
India, Uzbekistan Strike Long-Term Uranium Deal: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उज्बेकिस्तान यात्रा में एक ऐसा फैसला हुआ, जिसका असर भारत की आने वाली ऊर्जा जरूरतों पर पड़ सकता है। पीएम मोदी ने उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति शावकत मिर्जियोयेव के साथ बातचीत के बाद ऐलान किया कि दोनों देश यूरेनियम की लंबी अवधि की सप्लाई व्यवस्था स्थापित करेंगे। लेकिन सवाल यह है कि भारत को आखिर Uranium की इतनी जरूरत क्यों पड़ रही है?
जवाब भारत के तेजी से बढ़ते Nuclear Power Programme में छिपा है।
भारत आने वाले वर्षों में परमाणु ऊर्जा उत्पादन बढ़ाने की दिशा में काम कर रहा है। Nuclear Power को ऐसी बिजली के रूप में देखा जाता है, जो लगातार उत्पादन कर सकती है और कोयले जैसे जीवाश्म ईंधन की तुलना में कम कार्बन उत्सर्जन करती है।
लेकिन परमाणु रिएक्टरों को चलाने के लिए यूरेनियम जैसे परमाणु ईंधन की जरूरत होती है। जैसे-जैसे भारत नए Nuclear Power Plants विकसित करेगा, वैसे-वैसे भरोसेमंद और पर्याप्त ईंधन आपूर्ति सुनिश्चित करना भी जरूरी होगा।
यही वजह है कि उज्बेकिस्तान के साथ Long-Term Uranium Supply Arrangement भारत के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
My remarks during meeting with President Shavkat Mirziyoyev.@president_uz pic.twitter.com/fcZ1cAhse2
— Narendra Modi (@narendramodi) August 30, 2026
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भारत के पास अपने घरेलू यूरेनियम संसाधन हैं, लेकिन परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम की बढ़ती जरूरतों को देखते हुए सिर्फ घरेलू उत्पादन पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं हो सकता।
इसलिए भारत कई देशों से परमाणु ईंधन की सप्लाई सुनिश्चित करने की रणनीति पर काम करता रहा है। लंबे समय की सप्लाई व्यवस्था किसी एक स्रोत पर निर्भरता कम करने और ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करने में मदद कर सकती है।
उज्बेकिस्तान दुनिया के महत्वपूर्ण यूरेनियम उत्पादक देशों में शामिल है, इसलिए उसके साथ यह व्यवस्था भारत के लिए रणनीतिक महत्व रखती है।
भारत की ऊर्जा जरूरत लगातार बढ़ रही है। देश को कोयला, तेल और गैस के साथ भविष्य के लिए Nuclear Energy जैसे स्रोतों पर भी निवेश करना पड़ रहा है।
यूरेनियम की स्थिर सप्लाई सुनिश्चित होने का मतलब है कि भविष्य में परमाणु बिजली परियोजनाओं के लिए ईंधन उपलब्धता को लेकर बेहतर योजना बनाई जा सकेगी।
यह समझौता सिर्फ ऊर्जा तक सीमित नहीं है। उज्बेकिस्तान मध्य एशिया में भारत का एक महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदार है। दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश, IT, फार्मास्यूटिकल्स और सांस्कृतिक संबंध लगातार बढ़ रहे हैं।
प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा के दौरान दोनों देशों ने रिश्तों को और व्यापक बनाने का संकेत दिया। ऐसे में Uranium Supply Arrangement भारत की Energy Security के साथ-साथ Central Asia में उसकी रणनीतिक मौजूदगी को भी मजबूत कर सकता है।
PM Modi की Uzbekistan यात्रा का यह फैसला इसलिए अहम है क्योंकि भारत सिर्फ आज की बिजली जरूरत नहीं देख रहा, बल्कि आने वाले दशकों की Nuclear Energy जरूरतों के लिए भी अपनी तैयारी मजबूत कर रहा है।
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