सुरेंद्र कोली कौन था और निठारी केस में उसका क्या रोल था? जानें गिरफ्तारी, मौत की सजा, 2023 में 12 मामलों में बरी होने और नवंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट से अंतिम बरी तक की पूरी कहानी।
19 साल जेल, सुप्रीम कोर्ट से बरी, फिर चाय की दुकान पर क्यों की खुदकुशी?
सुरेंद्र कोली एक बार फिर सुर्खियों में है, लेकिन इस बार वजह निठारी कांड का कोई कोर्ट फैसला नहीं, बल्कि हरिद्वार में उसकी मौत है। पुलिस के मुताबिक, शुक्रवार 18 सितंबर को उसका शव भूपतवाला इलाके में लालमाता मंदिर के सामने एक चाय की दुकान में फंदे से लटका मिला। शुरुआती जांच में आत्महत्या का शक है। मौके से कोई सुसाइड नोट नहीं मिला और पुलिस मौत की परिस्थितियों की जांच कर रही है।
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Surendra Koli कौन था? निठारी केस से हरिद्वार तक
उत्तराखंड के अल्मोड़ा (भिकियासैन) के मंगरूखाल गांव का रहने वाला सुरेंद्र कोली नोएडा के सेक्टर-31 स्थित कोठी नंबर D-5 में बिजनेसमैन मोनिंदर सिंह पंढेर के घर बतौर घरेलू नौकर काम करता था। दिसंबर 2006 में इस कोठी के पीछे बने नाले से 15 इंसानी खोपड़ियां, कंकाल के अवशेष और बच्चों के कपड़े बरामद हुए, जिसके बाद देश दहल उठा था। इस खौफनाक खुलासे के बाद नोएडा पुलिस ने कोली और उसके मालिक पंढेर को गिरफ्तार कर लिया। बच्चों और युवतियों के अपहरण, दुष्कर्म और कत्ल के इस मामले की जांच जनवरी 2007 में सीबीआई (CBI) को सौंपी गई।
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ट्रायल कोर्ट की फांसी से लेकर हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट से बरी होने की कहानी
निचली अदालत ने सुरेंद्र कोली को 14 वर्षीय रिंपा हलदर हत्याकांड समेत 13 मामलों में दोषी ठहराते हुए मौत की सजा सुनाई थी। साल 2011 में सुप्रीम कोर्ट ने उसकी फांसी की सजा बरकरार रखी और दया याचिका खारिज होने पर 2014 में डेथ वारंट भी जारी हो गया था। हालांकि, याचिका दायर होने पर 2015 में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने देरी के आधार पर फांसी को उम्रकैद में बदला। इसके बाद अक्टूबर 2023 में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने सबूतों के अभाव और इकबालिया बयान पर सवाल उठाते हुए उसे 12 मामलों में बरी कर दिया।
जेल से बाहर आने के बाद 50 वर्षीय सुरेंद्र कोली हरिद्वार के भूपतवाला (लालमाता मंदिर के पास) चला गया था। वह पिछले कुछ महीनों से एक चाय की दुकान पर काम कर रहा था और वहीं रह रहा था। 18 सितंबर 2026 को वह दुकान के भीतर फंदे पर लटका मिला। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मौके से कोई सुसाइड नोट नहीं मिला है। शुरुआती कयासों में पारिवारिक कलह को एक वजह माना जा रहा है, हालांकि पुलिस मौत के सटीक कारणों की गहनता से पड़ताल कर रही है।
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नवंबर 2025 में मिली थी आखिरी मामले से भी राहत
सीबीआई और यूपी सरकार ने हाई कोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी, लेकिन जुलाई 2025 में शीर्ष अदालत ने बरी किए जाने के आदेश को सही ठहराया। अंततः नवंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने रिंपा हलदर केस से जुड़ी क्यूरेटिव याचिका स्वीकार करते हुए उसकी आखिरी सजा भी रद्द कर दी। अदालत ने साफ कहा कि केवल शक के आधार पर किसी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता और अभियोजन पक्ष फोरेंसिक व परिस्थितिजन्य सबूत साबित करने में नाकाम रहा। इसके साथ ही कोली को जेल से रिहा करने का रास्ता साफ हो गया था।
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Surendra Koli: मौत की सजा से बरी होने तक
निठारी से जुड़े कई मामलों में ट्रायल कोर्ट ने कोली को दोषी ठहराकर मौत की सजा सुनाई थी। 2011 में सुप्रीम कोर्ट ने रिंपा हलदर मामले में उसकी मौत की सजा बरकरार रखी थी। बाद में दया याचिका पर लंबी देरी के आधार पर 2015 में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने सजा को उम्रकैद में बदल दिया। फिर कानूनी तस्वीर तेजी से बदली। अक्टूबर 2023 में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने निठारी से जुड़े 12 मामलों में कोली को बरी कर दिया। कोर्ट ने अभियोजन के सबूतों को पर्याप्त नहीं माना। इन फैसलों को चुनौती दी गई, लेकिन जुलाई 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने संबंधित मामलों में बरी किए जाने को बरकरार रखा।
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