राम मंदिर ट्रस्ट में चंपत राय की जगह लेने वाले कृष्ण मोहन कौन? घर का हर मेंबर सरकारी नौकरी में

Published : Jul 07, 2026, 11:47 AM ISTUpdated : Jul 07, 2026, 12:19 PM IST
Who Is Krishna Mohan

सार

Who Is Krishna Mohan : राम मंदिर में चढ़ावा चोरी के के बाद अब व्यवस्था में ट्रस्ट ने बड़ा बदलाव किया है। चंपत राय की जगह रिटायर्ड IFS कृष्ण मोहन को नया महासचिव बनाया गया है।

अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावा चोरी मामला सामने आने के बाद अब श्रीराम जन्‍मभूमि तीर्थ क्षेत्र ने व्‍यवस्‍था में बदलाव किया है। इस घटाले में चंपत राय का नाम सामने आने के बाद उन्होंने महासचिव पद से इस्तीफा दे दिया है। अब उनकी जगह इस पद पर रिटायर्ड IFS कृष्ण मोहन को यह जिम्मेदारी दी गई है। जो ट्रस्ट में समीति सदस्य है। बता दें कि कृष्ण मोहन वही हैं, जिन्होंने मंदिर की तरफ से चढ़ावा चोरी की सबसे पहली FIR कराई थी। तो आइए जानते हैं कौन हैं कृष्ण मोहन

लखनऊ यूनिवर्सिटी से पढ़े हैं कृष्ण मोहन

73 बर्षीय कृष्ण मोहन 1977 बैच के IFS (भारती वन सेवा) अफसर हैं। वह मूलरूप से उत्तर प्रदेश के हरदोई के शाहाबाद के रहने वाले हैं। पिता धर्मवीर सिंह भारतीय रेलवे में काम करते थे। कृष्ण मोहन ने अपने करियर के शुरुआत परमाणु ऊर्जा विभाग में नौकरी करके की थी। हालांकि 1977 में उन्होंने भारतीय वन सेवा परीक्षा पास कर ली और वह आईएफस अधिकारी बन गए। उन्होंने लखनऊ यूनिवर्सिटी से जियोलॉजी में एमएससी तक पढ़ाई की है।

कृष्ण मोहन के परिवार में सब सरकारी नौकर

कृष्ण मोहन के पिता धर्मवीर सिंह भारतीय रेलवे में काम करते थे। जिनका निधन हो चुका है। वहीं उनके छोटे भाई महेंद्र सिंह लखनऊ के बलरामपुर हॉस्पिटल में डॉक्टर हैं। उनके एक बेटा और बेटी हैं, दोनों सरकारी नौकरी में हैं। बेटा सौरव लखनऊ में डाक विभाग में तैनात है। तो वहीं बेटी स्नेहा मोहन नोएडा में सरकारी डॉक्टर है।

जानिए कैसे राम मंदिर ट्रस्ट में हुई उनकी एट्री

  • बता दें कि कृष्ण मोहन साल 2012 में नौकरी से रिटायर हो गए थे। इसके बाद वह RSS से जुड़ गए। सबसे पहले संघ ने उनको हरदोई नगर संघचालक बनाया गया। फिर जिला संघचालक और प्रांत तक की जिम्मेदारी बाखूबी संभाली। इस दौरान उन्होंने संघ के लिए दिन राम मेहनत करके प्रचार-प्रसार किया। कई युवाओं को संघ से जोड़ा।
  • बेहद साफ-सुथरी छवि और इमानदारी की वजह से उनको 2025 में राम मंदिर ट्रस्ट समीति में सदस्य बनाया गया। संघ से लेकर भाजपा और ट्रस्ट के सभी सदस्यों और अधिकारियों के बीच उनकी छवि बेहद भरोसेमंद व्यक्ति की है। इसी के कारण वे बहुत कम समय में ट्रस्ट के सबसे ताकतवर महासचिव पद तक पहुंच गए।

क्या है राम मंदिर चंदा विवाद?

सपा सरकार में पूर्व मंत्री रहे पवन पाडेय ने सबसे पहले 7 जून को राम मंदिर के दान पात्रों से करोड़ों रुपयों के गबन के लगाकर मामला उठाया था। इसके बाद मामला मीडिया में सामने आ गया और उत्तर प्रदेश सरकार ने जांच के लिए एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया। जिसमें 8 लोगों को गिरफ्तार जेल भेजा गया। इस विवाद में महासचिव चंपत राय का नाम भी सामने आया। जिसके बाद उन्होंने पद से इस्तीफा दिया। वहीं दूसरा सबसे बड़ा नाम अनिल मिश्रा का है, जिन्होंने भी ट्रस्टी से रिजाइन कर दिया। फिलहाल दोनों के खिलाफ जांच जारी है।

 

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