
ताकत: सीएम ममता बनर्जी की लोकप्रियता ही पार्टी की सबसे बड़ी ताकत है। जमीनी स्तर तक पार्टी का संगठन बहुत मजबूत है। पार्टी के पास कार्यकर्ताओं की एक बहुत बड़ी फौज है। पंचायत और नगर पालिका जैसी स्थानीय संस्थाओं में पार्टी की सत्ता है। सरकार की कल्याणकारी योजनाएं और एसआईआर (SIR) के खिलाफ जनमत बनाने में कामयाबी भी पार्टी के पक्ष में है।
कमजोरी: सरकार के खिलाफ सत्ता-विरोधी लहर (एंटी-इनकंबेंसी) है। भ्रष्टाचार के आरोप और स्थानीय नेताओं के खिलाफ लोगों में गुस्सा है। सरकार पर राज्य की असली समस्याओं को हल करने में नाकाम रहने का भी आरोप है। पार्टी के अंदर गुटबाजी और एसआईआर विवाद के दौरान पार्टी के वोट बैंक में सेंध लगने की भी चिंता है।
मौके: एसआईआर विवाद का फायदा मिल सकता है। कल्याणकारी योजनाओं से लाभ पाने वाले कमजोर वर्ग के लोग ममता सरकार का समर्थन कर सकते हैं।
ताकत: राज्य में टीएमसी की सबसे बड़ी और सीधी चैलेंजर है। प्रधानमंत्री मोदी की लोकप्रियता पार्टी के लिए सबसे बड़ा प्लस पॉइंट है। राज्य में हिंदुत्व की लहर बनाने में कामयाब रही है। सरकार के भ्रष्टाचार और खराब कानून-व्यवस्था के खिलाफ आवाज उठाकर एक मजबूत अभियान चलाया है। लेफ्ट और कांग्रेस के वोट बैंक में सेंध लगाने में भी सफल रही है।
कमजोरी: प्रचार के लिए बाहरी नेताओं पर बहुत ज्यादा निर्भर है। मोदी समेत केंद्र के नेता ही बीजेपी के लिए स्टार प्रचारक हैं। एसआईआर का कन्फ्यूजन बीजेपी को नुकसान पहुंचा सकता है। पार्टी में अंदरूनी कलह है। जमीनी स्तर पर संगठन उतना मजबूत नहीं है। ममता बनर्जी के कद का मुकाबला करने के लिए किसी बड़े स्थानीय नेता की कमी है।
मौके: सत्ता-विरोधी लहर का फायदा उठा सकती है। भ्रष्टाचार, कानून-व्यवस्था और विकास की कमी जैसे मुद्दों को भुना सकती है। सामूहिक नेतृत्व के साथ मैदान में उतरकर ममता बनर्जी के करिश्मे का मुकाबला कर सकती है।
ताकत: 2021 में एक भी सीट न जीतने के बावजूद, मालदा, मुर्शिदाबाद, नदिया और उत्तर-मध्य बंगाल के कुछ और इलाकों में कांग्रेस का प्रभाव अब भी बाकी है।
कमजोरी: पार्टी विरोधी गतिविधियों, गुटबाजी और संगठन की कमी के कारण कई जिलों में पार्टी अपना वजूद खो चुकी है। लगातार हार के बावजूद पार्टी ने अब तक कोई सबक नहीं सीखा है।
मौके: इस बार अकेले चुनाव लड़ने का फैसला किया है, जिससे पार्टी संगठन को फिर से खड़ा करने में मदद मिल सकती है। कई सीटों पर कांग्रेस खुद को तीसरे विकल्प के तौर पर पेश कर सकती है।
ताकत: टीएमसी के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों और धर्म के आधार पर बंटवारे के खिलाफ एक माहौल बनाया है। पार्टी के ज्यादातर नेताओं की छवि सादगी और ईमानदारी वाली है, जो आम लोगों को पसंद आती है। स्कूल नौकरी घोटाला और आर.जी. कार मेडिकल कॉलेज की छात्रा के साथ रेप-मर्डर केस में पूरे राज्य में विरोध प्रदर्शन और धरने जैसे आंदोलन किए हैं।
कमजोरी: विरोध प्रदर्शन और धरनों का फायदा पिछले चुनावों में पार्टी को नहीं मिला। 2011 में जो वोट शेयर 39% था, वो अब घटकर 4.73% पर आ गया है। पार्टी का संगठन कमजोर है और लोकप्रिय नेताओं की कमी है। युवाओं को अपनी तरफ खींचने में नाकाम रही है।
मौके: 2024 के लोकसभा चुनाव में अकेले लड़कर 5.73% वोट हासिल किए हैं। 2021 की तुलना में वोट शेयर बढ़ा है, जिससे पार्टी में थोड़ी उम्मीद जगी है।
चुनौती: इस बार कांग्रेस के समर्थन के बिना अकेले चुनाव लड़ रही है। मुर्शिदाबाद में बाबरी मस्जिद की तरह एक मस्जिद की नींव रखकर विवादों में आए टीएमसी विधायक हुमायूं कबीर के साथ नजदीकी पार्टी को भारी पड़ सकती है।
- स्पेशल वोटर लिस्ट में सुधार को लेकर सरकार और विपक्ष में तकरार
- अवैध अप्रवासियों की घुसपैठ पर लगाम न लग पाना
- टीएमसी सरकार पर विपक्ष के भ्रष्टाचार के आरोप
- 25,000 से ज्यादा स्कूल शिक्षकों की भर्ती का घोटाला
- राज्य में सांप्रदायिक तनाव और धर्म की राजनीति का विवाद
- राज्य में बढ़ते हमले, उत्पीड़न और तस्करी की घटनाएं
- आर.जी. कार और लॉ कॉलेज में रेप की घटनाएं
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