
कोलकाता : पश्चिम बंगाल में लगातार सियासी बवाल जारी है। नेताओं के हमले के बाद अब सबसे बड़ी खबर यह है कि ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस (TMC) में बड़ी टूट हो गई है। पार्टी से निकाले गए विधायक ऋतब्रत बनर्जी ने 58 विधायकों के साथ अपना अलग गुट बना लिया है। इतना ही नहीं उन्होंने 58 विधायकों के समर्थन के साथ विधानसभा अध्यक्ष रथींद्र बोस को समर्थन पत्र देकर उन्हें विधायक दल का नेता और नेता विपक्ष घोषित करने की मांग की, जिसे स्पीकर ने मंजूरी भी दे दी है।
बता दें कि ऋतब्रत बनर्जी ने बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की पार्टी के विधायक तोड़कर सबसे बड़ा खेला किया है। इतना बुरा हाल तो सीएम सुवेंदु ने भी नहीं किया जब वह पार्टी छोड़कर बीजेपी में शामिल हुए थे। लेकिन ऋतब्रत के इस कदम के बाद अब TMC पर महाराष्ट्र की शिवसेना वाला खतरा मंडराने लगा है। जैसे उद्धव ठाकरे से पार्टी का सिंबल भी छिन गया था। ठीक उसी मोड़ पर आज टीएमसी आकर खड़ी हो गई है। अगर ठीक वैसा ही हुआ तो आने वाले समय में ममता बनर्जी से भी उनकी पार्टी का सिंबल छिन सकता है।
ममता बनर्जी के साथ सबसे बड़ा खेला करे वाले ऋतब्रत बनर्जी उलुबेरिया पूरबा विधानसभा सीट से विधायक चुने गए हैं। हालांकि वह विधायक से पहले बंगाल से दो बार राज्यसभा के सांसद भी रह चुके हैं। 2017 में राज्यसभा गए और फिर 2024 में भी राज्यसभा सांसद बने। ऋतब्रत सीपीआईएम के नेता भी रह चुके हैं। लेकिन पार्टी विरोधी गतिविधियों में लिप्त होने के चलते ही उन्हें CPI (M) ने बाहर कर दिया था। जिसके बाद टीएमसी का दामन थामा। अब जब टीएमसी ने बाहर किया तो उन्होंने अपना अलग गुट बना लिया।
इस मामले पर बीजेपी सरकार के मंत्री दिलीप घोष का कहना है कि यह घटनाक्रम पार्टी के "परिवार राज" के पतन का संकेत है। घोष ने कहा, असल मुद्दा यह है कि यह एक परिवार की पार्टी थी, और लोग इसे छोड़ना तो चाहते थे, लेकिन डरते थे।" उन्होंने तृणमूल कांग्रेस के अंदर चल रही इस उथल-पुथल पर कहा कि अब लोग परिवार के शासन से दूर जा रहे हैं।आखिर में सिर्फ ममता और उनका भतीजा ही बचेगा; बाकी सब चले जाएंगे।"
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