
Dinesh Falhari Maharaj: वृंदावन के संत प्रेमानंद महाराज का आश्रम इन दिनों एक बार फिर चर्चा में है। इसकी वजह है हिंदूवादी संत दिनेश फलाहारी महाराज के कुछ दावे और आरोप। फलाहारी महाराज ने श्रीहित राधा केलिकुंज आश्रम को लेकर कई सवाल उठाए हैं। उन्होंने आश्रम में बिल्डर लॉबी के प्रभाव का दावा किया है और यह भी आरोप लगाया कि राजस्थान की एक पीआर कंपनी से जुड़े लोग संत बनकर वहां रह रहे हैं। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
फलाहारी महाराज का एक और दावा हाल में चर्चा में आया, जिसमें उन्होंने आरोप लगाया कि राजस्थान की एक निजी कंपनी से जुड़े लोगों ने विराट कोहली को प्रेमानंद महाराज के आश्रम तक लाने के लिए ₹5 करोड़ की पेशकश या खर्च किया। उनके मुताबिक, इसके पीछे आश्रम और प्रेमानंद महाराज की लोकप्रियता बढ़ाने की कोशिश थी। इस दावे के समर्थन में अभी तक कोई सार्वजनिक दस्तावेज सामने नहीं आया है।
दिनेश फलाहारी महाराज की पहचान हिंदूवादी संत और श्रीकृष्ण जन्मभूमि संघर्ष न्यास के अध्यक्ष के तौर पर होती है। वह मथुरा के श्रीकृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह विवाद से जुड़े पक्षकारों में भी शामिल रहे हैं। फलाहारी महाराज अपने एक संकल्प की वजह से भी पहचाने जाते हैं। उन्होंने कथित तौर पर संकल्प लिया है कि जब तक मथुरा में कृष्ण जन्मभूमि से जुड़ा विवाद उनके अनुसार हल नहीं होता, तब तक वह अन्न ग्रहण नहीं करेंगे और पैरों में पादुका नहीं पहनेंगे। फलाहारी यानी फल पर निर्भर रहने की वजह से उन्हें यह नाम मिला।
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फलाहारी महाराज ने प्रेमानंद महाराज को वृंदावन स्थित आश्रम छोड़कर गोवर्धन गिरिराज में रहने का न्योता भी दिया है। इससे पहले वह प्रेमानंद महाराज की सुरक्षा को लेकर सरकार से Z+ सुरक्षा देने की मांग कर चुके हैं।
राज कुंद्रा की किडनी दान करने की पेशकश पर दिया बयान भी उन्हें चर्चा में ला चुका है। कुल मिलाकर, फलाहारी महाराज ऐसे संत हैं जो धार्मिक और हिंदूवादी मुद्दों पर मुखर बयान देने के कारण अक्सर सुर्खियों में रहते हैं। हालांकि उनके हालिया आरोपों को लेकर फिलहाल स्वतंत्र और ठोस पुष्टि का इंतजार है।
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