UP Data Center Park: योगी सरकार का बड़ा प्लान, 8 शहरों में बनेंगे डेटा सेंटर, 2 लाख करोड़ निवेश की तैयारी

Published : Mar 17, 2026, 09:03 AM IST
uttar pradesh data center park

सार

उत्तर प्रदेश सरकार राज्य को डिजिटल और एआई हब बनाने की दिशा में काम कर रही है। इसके तहत नोएडा, लखनऊ, कानपुर समेत 8 शहरों में डेटा सेंटर पार्क बनाए जाएंगे। करीब 2 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव सामने आए हैं और लगभग 50 हजार रोजगार सृजित होने की संभावना है।

लखनऊ। Yogi Adityanath के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार राज्य को देश का प्रमुख डिजिटल और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस हब बनाने की दिशा में तेजी से काम कर रही है। इसी रणनीति के तहत प्रदेश में 8 बड़े डेटा सेंटर पार्क विकसित करने की योजना बनाई गई है।

सरकार का लक्ष्य इन परियोजनाओं के माध्यम से बड़े पैमाने पर निवेश आकर्षित करना और रोजगार के नए अवसर पैदा करना है। तकनीकी विशेषज्ञों का मानना है कि इन डेटा सेंटर पार्कों के विकसित होने से उत्तर प्रदेश देश की डिजिटल अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। साथ ही भविष्य में एआई, क्लाउड कंप्यूटिंग और डिजिटल सेवाओं से जुड़ी कंपनियों के लिए यह एक प्रमुख केंद्र के रूप में उभर सकता है।

इन प्रमुख शहरों में विकसित होंगे डेटा सेंटर पार्क

सरकार की योजना के अनुसार ये डेटा सेंटर पार्क प्रदेश के कई प्रमुख शहरों में विकसित किए जाएंगे। इनमें Noida, Greater Noida, Yamuna Expressway क्षेत्र, Ghaziabad, Lucknow, Kanpur, Varanasi और Agra शामिल हैं। इनमें से नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना एक्सप्रेस-वे क्षेत्र में जमीन की पहचान और आवंटन की प्रक्रिया काफी आगे बढ़ चुकी है। कुछ कंपनियों को जमीन आवंटित भी कर दी गई है, जबकि अन्य शहरों में भूमि चिन्हांकन और मास्टर प्लान तैयार करने का काम जारी है।

राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय कंपनियों की निवेश में रुचि

डेटा सेंटर क्षेत्र में निवेश को लेकर कई बड़ी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय कंपनियों ने रुचि दिखाई है। इनमें HCL Technologies, Adani Group, NTT Data, Yotta Infrastructure, Sterlite Technologies और Sify Technologies जैसी कंपनियां शामिल हैं। इन कंपनियों की ओर से प्रदेश में लगभग 2 लाख करोड़ रुपये तक के निवेश प्रस्ताव सामने आए हैं। कई परियोजनाओं के लिए समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए जा चुके हैं और कुछ परियोजनाएं निर्माण के चरण में पहुंच चुकी हैं।

बिजली आपूर्ति और ऊर्जा व्यवस्था पर विशेष ध्यान

डेटा सेंटर के संचालन के लिए भारी मात्रा में बिजली की जरूरत होती है। इसे ध्यान में रखते हुए प्रदेश सरकार ने लगभग 900 मेगावाट बिजली की मांग को पूरा करने की योजना बनाई है। इसके लिए नए सब-स्टेशन स्थापित किए जाएंगे और ट्रांसमिशन नेटवर्क को मजबूत किया जाएगा। साथ ही डेटा सेंटर पार्कों को समर्पित बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी। सरकार नवीकरणीय ऊर्जा के उपयोग को भी बढ़ावा दे रही है, ताकि डेटा सेंटर संचालन को पर्यावरण के अनुकूल बनाया जा सके।

निवेशकों के लिए विशेष प्रोत्साहन और सिंगल विंडो सिस्टम

राज्य सरकार ने निवेशकों को आकर्षित करने के लिए डेटा सेंटर नीति के तहत कई प्रोत्साहन भी तय किए हैं। इसमें पूंजीगत सब्सिडी, बिजली शुल्क में रियायत, स्टांप ड्यूटी में छूट और बुनियादी ढांचे के विकास में सरकारी सहयोग शामिल है। इसके अलावा निवेशकों को तेज और पारदर्शी अनुमति प्रक्रिया उपलब्ध कराने के लिए सिंगल विंडो सिस्टम भी लागू किया गया है, जिससे निवेशकों को परियोजनाओं की स्वीकृति में आसानी हो सके।

50 हजार से अधिक रोजगार के अवसर बनने की संभावना

इन 8 डेटा सेंटर पार्कों के विकसित होने से प्रदेश में रोजगार के बड़े अवसर पैदा होंगे। अनुमान के अनुसार करीब 50 हजार प्रत्यक्ष रोजगार और बड़ी संख्या में अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा हो सकते हैं। सरकार का मानना है कि इन परियोजनाओं के अधिकांश चरण अगले 3 से 5 वर्षों के भीतर पूरे हो जाएंगे। इसके साथ ही उत्तर प्रदेश डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और तकनीकी निवेश के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल हो सकता है।

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