
नई दिल्लीः प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) ने हाल में देशवासियों से अपील की कि भारतीय परिवार विदेशों में शादी करने की बजाय भारत में ही विवाह समारोह आयोजित करें। उन्होंने कहा कि 'Wed in India' अभियान से देश का पैसा देश में रहेगा, पर्यटन बढ़ेगा और लाखों लोगों को रोजगार मिलेगा। प्रधानमंत्री ने कहा कि बड़े और संपन्न परिवारों में विदेश में शादी करने का ट्रेंड तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन अगर ये शादियां भारत में हों तो होटल, ट्रैवल, कैटरिंग, सजावट, लोकल कारोबार और टूरिज्म सेक्टर को बड़ा फायदा होगा। आइए जानते हैं विदेश में हो रही शादियों का खर्च क्या है, और अगर ये खर्च इंडिया में सर्कुलेट होगा तो देश को क्या फायदा मिलेगा..
भारत में विदेश में होने वाली शादियों का कोई आधिकारिक सरकारी डेटाबेस नहीं है, लेकिन उद्योग संगठनों और वेडिंग सेक्टर की रिपोर्ट्स के अनुसार, हर साल करीब 4,000 से 5,000 भारतीय शादियां विदेशों में होती हैं। इनमें सबसे लोकप्रिय डेस्टिनेशन UAE (दुबई, अबू धाबी), थाईलैंड (Thailand), टर्की (Turkey), इटली (Italy), बाली (Indonesia), मालदीव (Maldives) और फ्रांस (France) हैं। बड़ी संख्या में NRI और हाई-नेटवर्थ भारतीय परिवार इन शादियों में शामिल होते हैं।
उद्योग अनुमानों के मुताबिक, भारतीय परिवार विदेशों में शादियों पर हर साल लगभग ₹75,000 करोड़ से ₹1 लाख करोड़ तक खर्च करते हैं। बता दें, ये वही आंकड़ा है जिसका जिक्र 'Wed in India' अभियान के दौरान भी हुआ था।
| खर्च का हिस्सा | अनुमानित लागत |
|---|---|
| होटल और रिसॉर्ट | ₹50 लाख – ₹5 करोड़ |
| फ्लाइट और ट्रैवल | ₹20 लाख – ₹2 करोड़ |
| डेकोरेशन | ₹30 लाख – ₹3 करोड़ |
| कैटरिंग | ₹25 लाख – ₹2 करोड़ |
| एंटरटेनमेंट | ₹10 लाख – ₹5 करोड़ |
| लॉजिस्टिक्स और वीजा | ₹10 लाख+ |
नोट- बता दें, लग्जरी वेडिंग्स का बजट ₹20 करोड़ से ₹100 करोड़ तक भी पहुंच जाता है।
1. सोशल मीडिया और सेलिब्रिटी प्रभावः विराट कोहली (Virat Kohli) और अनुष्का शर्मा (Anushka Sharma) की इटली वेडिंग या कई बॉलीवुड सितारों की विदेशी शादियों के बाद यह ट्रेंड तेजी से बढ़ा।
2. प्राइवेसीः विदेश में शादी करने से मीडिया और भीड़ से दूरी मिलती है।
3. एक्सपीरियंस वेडिंग: अब शादी सिर्फ रस्म नहीं, बल्कि लक्जरी इवेंट बन गई है।
4. सीमित गेस्ट लिस्ट: कई परिवार कम लोगों के साथ हाई-एंड वेडिंग पसंद करते हैं।
विशेषज्ञों और वेडिंग इंडस्ट्री रिपोर्ट्स के मुताबिक, ज्यादातर मामलों में जवाब “नहीं” है। विदेश में शादी का खर्च इंडिया से बहुत ज्यादा होता। रेडिट और इंडस्ट्री चर्चाओं में बताया गया कि 'फ्लाइट्स (Flights), वीजा (Visas), लॉजिस्टिक्स (Logistics) और इंपोर्टेट वेंडर्स (Imported Vendors) कुल लागत को 25-30% तक बढ़ा देते हैं।' 2026 में युद्ध और महंगे एयर ट्रैवल के कारण विदेशी शादियों की लागत 20-25% तक बढ़ गई।
भारत का वेडिंग मार्केट लगभग ₹6.5 लाख करोड़ का माना जाता है। इसमें डेस्टिनेशन वेडिंग सेगमेंट करीब ₹2.5 लाख करोड़ का है और तेजी से बढ़ रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, हर 4 में से 1 भारतीय शादी अब डेस्टिनेशन वेडिंग है। 89-90% डेस्टिनेशन वेडिंग भारत के अंदर ही हो रही हैं। भारत के कई शहर तेजी से नये लग्जरी वेडिंग हब बन रहे हैं, जहां कई हाई-प्रोफाइल शादियां हो रही हैं।
उदयपुर (Udaipur)
जयपुर (Jaipur)
जोधपुर (Jodhpur)
गोवा (Goa)
कोच्ची (Kochi)
अगर विदेशी शादियों का बड़ा हिस्सा भारत में शिफ्ट हो जाए, तो होटल इंडस्ट्री को बड़ा फायदा, टूरिज्म सेक्टर को बढ़ावा, लोकल रोजगार में वृद्धि, विदेशी मुद्रा की बचत और छोटे कारोबारियों की कमाई बढ़ेगी। इसलिए सरकार का मानना है कि इससे हजारों करोड़ रुपये भारत के भीतर ही सर्कुलेट होंगे।
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