
उत्तराखंड का एक वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है। इसमें एक बुजुर्ग शख्स कार से कूड़ा फेंकने वाले टूरिस्ट्स को बीच सड़क पर रोककर सबक सिखाते दिख रहे हैं। इंटरनेट पर लोग उनके इस कदम की जमकर तारीफ कर रहे हैं। यह घटना उत्तराखंड की एक बिज़ी सड़क पर हुई, जब ट्रैफिक कुछ देर के लिए धीमा हुआ था। इस वायरल वीडियो में, वह शख्स अपनी गाड़ी से उतरकर दूसरी कार के पास जाते हैं, जिसमें बैठे टूरिस्ट्स ने कथित तौर पर एक डिस्पोजेबल ग्लास और चम्मच सड़क पर फेंक दिया था।
बाद में इस शख्स की पहचान सोशल एक्टिविस्ट अनूप नौटियाल के रूप में हुई।
यह वीडियो नौटियाल के साथ कार में बैठे एक व्यक्ति ने रिकॉर्ड किया। क्लिप की शुरुआत में नौटियाल टूरिस्ट्स की कार की ओर जाते दिखते हैं ताकि उन्हें कचरा लौटा सकें और अपनी बात समझा सकें। हालांकि वीडियो में उनकी और टूरिस्ट्स की बातचीत साफ सुनाई नहीं दे रही है, लेकिन वीडियो रिकॉर्ड कर रहा शख्स बताता है कि क्या हुआ। वह कहता है कि टूरिस्ट्स ने अपनी कार से कचरा बाहर फेंका और नौटियाल उन्हें वही कचरा लौटाने और विनम्रता से यह समझाने गए हैं कि गंदगी फैलाना गलत है। वीडियो में दिखता है कि नौटियाल चिल्लाने या बहस करने के बजाय शांति से टूरिस्ट्स से बात कर रहे हैं। थोड़ी देर बात करने के बाद वह अपनी कार में वापस आ जाते हैं।
वापस बैठने पर, वीडियो बनाने वाला शख्स उनसे पूछता है कि क्या टूरिस्ट्स ने अपनी गलती मानी। नौटियाल जवाब देते हैं कि उन्होंने मान ली। वीडियो में वह कहते हैं, "हाँ, उन्होंने मान लिया।" वह आगे बताते हैं कि उन्होंने टूरिस्ट्स से कहा कि सिर्फ उत्तराखंड में ही नहीं, बल्कि कहीं भी कूड़ा-कचरा न फैलाएं। उन्होंने यह भी कहा कि टूरिस्ट्स पढ़े-लिखे लग रहे थे और अपनी गलती पर थोड़े शर्मिंदा भी हुए। उन्होंने आगे कहा, "लेकिन जो गलत है, वो गलत है।"
यह वीडियो ऑनलाइन तेजी से फैल गया। कई लोगों ने इस स्थिति को सम्मानजनक और शांतिपूर्ण तरीके से संभालने के लिए नौटियाल की तारीफ की। कई यूजर्स ने कहा कि उत्तराखंड की पहाड़ियों, सड़कों और टूरिस्ट प्लेसेज़ को बढ़ते प्रदूषण से बचाने के लिए ऐसा व्यवहार ज़रूरी है।
एक यूजर ने लिखा, "इस देश में लोग देश को अपना घर नहीं समझते। उन्हें यह याद दिलाना बहुत ज़रूरी है।"
एक अन्य व्यक्ति ने कमेंट किया कि लोगों को गंदगी फैलाने पर रोका जाना चाहिए और उन पर जुर्माना लगाया जाना चाहिए ताकि वे इस मुद्दे की गंभीरता को समझें।
कई यूजर्स ने नौटियाल के शांत व्यवहार और नागरिक समझ (civic sense) की तारीफ की। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर "बहुत बढ़िया सर", "शानदार काम", और "आपको सलाम" जैसे कमेंट्स की बाढ़ आ गई।
एक दर्शक ने लिखा, "आपका छोटा सा कदम कई दूसरों के लिए एक मिसाल है।" एक अन्य यूजर ने कहा, "बोलना आसान है, लेकिन आपने करके दिखाया।"
इस वायरल क्लिप ने भारत में सिविक सेंस को लेकर एक बड़ी बहस भी छेड़ दी है। कई लोगों ने कहा कि पढ़े-लिखे लोगों के बीच भी गंदगी फैलाना एक बड़ी समस्या बनी हुई है। एक कमेंट में लिखा था, "हमारे एजुकेशन सिस्टम में सिविक सेंस कोई सब्जेक्ट ही नहीं है।" एक अन्य यूजर ने मज़ाक में कहा कि अक्सर ज़्यादा पढ़े-लिखे लोग ही सबसे ज़्यादा कचरा फेंकते हैं। कुछ दर्शकों ने कारों से कचरा फेंकने वाले लोगों को टोकने के अपने अनुभव भी साझा किए। कुछ ने कहा कि गंदगी फैलाने से रोकने की कोशिश करने पर उन्हें बहस या गुस्से का सामना करना पड़ा।
एक व्यक्ति ने लिखा कि आजकल सड़क पर अजनबियों को सलाह देने के लिए हिम्मत चाहिए क्योंकि कुछ लोग गुस्से में आ जाते हैं। दूसरों ने कहा कि हर गाड़ी में कचरा बाहर फेंकने के बजाय एक छोटा ट्रैश बैग होना चाहिए।
कई कमेंट्स में उत्तराखंड की प्राकृतिक सुंदरता को बचाने पर ज़ोर दिया गया, खासकर जब टूरिस्ट्स की संख्या लगातार बढ़ रही है। यूजर्स ने कहा कि गंदगी फैलाने से राज्य की पहाड़ियों, नदियों और सड़कों को नुकसान पहुंच रहा है। कुछ लोगों ने दावा किया कि दूसरे राज्यों से आने वाले टूरिस्ट अक्सर प्लास्टिक की बोतलें, खाने के पैकेट और ड्रिंक के कैन पीछे छोड़ जाते हैं।
एक दर्शक ने लिखा कि ऐसा ही व्यवहार ऋषिकेश और लद्दाख जैसी जगहों पर आम है, जहां टूरिस्ट कथित तौर पर खुले में बोतलें और रैपर फेंकते हैं। कुछ यूजर्स ने यह भी कहा कि जो माता-पिता बच्चों के सामने गंदगी फैलाते हैं, वे अगली पीढ़ी को भी वही बुरी आदतें सिखाते हैं।
वहीं, कुछ कमेंट्स में यह तर्क भी दिया गया कि नगर निगम के कर्मचारियों को सड़कें साफ करने और कचरा इकट्ठा करने के लिए पैसे मिलते हैं। हालांकि, ज़्यादातर यूजर्स इससे असहमत थे और कहा कि सार्वजनिक स्थानों को साफ रखना हर किसी की ज़िम्मेदारी है। यह वीडियो किसी गुस्से या हिंसा की वजह से नहीं, बल्कि उस शांत और सम्मानजनक तरीके की वजह से पॉपुलर हुआ है, जिससे उस बुजुर्ग शख्स ने स्थिति को संभाला। कई दर्शकों ने कहा कि यह क्लिप एक मज़बूत संदेश देती है कि जब भी आम नागरिक सार्वजनिक स्थानों को गंदा होते देखें, तो उन्हें आवाज़ उठानी चाहिए।
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