
Uttarakhand The Dhami Model: पहाड़ों की गोद में बसा उत्तराखंड अपनी खूबसूरती के लिए पूरी दुनिया में जाना जाता है, लेकिन यहां की हसीन वादियां कई बार कुदरत के एक बड़े इम्तिहान का सामना भी करती हैं। जब पहाड़ दरकते हैं, तो सिर्फ सड़कें या घर नहीं टूटते, बल्कि लोगों की रोजी-रोटी और पूरी जिंदगी पर इसका असर पड़ता है। लेकिन, जब बात जनता की सुरक्षा और उनकी जिंदगी को दोबारा पटरी पर लाने की हो, तो मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी (Pushkar Singh Dhami) की सरकार ने सिर्फ कागजी वादों के बजाय जमीन पर उतरकर एक मिसाल पेश की है। इसे 'द धामी मॉडल' (The Dhami Model) कहा जा रहा है, जिसने आपदा के जख्मों पर मरहम लगाने का नया रास्ता दिखाया है। आइए जानते हैं कि कैसे सरकार ने राहत से लेकर पुनर्वास तक के काम किए...
करीब एक साल पहले जब धराली और थराली में अचानक बादल फटने और मलबे का सैलाब आने से तबाही मची थी, तब प्राथमिकता सिर्फ जान बचाने की नहीं थी, बल्कि उन परिवारों को दोबारा खड़े करने की थी जिन्होंने अपना सब कुछ खो दिया था। पहाड़ों में बुनियादी सुविधाएं दोबारा खड़ी करना आसान काम नहीं है। यहां एक बंद सड़क का मतलब बाजार, स्कूल और अस्पताल से सीधा संपर्क कट जाना है। बिजली या पानी की एक लाइन टूटने से पूरा गांव अंधेरे में डूब जाता है। ऐसी स्थिति में सरकार ने सिर्फ फौरी मदद देकर पल्ला नहीं झाड़ा, बल्कि पुनर्निर्माण को एक मिशन बना लिया।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस रिकवरी की समीक्षा करते हुए साफ कहा था, 'धराली की आपदा सिर्फ ढांचा खड़ा करने की चुनौती नहीं थी, बल्कि यह प्रभावित परिवारों की ज़िंदगी और भविष्य को बचाने की जिम्मेदारी थी। हमारी सरकार पहले दिन से हर पीड़ित परिवार के साथ खड़ी है।'
उत्तराखंड सरकार का यह 'केयरिंग अप्रोच' सिर्फ धराली तक सीमित नहीं था। जब दिसंबर 2022 और जनवरी 2023 के दौरान जोशीमठ में ज़मीन धंसने (Land Subsidence) का गंभीर संकट आया था, तब भी सरकार ने युद्धस्तर पर काम किया था। प्रभावित परिवारों को सुरक्षित होटलों, स्कूलों और गेस्ट हाउसों में शरण दी गई। तुरंत राहत के रूप में ₹4,000 मासिक किराया और ₹1.5 लाख की फौरी सहायता दी गई। संकट क्षेत्र में बिजली-पानी के बिल माफ किए गए। पुनर्वास के लिए परिवारों को तीन बेहतरीन विकल्प दिए गए, नकद मुआवजा, जमीन और मकान, या सुरक्षित जगह पर सरकार द्वारा बनाया गया घर। केंद्र सरकार के सहयोग से ₹1,658 करोड़ से ज्यादा का रिकवरी और रिकंस्ट्रक्शन प्लान मंजूर किया गया ताकि इस ऐतिहासिक शहर को वैज्ञानिक तरीके से बचाया जा सके।
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