Judge Ravi Kumar Diwakar Transfer: जज रवि कुमार दिवाकर का फास्ट ट्रैक कोर्ट से मुजफ्फरनगर फैमिली कोर्ट में तबादला हुआ। ज्ञानवापी सर्वे का आदेश और 23 लोगों को मौत की सजा देने से चर्चा में आए थे।
न्यायिक स्थानांतरण आदेश के अनुसार, जज रवि कुमार दिवाकर का फास्ट ट्रैक कोर्ट से फैमिली कोर्ट में तबादला कर दिया गया है। इस साल अप्रैल से सितंबर के बीच मुजफ्फरनगर और बरेली में 11 मामलों में 23 लोगों को मौत की सजा सुनाने के कारण वे चर्चा में आए थे। अब वे मुजफ्फरनगर की फैमिली कोर्ट में अतिरिक्त प्रधान न्यायाधीश (एडिशनल प्रिंसिपल जज) के रूप में जिम्मेदारी संभालेंगे।
फास्ट ट्रैक कोर्ट-3 में संभाल रहे थे जिम्मेदारी
जज रवि कुमार दिवाकर को 29 नवंबर 2025 को मुजफ्फरनगर ट्रांसफर किया गया था। यहां उन्होंने फास्ट ट्रैक कोर्ट-3 के पीठासीन अधिकारी के रूप में काम किया। इस दौरान उनके न्यायालय में मुजफ्फरनगर और शामली जिलों से जुड़े आपराधिक मामलों की सुनवाई हुई।
7 सितंबर को उन्होंने मुजफ्फरनगर की अदालत में अपनी 23वीं मौत की सजा सुनाई थी। इस मामले में एक व्यक्ति को अपनी पत्नी को जिंदा जलाने का दोषी ठहराया गया था।
अप्रैल से सितंबर के बीच 11 मामलों में 23 लोगों को मौत की सजा सुनाने के कारण उनका कार्यकाल चर्चा में रहा। अब न्यायिक स्थानांतरण आदेश के बाद उन्हें फैमिली कोर्ट में नई जिम्मेदारी दी गई है।
Judge Ravi Kumar Diwakar: 97 लंबित मामलों की फाइलें वापस मंगाने पर उठाए सवाल
जज दिवाकर का कार्यकाल उस समय भी चर्चा में आया, जब अगस्त में उनके न्यायालय से हत्या और अन्य गंभीर अपराधों से जुड़े कम से कम 97 लंबित मामलों की फाइलें वापस मंगा ली गईं।
यह कार्रवाई तत्कालीन जिला एवं सत्र न्यायाधीश वीरेंद्र कुमार सिंह के आदेश पर हुई थी। सिंह अब सेवानिवृत्त हो चुके हैं।
इसके बाद जज दिवाकर ने इन मामलों की फाइलें वापस मंगाने के आधार पर सवाल उठाए। उन्होंने नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक सब्सटेंस (NDPS) अधिनियम से जुड़े एक मामले के फैसले में इस मुद्दे का उल्लेख किया।
उन्होंने कहा कि सवाल केवल यह नहीं है कि क्या प्रशासनिक आधार पर इस तरह फाइलें वापस ली जा सकती हैं, बल्कि यह भी महत्वपूर्ण है कि इस शक्ति का इस्तेमाल करने के पीछे क्या कारण थे।
उन्होंने इस प्रक्रिया में लिखित कारणों के अभाव पर भी सवाल उठाए। इस तरह, लंबित मामलों की फाइलें वापस मंगाने की कार्रवाई और उसके आधार को लेकर उनका रुख चर्चा में रहा।
Gyanvapi Case: ज्ञानवापी परिसर के सर्वे का आदेश देकर चर्चा में आए थे जज
जज रवि कुमार दिवाकर ज्ञानवापी मस्जिद परिसर के कोर्ट की निगरानी में वीडियोग्राफिक सर्वे का आदेश देने के बाद भी चर्चा में आए थे।
मई 2022 में वाराणसी में सिविल जज (सीनियर डिवीजन) के रूप में तैनाती के दौरान उन्होंने श्रृंगार गौरी स्थल पर पांच हिंदू महिलाओं के पूजा करने के अधिकार से जुड़े मामले में यह आदेश दिया था।
सर्वे के दौरान ज्ञानवापी परिसर के वजूखाना क्षेत्र में मौजूद एक ढांचे को हिंदू याचिकाकर्ताओं ने शिवलिंग बताया था। हालांकि, मुस्लिम पक्ष ने इस दावे का विरोध किया था।
बाद में सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की कार्यवाही को वाराणसी के जिला न्यायाधीश की अदालत में स्थानांतरित कर दिया।
Gyanvapi Survey Order: आदेश के बाद मिली थीं धमकियां
ज्ञानवापी परिसर के सर्वे का आदेश देने के बाद जज दिवाकर को धमकियां मिलने की बात सामने आई थी। इसके बाद अधिकारियों को उनकी सुरक्षा की समीक्षा करनी पड़ी।
2024 में भी उन्होंने अंतरराष्ट्रीय फोन नंबरों से कथित तौर पर मिलने वाली धमकियों को लेकर चिंता जताई थी।
हाल ही में मुजफ्फरनगर में तैनाती के दौरान उन्होंने अपनी सुरक्षा व्यवस्था में किए गए बदलावों पर सवाल उठाए। उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक (DGP) को भेजे गए एक संदेश में उन्होंने कहा कि उनके साथ तैनात गनर को हटा दिए जाने से उनकी सुरक्षा खतरे में पड़ गई है।
हालांकि, पुलिस का कहना था कि उनकी सुरक्षा में पहले तैनात कर्मियों की जगह दूसरे सुरक्षाकर्मियों को लगाया गया था।
Judge Ravi Kumar Diwakar Biography: 2009 में न्यायिक सेवा में हुए थे शामिल
46 वर्षीय रवि कुमार दिवाकर ने वर्ष 2009 में मुंसिफ यानी सिविल जज (जूनियर डिवीजन) के रूप में उत्तर प्रदेश न्यायिक सेवा में प्रवेश किया था। उनके पास बीकॉम, एलएलबी और एलएलएम की डिग्रियां हैं।
अपने न्यायिक करियर के दौरान वे आजमगढ़, सुल्तानपुर, बदायूं और वाराणसी में तैनात रह चुके हैं। अप्रैल 2021 से जुलाई 2022 तक उन्होंने वाराणसी में सिविल जज (सीनियर डिवीजन) के रूप में काम किया।
इसके बाद उनका तबादला बरेली कर दिया गया, जहां बाद में वे अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश के रूप में फास्ट ट्रैक कोर्ट में तैनात हुए।
आधिकारिक रिकॉर्ड के मुताबिक, वे अप्रैल से नवंबर 2025 तक चित्रकूट में तैनात थे। इसके बाद नवंबर 2025 में उन्होंने मुजफ्फरनगर में कार्यभार संभाला।
Muzaffarnagar Court Transfer: जज शिव कुमारी का भी हुआ तबादला
हाल ही में जारी एक अन्य न्यायिक आदेश के अनुसार, फास्ट ट्रैक कोर्ट-2 की पीठासीन अधिकारी और अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश शिव कुमारी का भी तबादला किया गया है। उन्हें अब फास्ट ट्रैक कोर्ट-3 में स्थानांतरित कर दिया गया है। इस तरह न्यायिक स्थानांतरण आदेश के तहत जज रवि कुमार दिवाकर को फैमिली कोर्ट में नई जिम्मेदारी दी गई है, जबकि जज शिव कुमारी को फास्ट ट्रैक कोर्ट-3 में तैनात किया गया है।
Asianet News Hindi पर पढ़ें देशभर की सबसे ताज़ा National News in Hindi, जो हम खास तौर पर आपके लिए चुनकर लाते हैं। दुनिया की हलचल, अंतरराष्ट्रीय घटनाएं और बड़े अपडेट — सब कुछ साफ, संक्षिप्त और भरोसेमंद रूप में पाएं हमारी World News in Hindi कवरेज में। अपने राज्य से जुड़ी खबरें, प्रशासनिक फैसले और स्थानीय बदलाव जानने के लिए देखें State News in Hindi, बिल्कुल आपके आसपास की भाषा में। उत्तर प्रदेश से राजनीति से लेकर जिलों के जमीनी मुद्दों तक — हर ज़रूरी जानकारी मिलती है यहां, हमारे UP News सेक्शन में। और Bihar News में पाएं बिहार की असली आवाज — गांव-कस्बों से लेकर पटना तक की ताज़ा रिपोर्ट, कहानी और अपडेट के साथ, सिर्फ Asianet News Hindi पर।