Shikhar Agrawal APO: एक ही कंपनी से खरीदे 40 विला-कॉटेज, IAS अधिकारी को क्यों किया गया APO?

Published : Oct 30, 2026, 12:39 PM IST
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सार

राजस्थान के वरिष्ठ IAS अधिकारी शिखर अग्रवाल को सरकार ने APO कर दिया है। यह कदम ऐसे समय आया है जब परिवार की 40 विला-कॉटेज खरीद और उन्हें उसी कंपनी को लीज पर देने को लेकर सवाल उठे हैं। जानिए पूरा मामला।

Shikhar Agrawal APO: राजस्थान के प्रशासनिक गलियारों में इस वक्त भारी हलचल मची हुई है। राज्य सरकार ने 1993 बैच के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी शिखर अग्रवाल को अचानक 'अवेइटिंग पोस्टिंग ऑर्डर' (APO) यानी बिना किसी जिम्मेदारी के पद से हटाकर होल्ड पर रख दिया है। यह गाज उनके और उनके परिवार पर लगे एक ही रियल्टी कंपनी से 40 विला और कॉटेज खरीदने के गंभीर आरोपों के बाद गिरी है। आइए समझते हैं कि आखिर इस पूरे मामले का सच क्या है और क्यों एक पावरफुल ब्यूरोक्रेट को अचानक किनारे कर दिया गया।

कौन हैं IAS शिखर अग्रवाल?

शिखर अग्रवाल 1993 बैच के राजस्थान कैडर के वरिष्ठ IAS अधिकारी हैं। वे उद्योग, MSME और योजना जैसे महत्वपूर्ण विभागों में अतिरिक्त मुख्य सचिव (ACS) रह चुके हैं। वे RIICO के चेयरमैन और RAJSICO के MD की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं। अग्रवाल राजस्थान CMO में भी काम कर चुके हैं।

Shikhar Agrawal Property Case: 40 प्रॉपर्टी की खरीद पर क्या सवाल?

  • रिपोर्टों के मुताबिक, परिवार ने राजस्थान में दो जगहों पर कुल 40 संपत्तियां खरीदीं। इनका सौदा एक ही कंपनी से हुआ था।
  • उदयपुर के बुझड़ा में 20 कॉटेज खरीदे गए।
  • अलवर के अजबगढ़ में 20 विला खरीदे गए।
  • रिपोर्ट के अनुसार, इनकी कुल खरीद कीमत करीब 6.16 करोड़ रुपये थी।
  • खरीद के बाद इन संपत्तियों को उसी कंपनी को लीज पर देने के समझौते भी किए गए।

Villa Lease Deal: हर साल 1.80 करोड़ की लीज?

रिपोर्टों में सामने आया कि खरीदी गई संपत्तियों को बेचने वाली कंपनी को ही वापस लीज पर दिया गया था। इससे जुड़े आंकड़े भी चर्चा में हैं।

  • 20 कॉटेज के लिए सालाना 4 लाख रुपये प्रति कॉटेज की लीज बताई गई।
  • 20 विला के लिए सालाना 5 लाख रुपये प्रति विला की दर बताई गई।
  • इस हिसाब से कुल वार्षिक लीज राशि करीब 1.80 करोड़ रुपये बताई गई है।

IPR में संपत्तियों के खुलासे पर भी सवाल

  • मीडिया रिपोर्टों में अधिकारियों की Annual Immovable Property Returns यानी IPR को लेकर भी सवाल उठे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, शिखर अग्रवाल और प्रशाखा माथुर के नाम कुल 28 संपत्तियां बताई गई हैं। इनके अलावा परिवार के दूसरे सदस्यों के नाम पर भी खरीद हुई।
  • रिपोर्टों में दावा किया गया है कि कुछ संपत्तियों का विवरण IPR में दर्ज किए जाने को लेकर सवाल हैं। हालांकि, इन दावों की पूरी स्थिति संबंधित आधिकारिक रिकॉर्ड और जांच से ही स्पष्ट होगी।

फिलहाल सरकार ने संपत्ति सौदों को लेकर किसी आधिकारिक जांच की घोषणा नहीं की है। इसलिए इस मामले में सामने आए आरोपों और आधिकारिक कार्रवाई के बीच संबंध को लेकर अंतिम निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी।

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