
लखनऊ। प्रदेश सरकार के बजट 2026-27 में औद्योगिक क्लस्टरों के विस्तार, लॉजिस्टिक्स नेटवर्क को मजबूत करने और डेटा सेंटर इकोसिस्टम के विकास को खास प्राथमिकता दी गई है। यह कदम बड़े स्तर पर रोजगार सृजन की स्पष्ट रणनीति को दर्शाता है। अवस्थापना और औद्योगिक विकास योजनाओं के लिए ₹27,103 करोड़ का प्रावधान किया गया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 13 प्रतिशत अधिक है। इससे साफ संकेत मिलता है कि सरकार इंफ्रास्ट्रक्चर आधारित औद्योगिक विस्तार को रोजगार वृद्धि का मुख्य आधार बना रही है।
बजट में किए गए ये निवेश निर्माण कार्य, उत्पादन, लॉजिस्टिक्स संचालन और डिजिटल सेवाओं तक रोजगार की बहुस्तरीय श्रृंखला तैयार करने का हिस्सा हैं। औद्योगिक क्लस्टर, लॉजिस्टिक्स हब और डेटा सेंटर के माध्यम से लाखों प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार अवसर सृजित करने का लक्ष्य रखा गया है, जिससे विकास और रोजगार दोनों को एक साथ गति मिल सके।
औद्योगिक क्लस्टर मॉडल की सबसे बड़ी खासियत इसकी बहुस्तरीय रोजगार क्षमता है। जब किसी क्षेत्र में एक प्रमुख उद्योग स्थापित होता है, तो उसके आसपास कच्चे माल की आपूर्ति, पैकेजिंग, मशीनरी मेंटेनेंस, परिवहन, वेयरहाउसिंग और सेवा क्षेत्र की कई सहायक इकाइयां विकसित होने लगती हैं। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के कई अवसर पैदा होते हैं।
बजट 2026-27 में एमएसएमई सेक्टर के लिए ₹3,822 करोड़ का प्रावधान किया गया है, जो लगभग 19 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है। वहीं वस्त्रोद्योग के लिए ₹5,041 करोड़ का बजट तय किया गया है। यह केवल वित्तीय सहायता नहीं, बल्कि रोजगार बढ़ाने की दीर्घकालिक रणनीति का हिस्सा है। वस्त्रोद्योग क्षेत्र में वर्ष 2026-27 के लिए 30,000 नए रोजगार सृजन का लक्ष्य रखा गया है, जिससे यह क्षेत्र प्रत्यक्ष रोजगार का प्रमुख केंद्र बन सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, क्लस्टर आधारित औद्योगिक विकास में हर एक प्रत्यक्ष रोजगार के साथ कई अप्रत्यक्ष रोजगार भी उत्पन्न होते हैं, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलती है। इसी दिशा में सरदार वल्लभभाई पटेल एम्प्लॉयमेंट एंड इंडस्ट्रियल जोन के लिए ₹575 करोड़ और निवेश प्रोत्साहन नीति के लिए ₹1,000 करोड़ का प्रावधान बड़े निवेशकों को आकर्षित करने की पहल है। इससे स्थायी और कौशल आधारित रोजगार के अवसर बढ़ने की उम्मीद है।
बजट में एक्सप्रेसवे और औद्योगिक कनेक्टिविटी परियोजनाओं पर बढ़ा निवेश केवल यातायात सुविधा तक सीमित नहीं है। इसका उद्देश्य प्रदेश को राष्ट्रीय लॉजिस्टिक्स नेटवर्क में मजबूत स्थान दिलाना है। जेवर एयरपोर्ट को गंगा एक्सप्रेसवे से जोड़ने के लिए ₹1100 करोड़, आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे लिंक हेतु ₹1250 करोड़ और विन्ध्य एक्सप्रेसवे सहित अन्य परियोजनाओं के लिए ₹500-500 करोड़ का प्रावधान किया गया है।
बेहतर कनेक्टिविटी से माल परिवहन की लागत और समय दोनों कम होंगे। जहां सड़क और परिवहन सुविधाएं बेहतर होती हैं, वहां वेयरहाउस, ट्रांसपोर्ट कंपनियां, कोल्ड स्टोरेज और वितरण केंद्र तेजी से विकसित होते हैं। यह क्षेत्र श्रमप्रधान होने के कारण बड़ी संख्या में रोजगार पैदा करता है। ड्राइवर, वेयरहाउस ऑपरेटर, लोडिंग-अनलोडिंग स्टाफ, सप्लाई चेन मैनेजर, डेटा ऑपरेटर और आईटी सपोर्ट कर्मियों के लिए नए अवसर बनते हैं।
इसके अलावा छोटे ट्रांसपोर्टर, पैकेजिंग यूनिट, मरम्मत कार्यशालाएं और स्थानीय सेवा प्रदाता भी इस आर्थिक गतिविधि से जुड़ते हैं, जिससे अप्रत्यक्ष रोजगार की लंबी श्रृंखला तैयार होती है।
आईटी और इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र के लिए बजट में ₹2,059 करोड़ का प्रावधान किया गया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 76 प्रतिशत अधिक है। इससे साफ है कि प्रदेश की अर्थव्यवस्था को तेजी से डिजिटल और तकनीक आधारित दिशा दी जा रही है।
‘उत्तर प्रदेश एआई मिशन’ के लिए ₹225 करोड़ और साइबर सिक्योरिटी ऑपरेशन सेंटर के लिए ₹95.16 करोड़ की व्यवस्था की गई है। यह केवल तकनीकी ढांचे को मजबूत करने का प्रयास नहीं, बल्कि युवाओं के लिए उच्च कौशल आधारित रोजगार अवसर तैयार करने की पहल है।
प्रदेश में पांच गीगावॉट क्षमता वाले पांच डेटा सेंटर क्लस्टर विकसित करने की योजना बनाई गई है, जिसके लिए ₹100 करोड़ का शुरुआती बजट प्रस्तावित है। डेटा सेंटर स्थापित होने से आईटी इंजीनियर, नेटवर्क मैनेजर, क्लाउड आर्किटेक्ट, साइबर सिक्योरिटी विशेषज्ञ, सिस्टम एडमिनिस्ट्रेटर और तकनीकी सपोर्ट स्टाफ जैसे पेशेवरों की मांग बढ़ेगी।
इसके अलावा डेटा सेंटर संचालन के लिए बिजली आपूर्ति, कूलिंग सिस्टम, सुरक्षा, फायर सेफ्टी और मेंटेनेंस सेवाओं की जरूरत होगी, जिससे तकनीकी और सहायक क्षेत्रों में भी रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
इंफ्रास्ट्रक्चर पर किया गया निवेश केवल सड़क, भवन या औद्योगिक परिसर तक सीमित नहीं रहता, बल्कि यह रोजगार की पूरी श्रृंखला को जन्म देता है। निर्माण चरण में इंजीनियर, तकनीकी विशेषज्ञ, मशीन ऑपरेटर और बड़ी संख्या में श्रमिकों को काम मिलता है।
इसके बाद जब औद्योगिक इकाइयां उत्पादन शुरू करती हैं, तो फैक्ट्री कर्मियों, सुपरवाइजर, तकनीकी स्टाफ और प्रबंधन पेशेवरों के लिए स्थायी रोजगार अवसर बनते हैं। लॉजिस्टिक्स, वेयरहाउसिंग, परिवहन और वितरण सेवाएं भी सक्रिय होती हैं, जिससे सप्लाई चेन के हर स्तर पर रोजगार बढ़ता है।
इन गतिविधियों का असर स्थानीय बाजार, छोटे व्यवसाय, मरम्मत सेवाएं, पैकेजिंग और सहायक उद्योगों पर भी पड़ता है, जिससे अप्रत्यक्ष रोजगार का दायरा और व्यापक हो जाता है। इस तरह इंफ्रास्ट्रक्चर आधारित औद्योगिक विकास प्रदेश की अर्थव्यवस्था और रोजगार दोनों को मजबूती देने का माध्यम बन रहा है।
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