
लखनऊ। प्रदेश सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट में सिंचाई, जल संसाधन और ग्रामीण जलापूर्ति क्षेत्रों के लिए बड़े और महत्वपूर्ण प्रावधान किए हैं। यह बजट मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सरकार का दसवां बजट है, जिसे विधानसभा में प्रस्तुत किया गया। बजट में कृषि विकास, जल संरक्षण और ग्रामीण बुनियादी सुविधाओं को विशेष प्राथमिकता दी गई है।
वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए बजट में सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण योजनाओं हेतु 18,290 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। यह राशि पिछले वित्तीय वर्ष 2025-26 की तुलना में लगभग 30 प्रतिशत अधिक है। इस बढ़े हुए बजट से प्रदेश में सिंचाई सुविधाओं को मजबूत करने और बाढ़ प्रबंधन व्यवस्था को और प्रभावी बनाने में मदद मिलेगी।
बजट में नमामि गंगे योजना और ग्रामीण जलापूर्ति के लिए लगभग 22,676 करोड़ रुपये का प्रस्ताव किया गया है। इस राशि का उपयोग गंगा नदी को प्रदूषण मुक्त बनाए रखने और ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने के लिए किया जाएगा।
वित्त मंत्री ने बताया कि गंगा को स्वच्छ बनाने के लिए सीवरेज से जुड़ी कुल 74 परियोजनाएं स्वीकृत की गई हैं। इनमें से 41 परियोजनाएं पूरी होकर संचालित हो रही हैं, जबकि शेष परियोजनाएं निर्माणाधीन हैं। इन प्रयासों से गंगा में दूषित जल का प्रवाह रोका जा सकेगा और नदी की स्वच्छता सुनिश्चित होगी।
जल जीवन मिशन के सभी घटकों के लिए वित्तीय वर्ष 2026-27 में लगभग 22,452 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। प्रदेश में कुल 2.67 करोड़ ग्रामीण परिवारों को क्रियाशील गृह नल संयोजन देने का लक्ष्य रखा गया है, जिसके सापेक्ष अब तक 2.43 करोड़ घरों में नल से जल आपूर्ति उपलब्ध कराई जा चुकी है।
वित्त मंत्री ने बजट भाषण में बताया कि सरकार की प्रमुख परियोजनाओं में-
शामिल हैं, जिनका कार्य तेजी से प्रगति पर है। इन परियोजनाओं के पूर्ण होने पर 4.49 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में नई सिंचाई क्षमता का सृजन होगा।
प्रदेश में सिंचाई क्षमता के विस्तार के लिए वित्तीय वर्ष 2025-26 में 2100 नए राजकीय नलकूपों का निर्माण और डार्क जोन में स्थित 569 असफल नलकूपों का पुनर्निर्माण पूरा किया गया है। इन कार्यों से लगभग 1.62 लाख हेक्टेयर क्षेत्र की सिंचाई क्षमता बहाल हुई है और 1.43 लाख से अधिक किसान परिवार लाभान्वित हुए हैं।
बाढ़ नियंत्रण की दिशा में सरकार की प्रगति का उल्लेख करते हुए बताया गया कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में 285 बाढ़ नियंत्रण परियोजनाएं पूरी की गईं, जिनसे 49.09 लाख आबादी को सीधा लाभ मिला। इसके साथ ही, 11,065 किलोमीटर लंबाई की ड्रेनों की सफाई कराई गई, जिससे जल निकासी व्यवस्था को मजबूत किया गया और जलभराव की समस्या में कमी आई।
सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग के बजटीय प्रावधान उत्तर प्रदेश में कृषि उत्पादकता बढ़ाने, ग्रामीण परिवारों को सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराने और पर्यावरण संरक्षण के प्रति सरकार की मजबूत प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं। जल संसाधनों के समुचित प्रबंधन पर दिया गया यह जोर प्रदेश के समग्र विकास में अहम भूमिका निभाएगा।
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