
नई दिल्ली: वैश्विक ऊर्जा बाजार में मचे हाहाकार के बीच भारत की धरती पर एक ऐसी कूटनीतिक हलचल शुरू हुई है, जिसने पूरी दुनिया के बाजारों को चौंका दिया है। वेनेजुएला की कार्यवाहक राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज अचानक भारत दौरे पर पहुंचीं और बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। यह मुलाकात ऐसे संवेदनशील समय पर हुई है जब भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा को लेकर एक अभूतपूर्व चौराहे पर खड़ा है। सूत्रों की मानें तो दोनों देशों के बीच कच्चे तेल की सप्लाई को लेकर एक ऐसा महा-समझौता होने जा रहा है, जो वैश्विक राजनीति के समीकरण बदल सकता है।
PM Modi holds talks with Venezuela’s Acting President Delcy Rodrigues in Delhi.
For India, the focus is on securing crude supplies amid the Hormuz oil shock.
Present at the meeting were Foreign Minister Jaishankar, FS Misri & Petroleum Secretary Niraj Mittal https://t.co/28FaVrgd05 pic.twitter.com/f3uxWgHRYv— Dhairya Maheshwari (@dhairyam14) June 4, 2026
वैश्विक व्यापार की रीढ़ मानी जाने वाली होर्मुज जलसंधि (Strait of Hormuz) में उपजे तनाव ने भारत के सामने ऊर्जा सुरक्षा की नई चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। खाड़ी देशों से होने वाली तेल सप्लाई पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। ऐसे में भारत हाथ पर हाथ धरकर नहीं बैठ सकता था। ठीक इसी समय, वेनेजुएला की कार्यवाहक राष्ट्रपति का भारत आना कोई सामान्य घटना नहीं है। इस दौरे से पहले भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भी रोड्रिगेज से गुप्त और लंबी चर्चा की। जयशंकर ने साफ शब्दों में कहा कि रोड्रिगेज का भारत-वेनेजुएला संबंधों को मजबूत करने में पुराना इतिहास रहा है, और पीएम मोदी के साथ उनकी यह बातचीत दोनों देशों के सहयोग को एक नई और ऐतिहासिक ऊंचाई पर ले जाएगी।
Venezuela ki Acting President Delcy Rodríguez ne PM Modi se mulaqat ki hai.
Is meeting ka focus oil, trade aur investment cooperation ko badhana hai. Duniya me energy security ko lekar badhti chinta ke beech ye meeting India ke liye kaafi mahatvapurn mani ja rahi hai. pic.twitter.com/kI7p5pnzNA— finowings® (@finowings) June 4, 2026
इस पूरी कहानी में सबसे बड़ा ट्विस्ट भू-राजनीतिक (Geopolitical) उथल-पुथल का है। इसी साल 4 जनवरी को अमेरिका ने वेनेजुएला के तत्कालीन राष्ट्रपति निकोलस मादुरो का तख्तापलट कर दिया था, जिसके बाद से डेल्सी रोड्रिगेज कार्यवाहक राष्ट्रपति के तौर पर देश की कमान संभाल रही हैं। मादुरो को हटाने के बाद अमेरिका ने वेनेजुएला के तेल निर्यात पर लगी पाबंदियों में कुछ ढील दी, जिसके बाद अप्रैल से भारत में वेनेजुएला का तेल फिर से पहुंचना शुरू हुआ।
सस्पेंस इस बात को लेकर है कि अब अमेरिका और वेनेजुएला दोनों ही इस होड़ में शामिल हैं कि भारत के साथ ऐसा समझौता हो, जिससे यह तेल निर्यात और तेजी से बढ़ सके। क्या अमेरिका इस डील के पीछे अपनी कोई नई चाल चल रहा है, या फिर यह पूरी तरह भारत की कूटनीतिक जीत है?
एनर्जी ट्रैक करने वाली वैश्विक एजेंसी 'केप्लर' के ताजा आंकड़ों ने तेल बाजार में भूकंप ला दिया है। मई 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक, वेनेजुएला ने तेल सप्लाई के मामले में दुनिया के सबसे बड़े खिलाड़ियों-सऊदी अरब और खुद अमेरिका-को बहुत पीछे छोड़ दिया है। इस समय भारत को तेल देने के मामले में वेनेजुएला तीसरे नंबर पर आ गया है, और उससे आगे सिर्फ रूस और यूएई (UAE) ही बचे हैं।
🚨🇮🇳🇻🇪 Venezuela's Acting President Delcy Rodríguez arrives in India for high-level talks with PM Modi
The visit comes as India seeks to diversify oil supplies amid uncertainty in the Strait of Hormuz.
pic.twitter.com/1ujCPCO2o6— Sputnik India (@Sputnik_India) June 3, 2026
आंकड़े गवाही दे रहे हैं कि इस महीने भारत को वेनेजुएला से मिलने वाला तेल अप्रैल के मुकाबले करीब 50 फीसदी तक बढ़ चुका है। केप्लर के डेटा के अनुसार वर्तमान में भारत के शीर्ष सप्लायर्स की स्थिति इस प्रकार है:
| सप्लायर देश | तेल सप्लाई (प्रति दिन) |
| रूस | 23 लाख बैरल |
| UAE | 4.40 लाख बैरल |
| वेनेजुएला | 4.17 लाख बैरल |
| सऊदी अरब | 3.40 लाख बैरल |
| अमेरिका | 3.10 लाख बैरल |
वेनेजुएला के पास करीब 303 अरब बैरल कच्चे तेल का भंडार है, जो इसे दुनिया का सबसे बड़ा तेल खजाना बनाता है। यह भंडार सऊदी अरब से भी कहीं अधिक है, लेकिन इस तेल के साथ एक बड़ी चुनौती भी है-यह बेहद भारी और उच्च सल्फर (High Sulfur) वाला होता है, जिसे रिफाइन करना हर किसी के बस की बात नहीं है। यहीं पर भारत का असली मास्टरस्ट्रोक सामने आता है। भारत की बेहद आधुनिक और उन्नत रिफाइनरियां इस 'मुश्किल' तेल को भी बेहद आसानी से डीजल और जेट फ्यूल जैसे कीमती उत्पादों में बदल देती हैं। चूंकि यह तेल बाजार में तुलनात्मक रूप से बहुत सस्ता मिलता है, इसलिए भारतीय रिफाइनरियों के लिए यह घाटे का नहीं, बल्कि बंपर मुनाफे का सौदा साबित हो रहा है।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने इस रणनीति की पुष्टि करते हुए कहा कि वेनेजुएला भारत का एक बेहद महत्वपूर्ण ऊर्जा साझेदार है और भारतीय सरकारी तेल कंपनियां वहां बड़ा निवेश कर चुकी हैं। अब वेनेजुएला के तेल सेक्टर में भारत अपनी इस हिस्सेदारी और निवेश को और अधिक बढ़ाने के नए रास्ते तलाश रहा है।
🚨🇮🇳🇻🇪PM Modi holds talks with Venezuelan Acting President Delcy Rodríguez in Delhi
The visit comes as India seeks to diversify oil supplies amid uncertainty in the Strait of Hormuz. pic.twitter.com/VRpkOhP71o— Sputnik India (@Sputnik_India) June 4, 2026
रोड्रिगेज का यह भारत दौरा कोई पहली कोशिश नहीं है। वह इससे पहले फरवरी 2025 में भी 'इंडिया एनर्जी वीक' में हिस्सा लेने भारत आई थीं, तब वे उपराष्ट्रपति और तेल मंत्री थीं। लेकिन इस बार वह देश की कार्यवाहक राष्ट्रपति बनकर आई हैं, जो इस दौरे की गंभीरता और इसके पीछे छिपे बड़े मंसूबों को बयां करता है। डेल्सी रोड्रिगेज की यह यात्रा केवल कूटनीतिक मुलाकात नहीं, बल्कि आने वाले वर्षों की ऊर्जा भू-राजनीति की दिशा तय करने वाला संकेत मानी जा रही है।
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