
अमेरिकी राजनीति के प्रमुख रिपब्लिकन नेताओं में शामिल सीनेटर लिंडसे ग्राहम का शनिवार (11 जुलाई 2026) को 71 वर्ष की आयु में निधन हो गया। वह दक्षिण कैरोलिना से लंबे समय तक सीनेटर रहे और विदेश नीति, राष्ट्रीय सुरक्षा तथा रक्षा मामलों पर अपने स्पष्ट और अक्सर विवादित बयानों के लिए जाने जाते थे। शुरुआती दौर में वह डोनाल्ड ट्रंप के आलोचक रहे, लेकिन बाद में उनके सबसे करीबी राजनीतिक सहयोगियों में शामिल हो गए।
लिंडसे ग्राहम ने रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान भारत और चीन की रूस से ऊर्जा खरीद को लेकर कई बार कड़ी प्रतिक्रिया दी थी। उन्होंने रूस से सस्ता तेल खरीदने वाले देशों पर 500 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने के प्रस्तावित ग्राहम-ब्लूमेंथल विधेयक का समर्थन किया था।
उन्होंने सार्वजनिक रूप से कहा था कि यदि भारत जैसे देश रूस से सस्ता तेल खरीदकर उसकी अर्थव्यवस्था को समर्थन देते रहे, तो अमेरिका कड़े आर्थिक कदम उठा सकता है। जून 2025 में भी उन्होंने सोशल मीडिया पर भारत और चीन का नाम लेते हुए रूस की "युद्ध मशीन" को आर्थिक सहयोग देने का आरोप लगाया था। फरवरी 2026 में उन्होंने भारत पर लगाए गए अमेरिकी टैरिफ का भी समर्थन किया था।
भारत पर तीखे बयान देने वाले ग्राहम पाकिस्तान के प्रति भी बेहद सख्त रुख रखते थे। उन्होंने कई मौकों पर कहा था कि उन्हें पाकिस्तान की नीतियों पर भरोसा नहीं है। ईरान संकट के दौरान पाकिस्तान की संभावित मध्यस्थता पर भी उन्होंने सवाल उठाए और आरोप लगाया था कि अमेरिकी कार्रवाई के दौरान पाकिस्तान ने कथित तौर पर ईरानी सैन्य विमानों को अपने ठिकानों पर जगह दी। उन्होंने पाकिस्तान के रक्षा मंत्री के कुछ बयानों की भी आलोचना की थी और पश्चिम एशिया की सुरक्षा व्यवस्था में पाकिस्तान की भूमिका पर संदेह जताया था।
लिंडसे ग्राहम ने डोनाल्ड ट्रंप की कई नीतियों का खुलकर समर्थन किया। ग्रीनलैंड को लेकर ट्रंप की योजना हो या ईरान की नेतृत्व व्यवस्था पर टिप्पणी, ग्राहम अक्सर अपने बेबाक बयानों से सुर्खियों में रहे।
उन्होंने ईरान के तत्कालीन सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की कड़ी आलोचना करते हुए उन्हें तानाशाह बताया था और उनके नेतृत्व को हटाने की बात भी कही थी। इन बयानों को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर व्यापक चर्चा हुई थी।
लिंडसे ग्राहम का निधन अमेरिकी राजनीति के लिए एक महत्वपूर्ण क्षति माना जा रहा है। विदेश नीति से जुड़े मुद्दों पर उनकी स्पष्ट राय और आक्रामक राजनीतिक शैली उन्हें अमेरिकी सीनेट के सबसे चर्चित नेताओं में शामिल करती थी। उनके निधन के बाद विभिन्न राजनीतिक नेताओं ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की है।
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