
योगी सरकार ने वर्ष 2026-27 के बजट में स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने की दिशा में एक बार फिर अपनी प्राथमिकता स्पष्ट की हैं। योगी सरकार ने चिकित्सा, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के लिए 37,956 करोड़ रुपये की बड़ी धनराशि आवंटित की है, जो कि वर्ष 2025-26 की तुलना में लगभग 15 प्रतिशत अधिक है। यह बजट न केवल स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करेगा, बल्कि मातृ-शिशु स्वास्थ्य, टीकाकरण, मानसिक स्वास्थ्य, रोग नियंत्रण और आयुष्मान भारत जैसी जनकल्याणकारी योजनाओं को नई गति देगा।
प्रदेश में जननी शिशु सुरक्षा कार्यक्रम प्रभावी रूप से लागू है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य प्रसव के लिए आने वाली गर्भवती महिलाओं को गारंटीड कैशलेस डिलीवरी सेवाएं प्रदान करना है, जिससे गरीब और जरूरतमंद महिलाओं को सुरक्षित प्रसव की सुविधा मिल सके। मातृ एवं शिशु मृत्यु दर को कम करना योगी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। बजट में इसे और प्रभावी बनाने का प्रावधान किया गया है। राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत प्रदेश के प्रत्येक ब्लॉक में दो मेडिकल टीमें तैनात की गई हैं। ये टीमें आंगनवाड़ी केंद्रों और स्कूलों में जाकर बच्चों का नियमित स्वास्थ्य परीक्षण कर रही हैं। इससे जन्मजात बीमारियों, कुपोषण और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं की समय पर पहचान संभव हो पा रही है। सरकार का लक्ष्य है कि बच्चों को प्रारंभिक अवस्था में ही बेहतर इलाज मिल सके, ताकि उनका भविष्य सुरक्षित और स्वस्थ हो। टीकाकरण के क्षेत्र में भी उत्तर प्रदेश ने उल्लेखनीय प्रगति की है। प्रदेश के समस्त जनपदों में 8 दिसंबर 2024 से संचालित पल्स पोलियो अभियान के तहत अब तक 3 करोड़ 28 लाख 44 हजार 929 बच्चों को पोलियो की खुराक पिलाई जा चुकी है। इसके साथ ही जापानी इंसेफेलाइटिस से बच्चों को बचाने के लिए प्रदेश के संवेदनशील 42 जनपदों में टीकाकरण कार्यक्रम को नियमित रूप से संचालित किया जा रहा है। मुख्यमंत्री योगी के निर्देश पर पूर्वांचल और तराई क्षेत्रों में विशेष निगरानी और स्वास्थ्य शिविरों का आयोजन भी किया जा रहा है।
गरीब और मध्यम वर्ग के परिवारों को महंगे इलाज से राहत देने के उद्देश्य से आयुष्मान भारत-मुख्यमंत्री जन आरोग्य योजना को बजट में और मजबूती प्रदान की गयी है। योजना के तहत प्रदेश में 49.22 लाख लाभार्थी परिवारों को सूचीबद्ध किया गया है। योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए 500 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई है। योगी सरकार मानसिक स्वास्थ्य को लेकर भी ठोस कदम उठाए हैं। उत्तर प्रदेश के सभी 75 जनपदों में राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत जिला मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम संचालित किया जा रहा है। इसके माध्यम से मानसिक रोगों की पहचान, परामर्श और उपचार की सुविधाएं जिला स्तर पर उपलब्ध कराई जा रही हैं। इससे समाज में मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ रही है और मरीजों को समय पर सहायता मिल रही है। इसे और प्रभावी बनाने के लिए बजट में प्रावधान किया गया है। संक्रामक रोगों की निगरानी के लिए एकीकृत डिजीज सर्विलांस पोर्टल को भी सुदृढ़ किया गया है। इस पोर्टल पर जनपद स्तर से सरकारी और निजी क्षेत्र की चिकित्सा इकाइयों द्वारा नियमित रूप से 16 संक्रामक रोगों, 6 वैक्सीन प्रिवेंटेबल डिजीज तथा कोविड-19 की रिपोर्टिंग की जा रही है। इससे किसी भी संभावित महामारी या बीमारी के प्रकोप पर तुरंत नियंत्रण संभव हो पा रहा है।
ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार के लिए राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन के लिए लगभग 8,641 करोड़ रुपये की धनराशि का प्रावधान किया गया है। वहीं, आयुष्मान भारत नेशनल हेल्थ प्रोटेक्शन मिशन के लिए 2,000 करोड़ रुपये की व्यवस्था प्रस्तावित की गई है। इन प्रावधानों से ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच और गुणवत्ता दोनों में सुधार आएगा।
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