Lakhpati Didi Yojana: अब किसी पर निर्भर नहीं गांव की महिलाएं, खुद लिख रहीं सफलता की कहानी

Published : Feb 23, 2026, 12:09 PM IST
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सार

Lakhpati Didi Yojana UP: उत्तर प्रदेश में महिला सशक्तीकरण की योजनाओं से गांव-गांव बदलाव दिख रहा है। लखपति दीदी और बीसी सखी जैसी पहल से एक करोड़ से अधिक महिलाएं आत्मनिर्भर बनीं। ग्रामीण आजीविका मिशन ने महिलाओं की आय और सम्मान दोनों बढ़ाए हैं।

कुछ साल पहले तक गांव की महिलाओं को घर की चारदीवारी तक सीमित समझा जाता था। आज वही महिलाएं बैंकिंग, खेती, ऊर्जा, स्वास्थ्य और छोटे कारोबार तक संभाल रही हैं। यह बदलाव अचानक नहीं आया। इसके पीछे योजनाबद्ध काम और लगातार प्रयास हैं।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में महिला सशक्तीकरण को लेकर जो पहलें शुरू हुईं, उनका असर अब जमीन पर साफ दिख रहा है। खास तौर पर उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन ग्रामीण इलाकों में बड़ा बदलाव ला रहा है।

एक करोड़ से ज्यादा महिलाएं जुड़ीं स्वयं सहायता समूहों से

प्रदेश में करीब एक करोड़ पांच लाख महिलाएं स्वयं सहायता समूहों से जुड़ चुकी हैं। ये महिलाएं अब सिर्फ बचत नहीं कर रहीं, बल्कि अपना छोटा-बड़ा व्यवसाय भी चला रही हैं। ग्राम स्तर तक योजनाएं पहुंचने से उनकी आय बढ़ी है और कई महिलाएं अब उद्यमी बन चुकी हैं। इससे गांव की अर्थव्यवस्था भी मजबूत हुई है।

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गांव-गांव ‘लखपति दीदी’ की नई पहचान

मिशन के तहत “लखपति दीदी” अभियान को तेज किया गया है। अब तक करीब साढ़े 18 लाख महिलाओं का पंजीकरण लखपति दीदी के रूप में हो चुका है। सरकार का लक्ष्य है कि स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को स्थायी आय का स्रोत मिले, ताकि वे हर साल एक लाख रुपये या उससे ज्यादा कमा सकें। आज गांव-गांव ऐसी महिलाएं हैं जो सिलाई, डेयरी, फूड प्रोसेसिंग, कृषि और अन्य छोटे उद्योगों के जरिए अच्छी कमाई कर रही हैं।

एक ग्राम पंचायत-एक बीसी सखी: घर के पास बैंक

ग्रामीण बैंकिंग को आसान बनाने के लिए “एक ग्राम पंचायत-एक बीसी सखी” योजना शुरू की गई। प्रदेश की 57,000 ग्राम पंचायतों में बीसी सखियों की तैनाती का लक्ष्य है।

अब तक 50,225 बीसी सखियों को प्रशिक्षण दिया जा चुका है। करीब 40 हजार महिलाओं ने मिलकर लगभग 40,000 करोड़ रुपये का लेन-देन संभाला है। पहले जहां बैंक जाने में लोगों को झिझक होती थी, अब गांव में ही जमा-निकासी, पेंशन और डिजिटल भुगतान की सुविधा मिल रही है। बुजुर्गों के लिए यह पहल खास राहत बनकर सामने आई है।

खेती से ऊर्जा तक, हर क्षेत्र में महिलाएं आगे

आजीविका मिशन के तहत महिलाओं को कई तरह की जिम्मेदारियां दी जा रही हैं:

  • ड्रोन दीदी – खेती में ड्रोन का उपयोग
  • बीसी सखी – घर-घर बैंकिंग सेवाएं
  • सूर्य सखी – सोलर पैनल और स्ट्रीट लाइट की स्थापना
  • विद्युत सखी – मीटर रीडिंग और बिजली बिल संग्रह
  • कृषि आजीविका सखी – खेती से जुड़ा प्रशिक्षण
  • स्वास्थ्य सखी – पोषण और स्वच्छता जागरूकता
  • सूक्ष्म उद्यम सखी – छोटे कारोबार शुरू कराने में मदद
  • पशु सखी – पशु चिकित्सा और टीकाकरण
  • बीमा सखी – गांव में बीमा सेवाएं उपलब्ध कराना

इन भूमिकाओं से महिलाओं की आय बढ़ी है और गांवों में नई आर्थिक गतिविधियां शुरू हुई हैं।

छोटे कारोबार के लिए आसान पूंजी

लखपति दीदी योजना के तहत महिलाओं को छोटे स्तर पर कारोबार शुरू करने के लिए आसान और ब्याज मुक्त पूंजी दी जाती है। यह सहायता चरणबद्ध तरीके से मिलती है, जिससे महिलाएं बिना दबाव के अपना काम बढ़ा सकें। इससे परिवार की आय में इजाफा होता है और महिलाएं घर के आर्थिक फैसलों में भी भागीदार बनती हैं।

सिर्फ योजना नहीं, सोच में बदलाव

पिछले नौ साल में महिला सशक्तीकरण को जिस तरह प्राथमिकता दी गई, उसने गांवों की सोच बदल दी है। अब महिलाएं आश्रित नहीं, बल्कि कमाने और फैसले लेने वाली बन रही हैं।

उत्तर प्रदेश में आज जो बदलाव दिख रहा है, वह बताता है कि सही दिशा, प्रशिक्षण और आर्थिक मदद मिल जाए तो गांव की महिलाएं भी विकास की मजबूत आधारशिला बन सकती हैं। यह सिर्फ सरकारी आंकड़ों की कहानी नहीं, बल्कि उन लाखों महिलाओं की कहानी है जो अब आत्मविश्वास के साथ कह रही हैं—हम भी कर सकती हैं।

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