रीय कड़ियों को निशाना बनाया जा रहा है।

‘Operation Economic Outcast’ क्या है?

अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी Scott Bessent ने सोमवार को नए अभियान को ‘Operation Economic Outcast’ नाम दिया। इस अभियान का घोषित उद्देश्य दुनिया भर में ईरान के वित्तीय संपर्कों को कमजोर करना और उसके लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कारोबार करना मुश्किल बनाना है। अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि वह ईरानी सरकार की आर्थिक गतिविधियों को समर्थन देने वाली “लाइफलाइन” को खत्म करना चाहता है। इसके लिए ईरानी तेल, पेट्रोलियम उत्पादों और पेट्रोकेमिकल्स के कारोबार से जुड़े नेटवर्क पर कार्रवाई की जा रही है।

ईरानी तेल पहुंचाने वाले जहाज भी निशाने पर

अमेरिकी कार्रवाई सिर्फ कंपनियों और व्यक्तियों तक सीमित नहीं है। वॉशिंगटन ने ईरान के पेट्रोलियम शिपिंग नेटवर्क को भी निशाना बनाया है। इस नेटवर्क में ईरानी क्रूड, पेट्रोलियम उत्पादों और पेट्रोकेमिकल्स के परिवहन में कथित तौर पर शामिल जहाजों तथा अंतरराष्ट्रीय बिचौलियों को शामिल किया गया है। इससे ईरान के तेल कारोबार की सप्लाई चेन पर दबाव बढ़ाने की अमेरिकी रणनीति साफ दिखाई देती है।

भारत के कारोबार पर क्या हो सकता है असर?

भारत की चार कंपनियों और तीन नागरिकों पर लगाए गए अमेरिकी प्रतिबंध ऐसे समय आए हैं, जब अमेरिका ईरान से जुड़े कारोबार पर सेकेंडरी सैंक्शंस का दायरा बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। वॉशिंगटन ने दुनिया भर की सरकारों और कंपनियों को प्रतिबंधित ईरानी संस्थाओं के साथ कारोबार करने के जोखिम को लेकर चेतावनी भी दी है। ऐसे में भारतीय कंपनियों पर कार्रवाई का असर सिर्फ संबंधित कारोबार तक सीमित नहीं रह सकता, बल्कि ईरान से जुड़े अंतरराष्ट्रीय व्यापार में शामिल अन्य कंपनियां भी अपने लेन-देन की समीक्षा कर सकती हैं।

अमेरिका की इस कार्रवाई ने एक बार फिर भारत-अमेरिका संबंधों के साथ-साथ भारत के ईरान के साथ कारोबारी रिश्तों को भी चर्चा में ला दिया है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि वॉशिंगटन के ‘Operation Economic Outcast’ का अगला निशाना कौन बनता है और क्या अमेरिकी प्रतिबंधों का दायरा आने वाले दिनों में और बढ़ाया जाएगा।

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