National Research Scholars Meet 2026: भोपाल में राष्ट्रीय शोधार्थी समागम 2026 में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शोध को समाज और राष्ट्र निर्माण की शक्ति बताया। कॉन्फ्रेंस ऑन महाकाल की वेबसाइट लॉन्च हुई और नवाचार को बढ़ावा देने का संकल्प दोहराया गया।
भोपाल स्थित मप्र विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद् के विज्ञान भवन में आयोजित राष्ट्रीय शोधार्थी समागम–2026 केवल एक अकादमिक आयोजन नहीं रहा, बल्कि शोध और राष्ट्रनिर्माण के रिश्ते पर गंभीर मंथन का मंच बना। देशभर से आए शोधार्थियों, शिक्षाविदों और विशेषज्ञों के बीच मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने स्पष्ट संदेश दिया—शोध का उद्देश्य केवल शोधपत्र नहीं, बल्कि समाज की सोच और दिशा बदलना होना चाहिए।
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने ‘International Conference on Mahakal – The Master of Times’ की आधिकारिक वेबसाइट और ब्रोशर का लोकार्पण किया। साथ ही दत्तोपंत ठेंगड़ी शोध संस्थान द्वारा प्रकाशित पुस्तकों का विमोचन भी किया गया। यह समागम 14 फरवरी तक चलेगा, जिसमें शोध, विज्ञान और नवाचार के विविध आयामों पर सत्र आयोजित किए जा रहे हैं।
“शोध ऐसा हो, जो नई दृष्टि दे”
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अपने संबोधन में कहा कि शोध केवल अकादमिक गतिविधि भर नहीं है। यह समाज और राष्ट्र की दिशा तय करने वाली शक्ति है। उन्होंने शोधार्थियों से आग्रह किया कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में निर्भीक होकर आगे बढ़ें और ऐसे विषयों पर काम करें जो देश की वास्तविक जरूरतों से जुड़े हों। उन्होंने कहा, “जैसे आवश्यकता आविष्कार की जननी है, वैसे ही शोध विज्ञान और वैज्ञानिक पद्धतियों का जनक है। जब मानवीय प्रज्ञा में वैज्ञानिक ज्ञान का समावेश होता है, तब वह ‘प्रज्ञान’ बन जाता है।” उनका जोर इस बात पर था कि शोध का स्तर इतना ऊंचा हो कि वह समाज की सोच को नई दिशा दे सके।
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मध्यप्रदेश को शोध और नवाचार का अग्रणी राज्य बनाने की प्रतिबद्धता
मुख्यमंत्री ने कहा कि विज्ञान और तकनीक का विकास किसी भी राज्य और देश की प्रगति की बुनियाद है। मध्यप्रदेश को शोध और नवाचार के क्षेत्र में अग्रणी बनाने के लिए सरकार प्रतिबद्ध है। उन्होंने शोधार्थियों से परंपरागत सीमाओं से बाहर निकलने का आह्वान किया और कहा कि आधुनिक दृष्टिकोण, परिष्कृत सोच और वैज्ञानिक पद्धति के साथ आगे बढ़ना समय की मांग है। उनके अनुसार, शोध तभी सार्थक है जब उसका प्रभाव समाज के व्यापक वर्ग तक पहुंचे।
समाज आधारित शोध पर जोर
अपने विचारों में मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि दुनिया के ज्ञान-विज्ञान पर लंबे समय तक पश्चिम का प्रभाव रहा है, जिससे भारतीय संस्कृति भी प्रभावित हुई। उन्होंने भारतीय परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि यहां शोध की धारा सामूहिक और समाज-आधारित रही है। उनके अनुसार, शोध को राष्ट्रहित और समाज कल्याण से जोड़ना आवश्यक है। दत्तोपंत ठेंगड़ी शोध संस्थान जैसे मंच देशभर के शोधार्थियों को ऐसी ही दिशा देने का प्रयास कर रहे हैं।
14 फरवरी तक चलेगा विमर्श
राष्ट्रीय शोधार्थी समागम–2026 में विभिन्न विषयों पर सत्र आयोजित हो रहे हैं, जिनमें विज्ञान, प्रौद्योगिकी, सामाजिक विज्ञान और नवाचार से जुड़े मुद्दों पर विशेषज्ञ अपने विचार साझा कर रहे हैं। इस आयोजन को युवा शोधार्थियों के लिए नेटवर्किंग, विचार-विमर्श और मार्गदर्शन का महत्वपूर्ण अवसर माना जा रहा है।
राष्ट्रीय शोधार्थी समागम–2026 ने यह संदेश स्पष्ट किया है कि शोध केवल डिग्री प्राप्त करने का माध्यम नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र के भविष्य को आकार देने की प्रक्रिया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के वक्तव्य ने शोधार्थियों के सामने एक व्यापक दृष्टि रखी—ऐसा अनुसंधान, जो नई सोच दे, नई दिशा दे और विकास को गति दे।
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